पटना (स्वस्थ भारत मीडिया)। दरभंगा में बिहार का दूसरा AIIMS बनाने को लेकर इन दिनों सियासत गरम है। तीन-चार दिनों के बाद मुख्यमंत्री नीतीष कुमार ने अपनी चुप्पी तोड़ी और साफ कहा कि यह एम्स शोभन में ही बनेगा। अगर नही तो जाने केंद्र सरकार।
डिप्टी सीएम के पत्र से उठा बवाल
पहले तो डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने एक पत्र शेयर कर पीएम मोदी पर निशाना साधा। तेजस्वी यादव ने कहा था कि पीएम दरभंगा में एम्स खुलवाने का झूठा श्रेय ले रहे थे। वस्तुस्थिति ये है कि बिहार सरकार ने निःशुल्क 151 एकड़ ज़मीन केंद्र को दी और 250 करोड़ से अधिक मिट्टी भराई के लिए आवंटित किया लेकिन राजनीति करते हुए केंद्र ने उसेे स्वीकृति नहीं दी। इसके बाद जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने पीएम मोदी पर हमला बोला। तब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने तेजस्वी यादव को जवाब देते हुए कहा था कि मोदी सरकार विकास में राजनीति नहीं करती बल्कि विकास की राजनीति करती है। दरभंगा एम्स की अनुमति मोदी सरकार ने 19 सितंबर 2020 को दी थी और बिहार सरकार ने 3 नवंबर 2021 को पहली जमीन दी।
विपक्ष को इसमें गोलमाल की आशंका
अब भाजपा ने इस मामले पर पटलवार किया है। भाजपा सांसद और बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने उस जमीन पर ही सवाल दाग दिया कि लालू यादव के करीबी ने जमीन देने की बात किसके इशारे पर की? राजनीतिक हलकों में यह सवाल भी उठ रहा है कि जब जांचोपरांत उस जमीन को केंद्र की मंजूरी से पहले ही मिट्टी भराई की तैयारी हो गयी तो घोटाले की गुंजाईश बनती ही है। अगुवानी पुल समेत कुछ पुलों के बनने के दौरान ही धंस जाने पर एक्शन के बदले लीपापोती से यह आशंका बनती ही है।

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