यूपी 15.3 करोड़ खातों से टॉप पर, राजस्थान—महाराष्ट्र 7 करोड़ के पार
नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। स्वास्थ्य सेवा तंत्र को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा कार्यान्वित आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन ने पूरे देश में 90 करोड़ ‘आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खातों’ (ABHA) को खोलने का रिकॉर्ड बनाया है। यह डिजिटल स्वास्थ्य तंत्र की यात्रा में बड़ी उपलब्धि है। आभा एक विशिष्ट 14-अंकीय डिजिटल स्वास्थ्य पहचान है, जो नागरिकों को उनकी सहमति से उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड को सुरक्षित रूप से जोड़ने, देखने और साझा करने में सक्षम बनाती है। ‘आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन’ के प्रमुख आधार स्तंभों में से एक के रूप में, ‘आभा’ विभिन्न स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं, केंद्रों और डिजिटल स्वास्थ्य ऐप्स के बीच लंबे समय तक चलने वाले स्वास्थ्य रिकॉर्ड बनाने में मदद करती है, जिससे नागरिकों को उनकी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पर अधिक नियंत्रण और अधिकार मिलता है।
आभा: 21 में 14 करोड़ खाते
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की शुरुआत के बाद से आभा खाते बनाने में लगातार बढ़ोतरी हुई है। कैलेंडर वर्ष के आधार पर, कुल आभा खातों की संख्या 2021 में 14.7 करोड़ से बढ़कर 2022 में 30.4 करोड़, 2023 में 50.6 करोड़, 2024 में 72.2 करोड़ और 2025 में 84.5 करोड़ हो गई। 2026 में इन खातों की संख्या ने 90 करोड़ के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर लिया। इस उपलब्धि पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुनील कुमार बर्नवाल ने कहा कि 90 करोड़ से अधिक आभा खातों का खुलना आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन में नागरिकों, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और इस तंत्र में बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। ‘आभा’ नागरिकों को उनकी अपनी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी तक सुरक्षित और सहमति-आधारित पहुंच प्रदान कर उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जैसे-जैसे आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन को अपनाने की संख्या और बढ़ेगी, आभा इलाज की निरंतरता सुनिश्चित होगी और कागजी रिकॉर्ड पर निर्भरता कम होगी साथ ही एक अधिक सुगम, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणाली बनाने में मदद मिलेगी।
आभा: राज्यों की भागीदारी
इस उपलब्धि को हासिल करने में देश भर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मजबूत भागीदारी का बड़ा योगदान रहा है। उत्तर प्रदेश 15.3 करोड़ से अधिक आभा खातों के साथ देश में सबसे आगे है, इसके बाद राजस्थान और महाराष्ट्र प्रत्येक 7.1 करोड़ खातों के साथ दूसरे स्थान पर हैं, बिहार 6.3 करोड़ के साथ तीसरे और पश्चिम बंगाल 5.9 करोड़ आभा खातों के साथ चौथे स्थान पर है। मध्य प्रदेश, गुजरात, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और कर्नाटक ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जो डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को राष्ट्रव्यापी स्तर पर अपनाए जाने को दिखाता है। कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी आबादी के अनुपात में आभा खातों का उच्च स्तर भी हासिल कर लिया है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लद्दाख, लक्षद्वीप और दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव ने शत प्रतिशत खाते खोल लिए हैं। बड़े राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में, आंध्र प्रदेश ने 98.5% आभा खातों की संख्या दर्ज की है, इसके बाद ओडिशा (91.9%), चंडीगढ़ (90.8%), राजस्थान (89.7%), हिमाचल प्रदेश (88.9%) और छत्तीसगढ़ (86.6%) का स्थान है। जम्मू और कश्मीर, त्रिपुरा और तेलंगाना ने भी 75 प्रतिशत से अधिक आभा खाते खोले हैं।
आभा: आधी भागीदारी महिलाओं की
बनाए गए कुल आभा खातों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग आधी है, जो कुल आभा खाताधारकों का 49.75% है। यह ग्रामीण क्षेत्रों सहित महिलाओं को उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक सुरक्षित डिजिटल पहुंच प्रदान कर उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ‘आभा’ स्वास्थ्य प्रणाली के तहत पहली बार में ही इलाज कराने में सहायता कर सकता है, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल, टीकाकरण और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं भी इसमें शामिल हैं। मालूम हो कि देशभर में एक मजबूत और आपस में जुड़े रहने वाले डिजिटल स्वास्थ्य तंत्र को स्थापित करने के लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन को लागू किया जा रहा है। आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA), हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स रजिस्ट्री (HPR), हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री (HFR), हेल्थ इन्फॉर्मेशन एक्सचेंज और कंसेंट मैनेजर (HIE-CM), यूनिफाइड हेल्थ इंटरफ़ेस (UHI) और नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज (NHCX) जैसी मुख्य डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सुरक्षित, मरीज की सहमति पर आधारित और आपस में साझा की जा सकने वाली स्वास्थ्य जानकारी के आदान-प्रदान को संभव बनाया जाता है।
