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रैकिंग में लगातार 8वीं बार सबसे स्वच्छ शहर बना इंदौर

रैकिंग में लगातार 8वीं बार सबसे स्वच्छ शहर बना इंदौर

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया0। स्वच्छता रैंकिंग 2025 में मध्य प्रदेश का इंदौर शहर एक बार फिर देश का सबसे स्वच्छ शहर बन गया है। इसे पहला स्थान मिला है। प्रथम आने की संभावना सूरत और पुणे की भी थी। इंदौर ने 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों की सुपर स्वच्छ लीग सिटीज कैटेगरी में ओवरऑल पहला स्थान हासिल किया। सूरत, नवी मुंबई को शीर्ष शहरों में स्थान मिला है। तीन से 10 लाख आबादी वाले शहरों में नोएडा पहली पायदान, चंडीगढ़ दूसरे और मैसूर तीसरे स्थान पर रहा है। 50 हजार से तीन लाख जनसंख्या वाले शहरों की बात करें तो नई दिल्ली नगर निगम इलाका अव्वल रहा।

4 श्रेणी में 12 शहर पुरस्कृत

रैंकिंग के अनुसार 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहर में अहमदाबाद, भोपाल, लखनऊ तो तीन से 10 लाख आबादी वाले शहर में मीरा भायंदर, बिलासपुर, जमशेदपुर, 50 हजार से तीन लाख आबादी वाले में देवास, करहद, करनाल को क्रमश: पहला, दूसरा और तीसरा स्थान मिला। स्वच्छता सर्वेक्षण 2024-25 में शहरी स्वच्छता का आकलन करने के लिए एक स्मार्ट विजन अपनाया गया है। इसमें जनता की भागीदारी को बड़े पैमाने पर प्रमुखता दी जाती है।

राष्ट्रपति के हाथों मिला सम्मान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विज्ञान भवन में आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय (MOHUA) के समारोह में विजेता शहरों को पुरस्कार प्रदान किया। इंदौर का पुरस्कार कैलाश विजयवर्गीय ने लिया। इस अवसर पर बोलते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि यह सर्वेक्षण हमारे शहरों द्वारा स्वच्छता के प्रयासों का आकलन और प्रोत्साहन करने में एक सफल प्रयोग साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना ने प्राचीन काल से ही स्वच्छता पर जोर दिया है। अपने घरों, पूजा स्थलों और आस-पास को साफ रखने की परंपरा हमारी जीवनशैली का अभिन्न अंग थी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहा करते थे—स्वच्छता ईश्वर भक्ति के बाद आती है। वे स्वच्छता को धर्म, आध्यात्मिकता और नागरिक जीवन की आधारशिला मानते थे।

45 सौ शहर रेस में

केंद्र सरकार शहरों के बीच स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए हर साल ऐसा सर्वे कराती है। इसमें कई मानकों को शामिल किया जाता है। स्वच्छता सर्वेक्षण के 9वें वर्ष में प्रवेश करते हुए इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण में 4500 से अधिक शहरों को शामिल किया गया था। इनमें स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और निस्तारण समेत 10 मापदंडों और 54 इंडीकेटर्स पर शहरों को परखा जाता है।

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