नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। यूपी के सरकारी अस्पतालों में अब डॉक्टर 70 साल की उम्र तक मरीजों का इलाज कर सकेंगे। राज्य में डॉक्टरों की कमी को देखते हुए यह प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। मालूम हो कि डॉक्टरों के करीब 19 हजार पद हैं जबकि 7 हजार पर रिक्त है। इसके अलावा रिटायर हो रहे डॉक्टरों के कारण भी समस्या बढ़ जाती है। इस कारण सरकार ने महानिदेशालय से प्रस्ताव मांगा है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की भी कमी
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद सरकारी सेवा के खाली पदों पर भर्ती नहीं हो पा रही है। सबसे ज्यादा संकट विशेषज्ञ डॉक्टरों का है। विशेषज्ञ डॉक्टरों के करीब 9 हजार पद हैं लेकिन भर्ती केवल 2500 की ही है। सबसे बड़ा संकट ग्रामीण इलाकों के सीएचसी, पीएचसी के साथ कम्युनिटी हेल्थ सेंटर और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की है। ऐसे कई केंद्र तो बिना डॉक्टर के चल रहे हैं। ऐसे में डॉक्टरों के संकट से निपटने के लिए शासन पुराने डॉक्टरों के रिटायरमेंट और उनके री अपॉइंटमेंट की उम्र बढ़ाने पर ही जोर दे रही है। पुराने अनुभवी डॉक्टरों को 5 साल के लिए सेवाएं देने का मौका मिलेगा तो उसका फायदा इन अस्पतालों को भी होगा।
शुरू न हो सकीं भर्तियां
सूत्रों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सक और नए बने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षकों की भर्ती में तेजी लाने को इस साल जनवरी में ‘विशेषज्ञ चिकित्सक एवं चिकित्सा शिक्षक भर्ती बोर्ड’ का गठन हुआ। इसके करीब छह महीने बाद भी यह बोर्ड एक भी भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं कर सका। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक इसी महीने मानक पूरे होने के बाद इस बोर्ड के जरिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती शुरू हो सकती है।
