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पोलियो मुक्त भारत एक बड़ी स्वास्थ्य उपलब्धि

पोलियोमुक्त भारत एक बड़ी स्वास्थ्य उपलब्धि

World Polio Day पर खास

डॉ. हर्षवर्द्धन

(पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री)

एक समय था जब भारत को पोलियो (POLIO) का गढ़ कहा जाता था। हर वर्ष हजारों बच्चे इस बीमारी की चपेट में आते थे। लेकिन आज, वही भारत दुनिया के लिए प्रेरणा बन चुका है क्योंकि हमने असंभव लगने वाली इस लड़ाई को जीतकर इतिहास रचा।
भारत की पोलियो-मुक्ति की कहानी सिर्फ एक स्वास्थ्य उपलब्धि नहीं, बल्कि यह जनभागीदारी, सरकारी समर्पण और सामाजिक चेतना की मिसाल है। 1990 के दशक में शुरू हुई यह यात्रा 2014 में उस समय नई ऊँचाई पर पहुँची जब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत को पोलियो-मुक्त राष्ट्र घोषित किया।कभी पोलियो को अजेय बीमारी माना जाता था। यह वह दौर था जब हर साल दुनिया भर में लाखों बच्चे जीवनभर के लिए अपंग हो जाते थे। 1988 में जब ग्लोबल पोलियो उन्मूलन पहल की शुरुआत हुई, तब विश्व में लगभग 3.5 लाख से अधिक मामले हर वर्ष दर्ज किए जाते थे लेकिन आज स्थिति बिल्कुल बदल चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, 2024 में पूरी दुनिया में 312 पोलियो के मामले दर्ज हुए, जबकि 2025 की शुरुआत में अब तक केवल 52 मामले ही सामने आए हैं। यह मानवता की अद्भुत विजय यात्रा है।

Polio: 2014 में भारत हुआ मुक्त

इस परिवर्तन की कहानी में भारत की भूमिका सबसे प्रेरणादायक रही है। एक समय था जब भारत विश्व के कुल पोलियो मामलों का लगभग 60 फीसद हिस्सा था। 1994 तक यह बीमारी हमारे समाज की गहराई तक फैली हुई थी। लेकिन इसी देश ने, अटूट संकल्प और सामूहिक प्रयासों से, असंभव को संभव कर दिखाया। 13 जनवरी 2011 को भारत में पोलियो का अंतिम मामला दर्ज हुआ और मात्र तीन वर्ष बाद 27 मार्च 2014 को WHO ने भारत को पोलियो-मुक्त राष्ट्र घोषित किया।
यह सफलता किसी एक संस्था की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के एकजुट प्रयास की परिणति थी। सरकार के दृढ़ नेतृत्व, स्वास्थ्यकर्मियों की समर्पित सेवा, समाजसेवियों और स्वयंसेवी संगठनों की अथक मेहनत और हर नागरिक के सहयोग ने “दो बूंद ज़िंदगी की” को एक राष्ट्रीय आंदोलन बना दिया। दूरदराज़ गाँवों, झुग्गियों, सीमावर्ती इलाकों और पहाड़ी क्षेत्रों तक पहुंचकर टीकाकरण करने वालों ने दिखाया कि जब नीयत साफ़ हो, तो सीमाएँ मायने नहीं रखतीं।

Pulse Polio: ‘दो बूंद ज़िंदगी की’ का अभियान

Pulse Polio अभियान के तहत “दो बूंद ज़िंदगी की” का नारा हर घर तक पहुँचा। गाँव-गाँव, झुग्गी-झोपड़ियों से लेकर सीमावर्ती इलाकों तक स्वास्थ्य-टीमें पहुँचीं। कोई बच्चा छूटे नहीं, यह नारा हर भारतीय के दिल में गूंज उठा। आज भारत का यह मॉडल पूरे विश्व के लिए एक मिसाल है। WHO और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी भारत की इस उपलब्धि को “सबसे कठिन परिस्थितियों में मिली ऐतिहासिक सफलता” बताया है। भारत ने न केवल अपने बच्चों को सुरक्षित किया, बल्कि दुनिया को यह भरोसा भी दिलाया कि सामूहिक प्रयास से कोई भी बीमारी मिटाई जा सकती है। फिर भी, यह लड़ाई पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे कुछ देशों में अब भी वाइल्ड पोलियो वायरस (WPV1) के मामले दर्ज हो रहे हैं, और कुछ क्षेत्रों में वैक्सीन-उत्पन्न पोलियो (cVDPV) की चुनौतियाँ बनी हुई हैं। ऐसे में भारत की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है जागरूकता बनाए रखना, 100 प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करना और विश्वस्तर पर सहयोग जारी रखी जाए।

‘वैक्सीन मैत्री’- विश्व की अगुवाई करता भारत

मैं यहाँ व्यक्तिगत नहीं होना चाहूँगा मगर मैंने अपने जीवन के दो दशक से भी ज्यादा का समय इस अभियान को समर्पित किया था। देश-विदेश के डॉक्टरों के साथ मंथन, गाँव-गाँव की माताओं और बहनों के साथ सीधा संवाद स्थापित करते हुए युद्धस्तर पर इसके लिए काम करना, ये सब मेरे जीवन का सबसे यादगार घटनाक्रम रहेगा। वो समय मेरे लिए बेहद भावुक पल था, जब भारत को पोलियो मुक्त घोषित किया गया था। ये जीत तब मैंने परिवार के साथ काफी उमंग और उल्लास के साथ मनाया था। मुझे लगा कि इस कहानी को जनता के बीच लाना चाहिए, तब जाकर मैंने इसपर A TALE OF TWO DROPS और ‘दो बूंद की’ कहानी पुस्तक लिखी, जहां इस अभियान को संकल्प से सिद्धि तक लेकर जाने से जुड़ी हर एक बात का जिक्र मैंने किया था।

गौरवान्वित हुआ भारतः डॉ. हर्ष वर्धन बने WHO के कार्यकारी बोर्ड के अध्यक्ष

आज World Polio Day पर, हमें गर्व है कि भारत ने दुनिया को दिखाया कि साझा प्रयास, मजबूत नीतियाँ और जनभागीदारी से कोई भी असंभव लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। यह केवल पोलियो पर विजय नहीं, बल्कि एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य और आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत की नींव है।

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