स्वस्थ भारत मीडिया
नीचे की कहानी / BOTTOM STORY

The thermometer—सिलेबस में शामिल हो हेल्थ: डॉ. ममता

The thermometer—सिलेबस में शामिल हो हेल्थ: डॉ. ममता

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। यू—ट्यूब के The thermometer कार्यक्रम में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ममता ठाकुर ने महिलाओं से जुड़े रोगों पर बात की थी। यह बातचीत स्वस्थ भारत मीडिया के समूह संपादक आशुतोष कुमार सिंह ने की थी। बातचीत के दूसरे और अंतिम भाग में उन्होंने हेल्थ को स्कूली सिलेबस में हिस्सा देने की वकालत की है।

आशुतोष: आप IMA और अन्य मेडिकल एसोसिएशन से भी जुड़ी रही हैं। आपके सामाजिक सरोकार हैं। क्या ऐसा नहीं हो सकता कि हम हेल्थ की मूलभूत जानकारी प्राथमिक स्तर से पढ़ाना शुरू करें? स्वास्थ्य को विषय के रूप में पढ़ाएं?
डॉ. ममता: बिल्कुल। यह बात सिस्टम के अंदर आनी चाहिए। हम बच्चों के क्लास में हेल्थ पर बात करें। बताएं कि एनीमिया क्या है? हेल्थ पर कैसे ध्यान रखना है? स्पोर्ट्स क्लास हो। विदेशों में रोज एक घंटे का स्पोर्ट्स का क्लास रखते हैं। इससे बच्चों में स्पोर्ट्स की धारणा विकसित होती है। ऐसा यदि हफ्ते में एक बार रखते हों तो वो चीज पूरा नहीं हो रहा है। आज की सारी समस्याएं लाइफस्टाइल से है। हम वर्क फ्रॉम होम करते हैं। बच्चे मोबाइल पर होमवर्क कर रहे हैं। उसी की वजह से हेल्थ, ओबेसिटी, पीसीओडी वगैरह की समस्याएं हैं। तो यह कहीं ना कहीं हमारी सरकार को जागरूक होना पड़ेगा कि हेल्थ को लेकर एक सब्जेक्ट रखें जिससे लड़कियों— लड़कों को जागरूक करें। आज बीमारियां दवाइयों से ठीक नहीं हो रही है। आपको एक्सरसाइज, योग, मेडिटेशन से ठीक करना पड़ेगा क्योंकि शरीर के साथ-साथ माइंड भी बीमार चल रहा है। स्ट्रेस, एंजायटी, डिप्रेशन…छोटा-छोटा बच्चा आता है। क्या हुआ? डिप्रेशन होता क्या है? अरे डिप्रेशन नहीं है तुम्हें। यह तुमने सब सुन लिया है तो कहीं ना कहीं यह समस्या बिना दवा के दूर होती है। दवा के साइड इफेक्ट से नुकसान होता है। आप पूरे लाइफ डिप्रेशन, एंजाइटटी की दवा खाते रहोगे और आप ड्रम हो जाओगे। सरकार को चाहिए कि एक पीरियड हेल्थ पर होना चाहिए।

