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नमक भारत में बढ़ावा दे रहा है ‘छिपी हुई महामारी’ को

नमक भारत में बढ़ावा दे रहा है 'छिपी हुई महामारी' को

इफ़्तेख़ार अली

नयी दिल्ली। नमक हमारे खाने का एक ज़रूरी हिस्सा है। इससे न सिर्फ़ खाने का स्वाद बढ़ता है, बल्कि यह हमारे शरीर के लिए भी फ़ायदेमंद होता है। नमक से शरीर में पानी का संतुलन बना रहता है और यह मांसपेशियों के सही तरीके़ से काम करने में मदद करता है। हालाँकि जैसे हर चीज़ की एक सीमा होती है, वैसे ही नमक का बहुत ज़्यादा सेवन भी आपके लिए हानिकारक साबित हो सकता है। कई मामलों में बहुत ज़्यादा नमक खाने से आपकी जान भी जा सकती है।
ICMRर के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एपिडेमियोलॉजी के वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसी बातें बताई हैं, जिन्हें जानकर आप चौंक सकते हैं। लेकिन उससे पहले ये समझते हैं कि हमारे शरीर को रोज़ाना कितनी मात्रा में नमक की ज़रूरत होती है, और अगर हम इससे ज़्यादा नमक खाएं तो इसका हमारी सेहत पर क्या बुरा असर पड़ सकता है।
ज़्यादा नमक खाना सेहत के लिए नुक़सानदायक होता है इसलिए यह ज़्यादा अहम है कि हम किस तरह का नहीं, बल्कि कितना नमक खा रहे हैं, इस पर ध्यान दिया जाए। यह समझना भी ज़रूरी है कि नमक सिर्फ़ घर के पके खाने से ही नहीं मिलता, बल्कि कई पैकेज्ड और तैयार उत्पादों में भी इसकी मात्रा काफ़ी ज़्यादा होती है। अगर इन चीज़ों का ज़रूरत से ज़्यादा सेवन किया जाए, तो यह सेहत पर बुरा असर डाल सकता है- भले ही आप रोज़ के खाने में कम नमक डाल रहे हों।
WHO की सिफ़ारिश है कि एक व्यक्ति को रोज़ाना 5 ग्राम से कम नमक का सेवन करना चाहिए, जो लगभग एक चम्मच के बराबर होता है। हाल में हुए एक अध्ययन में सामने आया है कि भारत में लोग इस तय मात्रा से कहीं ज़्यादा नमक खा रहे हैं।
आईसीएमआर के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी के वैज्ञानिकों के मुताबिक़, भारत में बहुत ज़्यादा नमक का सेवन एक ‘छिपी हुई महामारी’ को बढ़ावा दे रहा है। उनका कहना है कि अधिक नमक खाने से हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन), स्ट्रोक, हृदय रोग और किडनी से जुड़ी समस्याओं का ख़तरा तेज़ी से बढ़ रहा है। अध्ययनों से पता चला है कि शहरी इलाक़ों में रहने वाले भारतीय औसतन 9.2 ग्राम नमक रोज़ खाते हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह मात्रा करीब 5.6 ग्राम प्रतिदिन है। वैज्ञानिकों की ओर से जारी ये आँकड़े विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफ़ारिश से कहीं ज़्यादा हैं।

कम नमक खाने से क्या फ़ायदा?

विशेषज्ञों का कहना है कि ज़्यादा नमक खाने से कई तरह की बीमारियों का ख़तरा बढ़ सकता है, जबकि इसकी सीमित मात्रा से इन समस्याओं से बचाव संभव है। दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी और पैन्क्रिएटिको-बिलियरी साइंसेज़ के वाइस चेयरपर्सन डॉ. पीयूष रंजन ने कहा, “लगातार नमक का सेवन हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) से जुड़ा हुआ है।” उन्होंने बताया, “हाई ब्लड प्रेशर अपने आप में एक मल्टीसिस्टमिक बीमारी है, यानी यह शरीर के कई अंगों को प्रभावित करता है। इसका सबसे ज़्यादा असर हृदय और किडनी पर पड़ता है।” “फिज़ियोलॉजिकल (शारीरिक) स्थिति में भी जब शरीर में कई तरह की बीमारियाँ होती हैं, तो उनमें सोडियम का रिटेंशन यानी शरीर में नमक का जमाव बढ़ने लगता है। शरीर में नमक और पानी का संतुलन बनाए रखना किडनी की ज़िम्मेदारी होती है।”

हाई ब्लड प्रेशर

उन्होंने बताया, “ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए कई दवाएँ दी जाती हैं, जिन्हें डाययूरेटिक्स कहा जाता है। ये दवाएँ किडनी के ज़रिए शरीर से नमक बाहर निकालती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है।” “कार्डियक फेलियर, किडनी की बीमारी और लिवर सिरोसिस जैसे मामलों में इलाज के तौर पर नमक की मात्रा सीमित करनी होती है।” इसलिए सिर्फ़ बीमारी की स्थिति में ही नहीं, बल्कि सामान्य रूप से भी ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने और हृदय व किडनी को सुरक्षित रखने के लिए नमक का सीमित सेवन लाभकारी है।
किसी भी उम्र में ज़्यादा नमक खाना ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है इसलिए नमक का सेवन जितना संभव हो, कम करना चाहिए। खासकर उन चीज़ों से बचना ज़रूरी है जिनमें छिपा हुआ नमक मौजूद होता है।
डॉ. पीयूष रंजन के मुताबिक़, कई आम खाद्य पदार्थों में छिपा हुआ नमक होता है-

  • अचार
  • पापड़
  • पैकेज्ड फूड (नमकीन, चिप्स, सॉस, रेडी-टू-ईट आइटम्स)
  • प्रोसेस्ड फूड (सॉसेज, नूडल्स, केचप, बिस्किट आदि)
    इन उत्पादों में नमक की मात्रा सामान्य से कहीं ज़्यादा होती है इसलिए इन्हें ख़रीदते समय लेबल पर सोडियम की मात्रा ज़रूर जाँचें और जहाँ तक संभव हो, इनका सेवन टालें या सीमित करें।

साभार

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