नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने दिल्ली में फिक्की HEL 2025 के 19वें संस्करण को संबोधित किया। इस दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन फिक्की द्वारा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और नीति आयोग के सहयोग से किया जा रहा है, “केयर@25 – स्वास्थ्य सेवा में निर्णायक क्षण” विषय के तहत आयोजित किया गया है। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने पिछले 25 वर्षों में भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए महत्वपूर्ण परिवर्तन पर प्रकाश डाला तथा सभी के लिए सुलभ, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिए सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
केयर@25: हेल्थ क्षेत्र में नया युग
उन्होंने याद दिलाया कि 2017 में केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य सेवा सुधार के एक नए युग की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य एक व्यापक और समग्र स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण करना था जो निवारक से लेकर प्रोत्साहन, उपचारात्मक, पुनर्वास और उपशामक सेवाओं तक निरंतर देखभाल सुनिश्चित करती है। उन्होंने कहा, “सुलभ और व्यापक स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने देश भर में 1.7 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित किए हैं, जो नागरिकों के लिए संपर्क का पहला बिंदु हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवा वितरण का आधार विस्तृत हुआ है।” राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए श्री नड्डा ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों के समर्पित प्रयासों के कारण भारत में संस्थागत प्रसव 79 प्रतिशत से बढ़कर 89 प्रतिशत हो गया है।
केयर@25: मातृ—शिशु मृत्युदर में कमी
उन्होंने कहा कि नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) के अनुसार मातृ मृत्यु दर (MMR) 130 से घटकर 88 प्रति लाख जीवित जन्म हो गई है जबकि शिशु मृत्यु दर (IMR) 39 से घटकर 27 प्रति हज़ार जीवित जन्म हो गई है, जो मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में निरंतर प्रगति को दर्शाता है। पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर (U5MR) में 42 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो वैश्विक औसत 14 प्रतिशत की गिरावट से कहीं अधिक है और नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) में 39 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह गिरावट 11 प्रतिशत रही है, जो नवजात शिशुओं के जीवित रहने की दर में भारत की तीव्र वृद्धि को दर्शाता है।
केयर@25: टीबी केस में बड़ी सफलता
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि WHO के आंकड़ों के अनुसार भारत में क्षय रोग (टीबी) के मामलों में 17.7 प्रतिशत की कमी आई है जो वैश्विक औसत गिरावट (8.3 प्रतिशत) से दोगुने से भी ज़्यादा है। लैंसेट की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि टीबी का इलाज अब निदान के 10 से 15 दिनों के भीतर शुरू हो जाता है, जिससे शुरुआती पहचान, देखभाल और केस प्रबंधन में काफ़ी सुधार हुआ है। मंत्री ने यह भी दोहराया कि सरकार का मुख्य ध्यान स्वास्थ्य सेवाओं में वित्तीय सुरक्षा और वहनीयता पर केंद्रित है। प्रस्तावित जीएसटी 2.0 ढांचे के तहत सरकार ने स्वास्थ्य बीमा पर शून्य प्रतिशत जीएसटी की दिशा में एक प्रगतिशील कदम है जिससे नागरिकों के लिए स्वास्थ्य बीमा अधिक किफायती और सुलभ हो सकेगा।
केयर@25: नवाचार में प्रगति जरूरी
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि स्वास्थ्य परिणामों और नवाचार में प्रगति को गति देने के लिए सार्वजनिक-निजी सहयोग महत्वपूर्ण है। उन्होंने आगे कहा कि फिक्की एचईएएल जैसे प्लेटफॉर्म नीति निर्माताओं, उद्योगपतियों और विशेषज्ञों को एक साथ लाकर भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में परिवर्तनकारी एजेंडे को गति देते हैं। इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य प्रो. वी.के. पॉल ने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को दोहराया। उन्होंने उन्नत और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा बुनियादी ढाँचे पर भी बल दिया।
केयर@25: कई रिपोर्ट जारी
इस अवसर पर श्री नड्डा ने भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में नीति, नवाचार और गुणवत्ता को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण ज्ञान पत्रों को औपचारिक रूप से जारी किया। इन ज्ञान पत्रों में ‘फिक्की-ईवाई रिपोर्ट: सच्ची जवाबदेह देखभाल – भारतीय स्वास्थ्य सेवा में गुणवत्ता और व्यवहार्यता को आगे बढ़ाना’ शामिल है, जो स्वास्थ्य सेवा वितरण में जवाबदेही और दक्षता को मज़बूत करने की रणनीतियों पर प्रकाश डालती है; ‘फिक्की पेपर: भारत में दीर्घायु लाभ को प्राप्त करना – सक्रिय और स्वस्थ वृद्धावस्था’, जो भारत की वृद्ध होती जनसंख्या में स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने के उपायों को रेखांकित करता है; तथा ‘फिक्की-केपीएमजी पेपर: स्वास्थ्य सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता – कृत्रिम बुद्धिमत्ता-संचालित परिवर्तन में देखभाल की पुनर्कल्पना’, जो स्वास्थ्य सेवा परिणामों में सुधार करने और रोगी अनुभव को बेहतर बनाने की दिशा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की परिवर्तनकारी क्षमता को रेखांकित करता है।
