नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। जब केंद्र की मोदी सरकार ने यह तय कर लिया कि मेडिकल शिक्षा तक पहुंच को आसान बनाने के लिए अब उसे हिंदी में भी पढ़ाया जाए तब बड़ी चुनौती सामने आयी कि इसकी अंग्रेजी की पुस्तकों को कैसे तैयार किया जाए। लेकिन आप यह जानकर हैरत में पड़ जाएंगे कि महज 11 महीने में पूरा सिलेबस हिंदी में तैयार हो गया।
मेडिकल : चुनौती का समाधान भी

इस चुनौती का कैसे समाधान निकला, काफी रोचक है। और यह किस्सा सुनाया मध्यप्रदेश के मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने। अभी वे सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के मंत्री हैं। लेकिन पिछली सरकार में वे चिकित्सा शिक्षा मंत्री थे। श्री सारंग मध्य प्रदेश में चल रहे अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि मेडिकल की पढ़ाई में अंग्रेजी एक बड़ी चुनौती समझी जाती है। लेकिन ये मेरा सौभाग्य रहा कि पूर्व में मेडिकल एजुकेशन मिनिस्टर होने के नाते पहली बार मध्य प्रदेश में हिंदी में मेडिकल की पढ़ाई की शुरुआत मैंने की। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉर्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति को अलग करते हुए, जब एक नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की बात की तो उन्होंने यही बात रखी थी कि क्यों ना इस देश में मेडिकल और टेक्निकल एजुकेशन भी हिंदी में होनी चाहिए या क्षेत्रीय भाषाओं में होनी चाहिए?
मेडिकल: वॉर रूम बनाकर काम
मंत्री ने बताया कि मोदी जी के निर्देश को चुनौती के रूप में लेते हुए उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि मध्य प्रदेश में मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में शुरू करेंगे। जब उन्होंने पहली बार इस विषय को अपने विभाग के अधिकारियों के साथ बैठकर साझा किया, तो अधिकारियों की बॉडी लैंग्वेज में उन्हें पूरी तरह नकारात्मकता दिखी। अधिकारियों को यह लगता था कि नेताजी थोड़ी उत्साही हैं, क्योंकि ऐसा तो बिल्कुल भी संभव नहीं है। मंत्री ने आगे बताया कि मैं इजीनियरिंग बैकग्राउंड से रहा हूं इसलिए मेरे लिए मेडिकल बिल्कुल इतर विषय था, लेकिन हमने शुरुआत की और मेडिकल कॉलेजों की फैकल्टी से बात की, जिसमें से 91 शिक्षकों ने हमारा समर्थन किया। इसके बाद भोपाल में एक वॉर रूम बनाया गया।
मेडिकल : 11 माह में ट्रांसलिटरेशन
आगे उन्होंने बताया कि भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में मंदार नाम से वॉर रूम बनाया गया, जिसमें मैंने स्वयं भी टीचर्स के साथ बैठकर प्रयास किया। लगभग आठ महीने की मेहनत के बाद मेडिकल के प्रथम वर्ष के चार विषयों की किताबों का रूपांतरण किया। मंत्री ने स्पष्टता प्रदान करते हुए बताया कि मेडिकल की किताबों का अंग्रेजी से हिंदी में ट्रांसलेशन नहीं किया गया, बल्कि ट्रांसलिटरेशन किया गया। हम यह नहीं चाहते थे कि हिंदी और अंग्रजी का झगड़ा हो। इसलिए हमने यह ध्यान रखा कि मेडिकल टर्मिनोलॉजी को नहीं बदला जाए। सो हमने टेक्निकल टर्म्स को नहीं बदला। हम इस झगड़े में नहीं पड़े कि एंजियोप्लास्टी को हिंदी में क्या कहेंगे। हमने उसे देवनागरी में ही एंजियोप्लास्टी लिखा। हमने अंग्रजी में चलने वाली किताबों की हिंदी में ट्रांसलिटरेशन किया। ट्रांसिलिटरेशन इतना वैज्ञानिक किया गया कि किसी को हिंदी और अंग्रेजी पढ़ने में कहीं कोई दिक्कत नहीं है। इसी के आधार पर अंकन योजना और जांच की प्रक्रिया भी बनाई गई। हमने आठ महीनों में प्रथम वर्ष की किताबें बनाईं और उसके बाद अगले तीन महीने में तीन साल की किताबों को ट्रांसलिटरेट कर दिया।
