पटना (स्वस्थ भारत मीडिया)। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और NCDC के निर्देशों के अनुसार एम्स पटना (AIIMS Patna) के जनरल मेडिसिन विभाग में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम उत्तर भारत में चल रही भीषण शीत लहर से आम जनता के स्वास्थ्य को बचाने के लिए कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल के नेतृत्व में किया गया।
Aiims: क्या करें, क्या न
कार्यक्रम की शुरुआत जनरल मेडिसिन के हेड और रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) ज्योति प्रकाश के स्वागत भाषण से हुई, जिन्होंने ठंड के कारण होने वाली समस्याओं जैसे हाइपोथर्मिया, हार्ट अटैक और स्ट्रोक के बारे में बताया। कार्यकारी निदेशक ने मरीजों और उनके परिजनों से बात की और इस जानकारी को समाज तक पहुँचाने पर जोर दिया। इस दौरान प्रो. (डॉ.) चंद्र मोहन कुमार ने बच्चों को शीतलहर से बचाव के तरीकों और डॉ. आनंद कुमार राय (HoD Neurology) ने ठंड के कारण बढ़ते स्ट्रोक के मामलों पर विशेष जानकारी दी। इंचार्ज मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. (डॉ.) अमित राज और जनरल मेडिसिन विभाग के अन्य संकायों ने भी अपने विचार साझा किए। समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए मरीजों के बीच क्या करें और क्या न करें के पैम्फलेट भी बांटे गए।
Aiims: ऐसे रखें ख्याल

एम्स पटना के ईएनटी विभाग की प्रमुख प्रोफेसर (डॉ.) क्रांति भावना ने भी सर्दियों में होने वाली गले की खराश, साइनस की समस्याओं और कान-नाक-गले से जुड़ी अन्य समस्याओं के बारे में जागरूकता संदेश साझा किया है। प्रो. (डॉ.) भावना एक पुरस्कार विजेता ईएनटी सर्जन हैं, जिन्हें कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मानमिल चुका है जिनमें BACO फेलोशिप (यूके), ईएनटी सर्जन ऑफ द ईयर–टीओआई, कई AOICON और CIGICON पुरस्कार शामिल हैं। वे एमबीबीएस और एमएस में स्वर्ण पदक विजेता भी हैं। वे कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी, न्यूरोटोलॉजी और स्कल बेस सर्जरी, एंडोस्कोपिक साइनस और ट्यूमर सर्जरी, और सिर और गर्दन के कैंसर की सर्जरी में विशेषज्ञता रखती हैं और नैदानिक अनुसंधान में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा है कि ठंडी हवा गले और नाक में जलन पैदा कर सकती है और फेफड़ों को भी प्रभावित कर सकती है। सर्दियों में साइनस की जकड़न और संक्रमण भी बढ़ जाते हैं। चूंकि कान और नाक छोटी नलियों से जुड़े होते हैं, इसलिए नाक का संक्रमण कान तक भी पहुंच सकता है।
सर्दियों में स्वस्थ रहने की सलाह
-खुद को गर्म रखें। सर्दियों के कपड़े पहने बिना बाहर न निकलें।
-गर्म पानी और गर्म पेय पदार्थ पिएं।
-ठंडी हवा के सीधे संपर्क से बचें।
-गले, कान या साइनस के लक्षणों का जल्द से जल्द इलाज कराए।
