BHU : ONGC का सहयोग
ट्रॉमा सेंटर के प्रोफेसर इंचार्ज डॉ. सौरभ सिंह ने बताया कि यह उन्नत रोबोटिक तकनीक सर्जरी में उच्च सटीकता, रोगी-विशिष्ट एलाइनमेंट, कम दर्द, शीघ्र रिकवरी और बेहतर दीर्घकालिक परिणाम सुनिश्चित करती है। उन्होंने बताया कि यह सुविधा ओएनजीसी के सीएसआर सहयोग से शुरू की गई है। इससे पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और आसपास के राज्यों के मरीजों को सरकारी अस्पताल में ही विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध होगा। पहली रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी बिहार के औरंगाबाद निवासी 74 वर्षीय अवधेश कुमार की हुई। सर्जरी में शामिल डॉक्टर आलोक राय ने बताया कि देश के कई बड़े सरकारी अस्पतालों में भी यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों में घुटना प्रत्यारोपण पर 4 से 5 लाख रुपये तक खर्च आता है, जबकि बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में यह सुविधा आयुष्मान कार्ड के तहत उपलब्ध होगी। अन्य मरीजों के लिए भी खर्च निजी अस्पतालों की तुलना में एक-चौथाई से कम होगा।
BHU : बड़ी उपलब्धि
एनेस्थीसिया विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर रीना ने बताया कि मरीज को स्पाइनल और एपिड्यूरल दोनों प्रकार का एनेस्थीसिया दिया गया। सर्जरी में लगभग दो घंटे का समय लगा और आधुनिक तकनीक के कारण मरीज को जल्द चलने-फिरने में सहायता मिलेगी। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अजीत कुमार चतुर्वेदी ने इसे पूर्वांचल के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में तकनीकी नवाचार विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और स्वास्थ्य सेवाओं में सकारात्मक बदलाव का संकेत है। बीएचयू ट्रॉमा सेंटर अब रोबोटिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी की सुविधा देने वाला देश का पहला सरकारी संस्थान बन गया है। इससे मरीजों को महंगे निजी अस्पतालों या महानगरों की यात्रा करने की आवश्यकता कम होगी और समय पर सटीक इलाज उपलब्ध हो सकेगा।
