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विकराल होते कैंसर से बचाने को सरकार चिंतित क्यों नहीं?

अजय वर्मा

नयी दिल्ली। 2000 से 2019 के बीच 19 सालों में भारत में कैंसर से एक करोड़ 28 लाख से भी अधिक लोगों की मौत हुई है। अमेरिकन कैंसर सोसायटी के प्रतिष्ठित जर्नल Global oncology में प्रकाशित एक आंकड़े ने इसकी पुष्टि की है। केंद्र सरकार के नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम के आंकड़ों के मुताबिक 2020 से 2022 के बीच देश में कुल 23 लाख 67 हजार 990 लोगों की मौत की वजह कैंसर बनी। इस गति को देखते हुए एक्सपर्ट बताते हैं कि 2030 तक हर तीन में एक व्यक्ति कैंसर रोगी होगा।

संचिका 10 महीने से लंबित

मौत की इतनी बड़ी संख्या के बावजूद भारत सरकार के पास कैंसर को अधिसूचित बीमारी घोषित करने की संसदीय समिति की सिफारिशों वाली फाइल पिछले 10 महीने से लंबित पड़ी है। सरकार जी-20 की मेजबानी का जश्न मनाने में व्यस्त हैे और विपक्ष राजनीति में। ये डरावने आंकड़े बता रहे हैं कि आने वाला वक्त भयावह होने वाला है। लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए बीते एक अगस्त को पूरी दुनिया ने विश्व लंग कैंसर दिवस मना लिया लेकिन यह कौन बता सकेगा कि सरकार कितनी जागरूक हुई?

आयुष्मान योजना में कितनी सुविधा?

अमीरों को छोड़ दें क्योंकि वे कैंसर के अति खर्चीले उपचार में समर्थ हैं लेकिन गरीबों के एक हिस्से के लिए आयुष्मान भारत योजना का 5 लाख रुपये का कवरेज है। एक तो कैंसर के इलाज के लिए यह रकम बहुत ही कम है और योजना में क्या कैंसर की टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी की दवाएं शामिल हैं? सरकार को तो बताना चाहिए कि कैंसर के इलाज की कौन-कौन सी दवा उनकी इस योजना के तहत मिल सकती हैं।

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