नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। देशभर में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की अब एक लाख 80 हजार से अधिक हो गयी है। इसमें प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं के 12 पैकेज उपलब्ध हैं। इसमें प्रजनन एवं शिशु देखभाल सेवाएं, संक्रामक रोग, गैर-संक्रामक रोग (NCD), उपशामक देखभाल और वृद्धजन देखभाल, सामान्य मानसिक विकारों की देखभाल, तंत्रिका संबंधी स्थितियां (मिर्गी, मनोभ्रंश) और मादक द्रव्य सेवन विकार प्रबंधन (तंबाकू, शराब, ड्रग), ओरल स्वास्थ्य, ईएनटी देखभाल और बुनियादी आपातकालीन देखभाल आदि शामिल हैं। यहां 172 दवाएं और 63 निदान उपलब्ध कराए जा रहे हैं। यह जानकारी स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रताप राव जाधव ने राज्यसभा में दी है।
राज्यसभा: प्रमुख सेवाएं मौजूद
उन्होंने बताया कि उपलब्ध प्रमुख सेवाओं में पांच सामान्य गैर-संक्रामक रोगों (एनसीडी) अर्थात उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मुख कैंसर, स्तन कैंसर और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के लिए व्यापक जांच की सेवाएं शामिल हैं। राष्ट्रीय गैर-संक्रामक रोग रोकथाम और नियंत्रण कार्यक्रम (NP-NCD) पोर्टल के अनुसार अक्टूबर 2025 तक ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के SHC और PHC में AAM सहित उच्च रक्तचाप के लिए 38.79 करोड़, मधुमेह के लिए 36.05 करोड़, मुख कैंसर के लिए 31.88 करोड़, स्तन कैंसर के लिए 14.98 करोड़ और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के लिए 8.15 करोड़ जांच की जा चुकी हैं। इसके अलावा टेली-परामर्श सेवाएं भी दी जा रही है ताकि लोगों को उनके घरों तक विशेषज्ञ सेवाओं तक पहुंच बनी रहे।
राज्यसभा: टीबी मुक्त अभियान
उन्होंने टीबी मुक्त भारत अभियान के बारे में जानकारी दी कि यह कार्यक्रम पूरे देश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तत्वावधान में कार्यान्वित किया जा रहा है। इसके तहत अज्ञात टीबी मामलों की पहचान, टीबी से संबंधित मौतों को कम करने और नए संक्रमणों को रोकने के लिए एक नया दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है। इसमें संवेदनशील आबादी की पहचान, छाती के एक्स-रे से जांच, सभी संभावित टीबी मामलों के लिए पहले से न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट (NAAT), शीघ्र और उचित उपचार शुरू करना, उच्च जोखिम वाले टीबी मामलों के प्रबंधन के लिए विशिष्ट टीबी देखभाल, घरेलू संपर्कों और पात्र संवेदनशील आबादी को पोषण सहायता और निवारक उपचार प्रदान करना शामिल है। देश भर के सभी टीबी रोगियों का विवरण दर्ज करने के लिए निक्षय पोर्टल का उपयोग किया जाता है।
