नयी दिल्ली स्वस्थ भारत मीडिया)। आयुर्वेद क्षेत्र में गदरपुर, उत्तराखंड से बड़ी खबर है। पद्मश्री वैद्य बालेन्दु प्रकाश को भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा एक महत्वपूर्ण कार्यकारी समूह में सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। यह समूह टाटा मेमोरियल सेंटर के सहयोग से “कैंसर देखभाल और नियंत्रण नीति पर श्वेत पत्र” (White Paper on Cancer Care and Control Policy Project) के लिए इनपुट प्रदान करेगा। वैद्य बालेन्दु प्रकाश गदरपुर के रतनपुरा में पड़ाव स्पेशलिटी आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट सेंटर के संस्थापक हैं और आयुर्वेद की रस शास्त्र शाखा के विशेषज्ञ भी। वे लंबे समय से कैंसर, क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस और अन्य जटिल रोगों के आयुर्वेदिक उपचार में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। उनकी इस नियुक्ति से आयुष प्रणालियों, विशेषकर आयुर्वेद, को आधुनिक कैंसर देखभाल में एकीकृत करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान की उम्मीद है।
कैंसर: मिली बड़ी जिम्मेवारी
यह कार्यकारी समूह आयुष मंत्रालय द्वारा गठित किया गया है, जिसमें सोवा रिग्पा, आयुर्वेद, योग, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी के विभिन्न विशेषज्ञ शामिल हैं। समूह का उद्देश्य कैंसर देखभाल में आयुष के एकीकरण, योग की भूमिका, नियामक मार्ग और क्लिनिकल दिशानिर्देशों पर डेटा प्रदान करना है। वैद्य बालेन्दु प्रकाश की इस उपलब्धि पर स्थानीय लोगों में खुशी की लहर है। उनके केंद्र में आने वाले मरीजों और शुभचिंतकों का कहना है कि यह उत्तराखंड और आयुर्वेद के लिए गौरव की बात है। पद्मश्री से सम्मानित वैद्य प्रकाश पूर्व में राष्ट्रपति के चिकित्सक भी रह चुके हैं और उनके शोध आधारित आयुर्वेदिक प्रोटोकॉल विश्व स्तर पर सराहे गए हैं। यह कदम भारत में एकीकृत चिकित्सा पद्धति को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
कैंसर: वैद्य बालेंदु प्रकाश का परिचय
वैद्य बालेंदु प्रकाश एक पारंपरिक आयुर्वेदिक परिवार से आते हैं। उन्होंने विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है और आयुर्वेद में साढ़े पाँच वर्ष की विश्वविद्यालय डिग्री हासिल की है। वे आयुर्वेद में रस-शास्त्र का अभ्यास करते हैं जो पुरानी सूजन संबंधी, प्रतिरक्षा संबंधी और चयापचय संबंधी विकारों की रोकथाम और उपचार में संसाधित धातुओं और खनिजों के उपचार से संबंधित है। उन्हें अपने प्रायोगिक और नैदानिक अनुसंधान परियोजनाओं के लिए सरकारी और निजी संस्थाओं से कई अनुदान प्राप्त हुए हैं और उन्होंने एलर्जिक राइनाइटिस, माइग्रेन, पोषण संबंधी एनीमिया, हेपेटाइटिस, अग्नाशयशोथ और तीव्र प्रोमायलोसाइटिक ल्यूकेमिया के उपचार के लिए उत्पाद और प्रोटोकॉल विकसित किए हैं। उनके नाम लगभग पैंतीस अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन और दो अंतरराष्ट्रीय पेटेंट हैं। उनके कार्यों को देखते हुए केंद्र सरकार ने 1999 में पद्मश्री सम्मान से नवाजा था। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अनेक प्रस्तुतियाँ दी हैं। उन्हें वर्ष 2021 के लिए रस शास्त्र के क्षेत्र में सीआरएवी (राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ प्रमाणपत्र) गुरु के रूप में चुना गया था। वे विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से आयुर्वेद उपचार अवधारणाओं के विभिन्न पहलुओं के वैज्ञानिक सत्यापन हेतु अनेक प्रायोगिक और नैदानिक अध्ययन करने में सक्रिय रूप से संलग्न हैं।
