नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। ब्रेस्ट कैंसर (Breast cancer) के इलाज की दिशा में एक नयी खोज सामने आयी है। यह सॅल रहा तो इसके प्रभावी इलाज का रास्ता मिल जाएगा। यह जीनोमिक टेस्टिंग की मदद से संभव होगा। इससे जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर हो सकेगी।
ब्रेस्ट कैंसर: बस एक जीनोमिक टेस्ट
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के नेतृत्व में हुए एक अंतरराष्ट्रीय ट्रायल ‘OPTIMA’ में यह पाया गया कि सिर्फ एक जीनोमिक टेस्ट के जरिए यह तय किया जा सकता है कि मरीज को कीमोथेरेपी की जरूरत है या नहीं। इस टेस्ट को ‘प्रोजिग्ना’ नाम दिया गया है, जो ट्यूमर में मौजूद 50 जीन की गतिविधियों का विश्लेषण करता है और कैंसर के लौटने के खतरे का अनुमान लगाता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह टेस्ट ट्यूमर की बायोलॉजी को समझकर मरीज के लिए पर्सनलाइज इलाज तय करने में मदद करता है। अगर टेस्ट में रिस्क “लो” आता है, तो डॉक्टर मरीज को कीमोथेरेपी के बजाय केवल हार्मोन थेरेपी देने का निर्णय ले सकते हैं। इससे मरीजों को अनावश्यक टॉक्सिसिटी और कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट्स से बचाया जा सकता है।
ब्रेस्ट कैंसर: ट्रायल के नतीजे सकारात्मक
इस शोध में 40 वर्ष या उससे अधिक उम्र की 4,429 महिलाओं को शामिल किया गया था। ये ट्रायल नॉर्वे, स्वीडन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और थाईलैंड जैसे देशों में किया गया। इसमें पाया गया कि कीमोथेरेपी और हार्मोन थेरेपी लेने वाले लगभग 95 फीसद मरीज स्वस्थ रहे। केवल हार्मोन थेरेपी लेने वाले 94 फीसद मरीज भी कैंसर मुक्त पाए गए। इस तकनीक से अब डॉक्टर हर मरीज का इलाज उसके शरीर और ट्यूमर की स्थिति के अनुसार तय कर सकेंगे। इससे न सिर्फ इलाज अधिक सटीक होगा बल्कि मरीजों को अनावश्यक दर्द और साइड इफेक्ट्स से भी राहत मिलेगी। प्रोफेसर रॉब स्टीन के अनुसार यह शोध कैंसर उपचार को एक नई दिशा देता है, जहां इलाज लक्षणों के बजाय ट्यूमर की बायोलॉजी पर आधारित होगा। यह आने वाले समय में कैंसर ट्रीटमेंट को पूरी तरह बदल सकता है।
