नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। भारत में कैंसर जैसे भयावह रो प्राण बचाने के लिए एक वैक्सीन लॉन्च हुई है हालांकि इसकी कीमत इतनी अधिक है कि आम मरीज इसका लाभ नहीं उठा सकता। कीमत है 3.7 लाख रुपए। इस इंजेक्शन में एटिज़ोलिज़ुमैब नामक दवा का उपयोग किया जाता है, जो पीडी-एल1 नामक प्रोटीन को अवरुद्ध करके काम करती है। कैंसर कोशिकाएं प्रतिरक्षा प्रणाली से छिपने के लिए इस प्रोटीन का उपयोग करती हैं। एक बार जब यह प्रोटीन अवरुद्ध हो जाता है, तो शरीर की प्रतिरक्षा कोशिकाएं कैंसर कोशिकाओं को अधिक प्रभावी ढंग से पहचान कर उन पर हमला कर सकती हैं।
कैंसर: आराम मिलने की आशा
रोश फार्मा इंडिया द्वारा विकसित इस दवा का नाम टेसेंट्रिक (Tecentric) है और इसे इम्यूनोथेरेपी को तेज़ और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। अस्पताल में कई घंटों तक चलने वाले पारंपरिक इंट्रावेनस (IV) उपचार के विपरीत यह नया इंजेक्शन त्वचा के नीचे दिया जाता है और इसमें केवल लगभग सात मिनट लगते हैं। यह उपचार नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर (NSCLC) से पीड़ित रोगियों के लिए है, जो भारत में फेफड़ों के कैंसर का सबसे आम प्रकार है। डॉक्टरों का मानना है कि इस नई विधि से मरीजों को आराम मिलेगा और अस्पतालों पर बोझ कम होगा। हालांकि, इस उपचार की अत्यधिक कीमत को लेकर चिंताएं भी जताई जा रही हैं। इसकी एक खुराक की कीमत लगभग 3.7 लाख रुपये है और इलाज के दौरान लगभग छह खुराक तक की आवश्यकता होती है। रिपोर्ट के अनुसार इस इंजेक्शन के लॉन्च से कैंसर के इलाज में इम्यूनोथेरेपी के बढ़ते महत्व का पता चलता है। कीमोथेरेपी के विपरीत, जो सीधे कैंसर कोशिकाओं पर हमला करती है और स्वस्थ कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचा सकती है, इम्यूनोथेरेपी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर से लड़ने में मदद करती है। कई मरीज इम्यूनोथेरेपी को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि इसके अक्सर कीमोथेरेपी की तुलना में कम गंभीर दुष्प्रभाव होते हैं।
कैंसर: टीकों की खासियत
मालूम हो कि कैंसर के टीके दो मुख्य प्रकार के होते हैं: बचाव और उपचार। बचाव टीके (जैसे HPV वैक्सीन) कैंसर पैदा करने वाले वायरस को रोकते हैं, जबकि उपचार टीके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर पहले से मौजूद कैंसर कोशिकाओं से लड़ते हैं। ये मूलत: तीन तरह के होते हैं। कैंसर से बचाव करने वाले टीके उन वायरस और संक्रमणों को रोकते हैं जो भविष्य में कैंसर का कारण बन सकते हैं। HPV वैक्सीन ह्यूमन पेपिलोमा वायरस (Human Papillomavirus) से बचाता है जो सर्वाइकल और अन्य प्रकार के कैंसर का प्रमुख कारण है। हेपेटाइटिस बी वैक्सीन हेपेटाइटिस बी वायरस से बचाता है, जिससे लिवर कैंसर होने का खतरा रहता है। कैंसर के उपचार वाले टीके पारंपरिक कैंसर उपचारों (जैसे कीमोथेरेपी) के विपरीत मरीज की अपनी ही प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रशिक्षित करते हैं ताकि वह कैंसर कोशिकाओं को पहचान सके और उन पर हमला कर सके। कैंसर कोशिकाएं शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को चकमा देती हैं। ये टीके प्रतिरक्षा कोशिकाओं को सक्रिय और री-प्रोग्राम करते हैं ताकि वे ट्यूमर को खोजकर नष्ट कर सकें। हाल के वर्षों में mRNA तकनीक कोविड-१९ के टीकों की सफलता के बाद विकसित हुई है। कई वैज्ञानिक संस्थान (जैसे रूस की FMBA) और Memorial Sloan Kettering Cancer Center इसे लेकर शोध और क्लिनिकल परीक्षण कर रहे हैं।