#Thethermometer

आशुतोष: क्या ऐसी सलाह आप IMA के मुख्य पदाधिकारी को देंगी और सरकार को रिपोर्ट देना चाहेंगी?
डॉ. ममता: अगर इस पर सहमति बने तो बिल्कुल हम देना चाहते हैं। अभी कैंसर वाले प्रोग्राम को लेकर गए थे तो हमारा एक पॉइंट ये भी था कि 10वीं—12वीं में बच्चों को फर्स्ट ऐड का प्रशिक्षण दिया जाए। मान लीजिए एक लड़का है और देख रहा है कि कोई बेहोश हो गया, उसे सीपीआर देने की जरूरत है तो उसको यह जानना चाहिए ताकि वो हार्ट अटैक से हॉस्पिटल तक पहुंच जाए। कहीं ना कहीं हम सबको यह नॉलेज होना चाहिए, एक सर्टिफिकेट होना चाहिए तभी उसका एडमिशन कॉलेज में हो। एक छोटी बच्ची जो अभी स्कूल नहीं गई उनकी इशू हो गई यूटीआई यूरिनरी ट्रैक इनफेक्शन की क्योंकि सफाई नहीं होती। उससे इनफेक्शन हो जाता है। इचिंग हो जाती है। बच्चे हैं और उनको नहीं पता कैसे क्लीन करना है। पानी की व्यवस्था नहीं हो पाती है। दो-तीन साल की बच्ची वेजिनाइटिस लेकर आती। बाद में यह क्रॉनिक बन जाती है। आपको लगता है कि आज आपने ठीक कर दिया। कभी हाइजीन इशू आएगा तो फिर बढ़ जाएगा। वर्किंग लेडीज जो सार्वजनिक प्लेस पर जाती हैं तो उनको यूटीआई की प्रॉब्लम बढ़ जाती है। तो उसकी अवेयरनेस स्कूल में ही होनी चाहिए। यदि हम एक हेल्थ चैप्टर रखते हैं तो उसमें हमें थोड़ी छोटी मोटी डिजीज की जानकारी होनी चाहिए। दवा पर कब तक निर्भर रहेंगे। आप देख ही रहे हैं कि प्रदूषण है। सांस फूलती है। बच्चा बच्चा ग्रसित है। उससे केवल हम स्पोर्टस, योगा, मेडिटेशन से ही बच सकते हैं। अपने लंग्स को मजबूत करें। बचपन से इसकी आदत डालें। जब बच्चा स्कूल में रोज करेगा तो आदत बन जाएगी।

#Thethermometer

आशुतोष: आम महिलाएं घर का सारा निबटा कर स्नान—पूजा करने के बाद भोजन करती हैं। फिर वे कैसे स्वस्थ रहेंगी?
डॉ. ममता: ऐसा तो पढ़ी—लिखी महिलाएं तक करती हैं। उन पर काम का भारी बोझ है। काम से ओवरलोडेड हैं। सबको ध्यान रखना होगा चाहे पति हों या भाई। पूजा नहाने से पहले ही किया जा सकता है। यदि मन साफ हो तो नाश्ता करते-करते प्रभु का नाम ले सकते हो। खाना बनाते बनाते प्रभु का नाम ले सकता है। आपके प्रभु कौन हैं? आपका बच्चा जिसको आपने स्कूल भेजा है स्कूल। आपके प्रभु आपके पति हैं। आपका स्वास्थ्य है। प्रभु तो कहते हैं मैं हर चीज में हूं। यदि आप अपने हेल्थ को इग्नोर करते हैं तो भगवान कभी खुश नहीं होंगे। मैं तो कहती हूं कि परिवार को ज्यादा जागरूक रहना जरूरी है क्योंकि महिलाएं अपने हेल्थ को बहुत इग्नोर करती हैं। महिलाओं का हेल्दी रहना बहुत जरूरी है। मल्टीटास्किंग लेडी को मेड रख लेना चाहिए। इससे थोड़ी मानसिक शांति मिलेगी। इससे आप मन से खाना बना भी सकेंगी। भागमभाग में शरीर परेशान होता है। आप एक्सरसाइज, योग, मेडिटेशन का वक्त नहीं निकाल पाती। शरीर थका रहेगा हो डायबिटीज, हाइपरटेंशन टेंशन, ओबेसिटी, थायराइड आदि उसी वजह से हो रहा है। इन सबकी जड़ लाइफस्टाइल है। एक महिला की क्षमता पुरुषों से 10 गुना ज्यादा होता है।

(समाप्त)

पहला भाग यहां पढ़ें—https://www.swasthbharat.in/the-thermometer-women-should-be-cautious-about-their-health-dr-mamta-thakur/

प्रस्तुति: अजय वर्मा

Related posts

पोलियो मुक्त भारत एक बड़ी स्वास्थ्य उपलब्धि

admin

संविदा कर्मी भी इन्सान हैं …

Ashutosh Kumar Singh

कोरोना: चुनौती नहीं अवसर है

Ashutosh Kumar Singh

Leave a Comment