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घुटनों की बीमारी में एकीकृत चिकित्सा पद्धति कारगर

घुटनों की बीमारी में एकीकृत चिकित्सा पद्धति कारगर

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। घुटनों से संबंधित बीमारी तो उसके उपचार में योग तथा आयुर्वेद पर आधारित एकीकृत चिकित्सा पद्धति का सहयोग लेने से बेहतर परिणाम मिले हैं। इससे ऑपरेशन की स्थिति को भी टाला जा सकता है। इस बात की पुष्टि ऋषिकेश स्थित एम्स के चिकित्सकों के शोध में हुई है। इस संयुक्त पद्धति से उपचार करने पर मरीजों में कम समय में ही सकारात्मक परिणाम दिखे हैं।

30 मरीजों पर हुआ शोध

रिपोर्ट के अनुसार ऋषिकेश एम्स के जेरियाट्रिक मेडिसिन विभाग ने PMR तथा आयुष विभाग के सहयोग से 30 मरीजों पर तीन महीने तक शोध किया। ये सभी मरीज घुटनों के ऑस्टियोऑर्थराइटिस से पीड़ित थे। इन्हें घुटनों के जोड़ों में दर्द के साथ ही चलने फिरने में भी दिक्कत हो रही थी। एम्स के चिकित्सकों ने इनके उपचार के लिए योग का एक मॉड्यूल भी तैयार किया। इन सभी मरीजों को तीन माह तक लगातार योग कराने के साथ ही आयुर्वेदिक दवाएं भी दी गईं। तीन माह बाद सभी मरीजों में 80 फीसद तक का सुधार देखा गया है। चिकित्सकों का कहना है कि इन रोगियों का एक साल तक परीक्षण किया जाएगा। इस शोध में अभी और भी मरीजों को शामिल किया जाएगा।

कम होंगे रोग के लक्षण

एम्स प्रशासन का कहना है कि योग और आयुर्वेद पर आधारित यह शोध घुटनों के ऑस्टियोऑर्थराइटिस के रोगियों के लिए मानव कल्याण की दिशा में एक अभिनव प्रयास है। इसका उद्देश्य घुटनों के ऑस्टियोऑर्थराइटिस से पीड़ितों की जीवन गुणवत्ता और रोग नियंत्रण में योग और आयुर्वेद पर आधारित एकीकृत चिकित्सा पद्धति की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करना है। चिकित्सकों का कहना है कि इस शोध का उद्देश्य यह जानना है कि भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां योग और आयुर्वेद जब एकीकृत रूप से संयोजित की जाती है तो वह इस रोग के लक्षणों को कम कर सकती है, रोगियों की दैनिक जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बना सकती है और उन्हें दीर्घकालिक राहत दे सकती है।

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