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न्यूक्लिक एसिड स्टेनिंग डाई का किफायती विकल्प विकसित

नई दिल्ली। आणविक निदान (मोलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स) और जीवन विज्ञान अनुसंधान मेंन्यूक्लिक एसिड स्टेनिंग डाई के विविध उपयोग होते हैं। भारतीय वैज्ञानिकों ने न्यूक्लिक एसिड स्टेनिंग डाई का किफायती विकल्प विकसित किया है। डाई GreenR नामक इस न्यूक्लिक एसिड स्टेनिंग डाई वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की लखनऊ स्थित प्रयोगशाला केन्द्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (CDRI) द्वारा विकसित की गई है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर ग्रीनआरकीप्रौद्योगिकी व्यावसायिक उत्पादन के लिए उत्तर प्रदेश में पंजीकृत स्टार्ट-अप कंपनी जीनटूप्रोटीन प्राइवेट लिमिटेड (GPPL) को हस्तांतरित की गई है।

वैज्ञानिकों को सफलता

डाई ग्रीनआर को सीडीआरआई के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अतुल गोयल ने संस्थान के एकऔद्योगिक भागीदार बायोटेक डेस्क प्राइवेट लिमिटेड (BDPL), हैदराबाद के संयुक्त सहयोग से विकसित किया है। डॉ. गोयल ने बताया कि ग्रीनआर व्यावसायिक रूप से उपलब्ध डीएनए-आरएनए डाइज (रंजकों), जो वर्तमान में विदेशों से आयात किए जाते हैं, के लिए एक किफायती विकल्प है। यह जीनोमिक डीएनए, पीसीआर उत्पादों, प्लास्मिड और आरएनए सहित सभी न्यूक्लिक एसिड के साथ अच्छी तरह बंध सकता है, तथा नीली रोशनी या पराबैंगनी रोशनी के संपर्क में आने पर चमकने लगता है।

मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया

शोधकर्ताओं ने रीयल टाइम पीसीआर और डीएनए बाइंडिंग में इसके जैविक अनुप्रयोगों का अध्ययन किया है। डॉ. गोयल ने बताया कि ग्रीनआर डाई के आणविक निदान (मोलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स) और जीवन विज्ञान अनुसंधान में विविध अनुप्रयोग हैं। ग्रीनआर के रासायनिक संश्लेषण को डॉ. गोयल की टीम में शामिल शोधकर्ताओं द्वारा मानकीकृत किया गया है जिनमें शाजिया परवीन और कुंदन सिंह रावत शामिल हैं। जीपीपीएल की निदेशक डॉ श्रद्धा गोयनका की योजना ‘गोग्रीनआर’ अभियान शुरू करने की है जिसमें वह पूरे भारत के वैज्ञानिकों से उत्परिवर्तन कारक (म्यूटाजेनिक) एथिडियम ब्रोमाइड के उपयोग को ग्रीनआर डाई से बदलने का आग्रह करती है। डॉ. गोयनका ने बताया कि इस उत्पाद को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।

इंडिया साइंस वायर से साभार

 

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