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महंगी हो गईं एक हजार से ज्यादा दवाइयां

महंगी हो गईं एक हजार से ज्यादा दवाइयां

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। अप्रैल से 900 से ज्यादा आवश्यक दवाइयों की कीमत 1.74 प्रतिशत बढ़ गयी है। इससे आम लोगों का दवाइयों पर खर्च बढ़ जाएगा और बचत कम हो जाएगी। महंगी होने वाली दवाओं में इंफेक्शन, डायबिटीज और हार्ट की दवाइयां भी शामिल हैं। बताते चलें कि केंद्र सरकार के रसायन और उर्वरक मंत्रालय के अधीन काम करने वाला विभाग राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) आवश्यक दवाइयों की कीमत तय करता है। आवश्यक दवाओं की कीमत में पिछले साल के थोक मूल्य सूचकांक (WPI) को ध्यान में रखकर कटौती या बढ़ोतरी की जाती है।

मलेरिया, एंटीबायोटिक दवाओं की कीमत बढ़ेंगी

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार NPPA ने एक बयान में कहा कि 2023 की तुलना में 2024 के दौरान WPI +1.74028% का बदलाव दर्ज किया गया। दवा निर्माता इसके आधार पर अनुसूचित फॉर्मूलेशन के अधिकतम खुदरा मूल्य में बढ़ोतरी कर सकते हैं और इस संबंध में सरकार की पूर्व स्वीकृति की जरूरत नहीं होगी। सरकार के इस आदेश के बाद एंटीबायोटिक एजिथ्रोमाइसिन की कीमत 11.87 (250 एमजी) और 23.98 रुपये (500 एमजी) प्रति टैबलेट होगी। एमोक्सिसिलिन और क्लैवुलैनिक एसिड के फॉर्मूलेशन वाले एंटीबैक्टीरियल ड्राई सिरप की कीमत 2.09 रुपये प्रति एमएल होगी। एसाइक्लोविर जैसे एंटीवायरल की कीमत 7.74 रुपये (200 मिलीग्राम) और 13.90 रुपये (400 मिलीग्राम) प्रति टैबलेट होगी। इसी तरह, मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की कीमत 6.47 रुपये (200 मिलीग्राम) 14.04 रुपये (400 मिलीग्राम) प्रति टैबलेट होगी।

दर्द की दवाएं भी होंगी महंगी

खबर के मुताबिक दर्द से राहत पाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवा डाइक्लोफेनाक की अधिकतम कीमत अब 2.09 रुपये प्रति टैबलेट होगी, जबकि आइबुप्रोफेन टैबलेट की कीमत 0.72 रुपये (200 एमजी) और 1.22 रुपये (400 एमजी) प्रति टैबलेट होगी। एनपीपीए ने राष्ट्रीय आवश्यक दवाओं की लिस्ट (NLEM) में मौजूद एक हजार से ज्यादा दवाइयों की कीमतों में बढ़ोतरी की मंजूरी दी है।

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