धीप्रज्ञ द्विवेदी
नयी दिल्ली। हर दिन हमें लगता है कि सूरज उगता है, दिन बीतता है और रात हो जाती है — यानी 24 घंटे का एक चक्र। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हर दिन की लंबाई बिल्कुल 24 घंटे नहीं होती? वैज्ञानिकों ने हाल ही में पाया कि 9 जुलाई 2025 को पृथ्वी ने एक पूरा घूर्णन सामान्य से थोड़ा जल्दी पूरा किया, जिससे यह दिन वर्ष 2025 का सबसे छोटा दिन बन गया।
क्या हुआ 9 जुलाई को?
9 जुलाई 2025 को पृथ्वी ने अपनी धुरी पर एक पूरा चक्कर 24 घंटे से लगभग 1.31 मिलीसेकंड कम समय में पूरा कर लिया। यह सुनने में भले ही बहुत छोटा अंतर लगे, लेकिन खगोलीय गणनाओं में यह एक महत्वपूर्ण घटना है। इस घटना को “शॉर्टेस्ट सोलर डे” कहा जाता है।
दिन छोटा क्यों हुआ?
पृथ्वी की घूर्णन गति स्थिर नहीं होती। कई प्राकृतिक और भौतिक कारणों से इसमें हल्का-फुल्का बदलाव आता रहता है। आइए समझते हैं कि इस दिन की लंबाई कम क्यों हुई:
1. पृथ्वी के आंतरिक परिवर्तन
पृथ्वी के अंदर का लिक्विड कोर (तरल कोर) लगातार गतिशील रहता है। इसके चलते पृथ्वी की घूर्णन गति प्रभावित होती है। जब यह गति थोड़ी बढ़ जाती है, तो दिन छोटा हो जाता है।
2. जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियर का पिघलना
ग्लेशियरों के पिघलने से पृथ्वी के द्रव्यमान का वितरण बदलता है, जिससे उसका घूर्णन थोड़ा तेज हो सकता है।
3. चंद्रमा और सूर्य का गुरुत्वाकर्षण प्रभाव
चंद्रमा और सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी की घूर्णन गति को धीमा या तेज कर सकता है। यह ज्वार-भाटे के माध्यम से पृथ्वी की गति को प्रभावित करता है।
4. भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट
कभी-कभी बड़े भूकंप या ज्वालामुखी विस्फोट भी पृथ्वी के घूर्णन को थोड़ा-बहुत बदल सकते हैं।
कैसे मापा गया यह बदलाव?
इस तरह के सूक्ष्म बदलावों को मापने के लिए वैज्ञानिक परमाणु घड़ियों (Atomic Clocks) और अंतरराष्ट्रीय पृथ्वी घूर्णन सेवा (IERS) की मदद लेते हैं। ये घड़ियाँ इतनी सटीक होती हैं कि मिलीसेकंड (हजारवें हिस्से) के अंतर को भी पहचान सकती हैं।
इसका क्या असर हो सकता है?
हालांकि आम लोगों के लिए यह बदलाव महसूस करने योग्य नहीं होता, लेकिन तकनीकी दृष्टि से यह महत्वपूर्ण है:
- सैटेलाइट और GPS सिस्टम समय पर आधारित होते हैं। यदि पृथ्वी की घूर्णन गति में बदलाव आता है, तो समय की गणना में त्रुटियाँ हो सकती हैं।
- लीप सेकंड का समायोजन करना पड़ सकता है ताकि घड़ियाँ पृथ्वी की गति के साथ तालमेल में रहें।
क्या भविष्य में और छोटे दिन आएंगे?
वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में पृथ्वी की घूर्णन गति में और भी बदलाव हो सकते हैं। कुछ शोधों के अनुसार, पृथ्वी धीरे-धीरे अपनी गति बढ़ा सकती है, जिससे और भी छोटे दिन दर्ज किए जा सकते हैं। हालांकि, दीर्घकालिक रूप से पृथ्वी की गति धीमी हो रही है, लेकिन अल्पकालिक उतार-चढ़ाव बने रह सकते हैं।
निष्कर्ष
9 जुलाई 2025 को पृथ्वी ने एक नया रिकॉर्ड बनाया—वर्ष का सबसे छोटा दिन। यह घटना हमें याद दिलाती है कि हमारी पृथ्वी एक जीवंत और गतिशील ग्रह है, जिसकी गति और व्यवहार समय-समय पर बदलते रहते हैं। विज्ञान की मदद से हम इन सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण परिवर्तनों को समझ सकते हैं और भविष्य की तैयारियाँ कर सकते हैं।
