पटना (स्वस्थ भारत मीडिया)। पटना के आईजीआईसी, आईजीआईएमएस, एनएमसीएच, पीएमसीएच और एम्स से जुड़े एक सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2026 से लगभग आठ महीने में 11,209 लोगों के इलाज के दौरान मृत्यु हो गई और उनमें से लगभग 40 प्रतिशत रोगियों को हार्ट अटैक से जोड़ा गया है। आईजीआईसी की रिपोर्ट के मुताबिक 15 से 18 साल की उम्र में 247 साल की उम्र में हार्ट ब्लॉकेज मिला। पांच निजी और कुछ निजी संपत्तियों को मिलाकर यह संख्या करीब 672 बताई गई है।
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कम उम्र में दिल की बीमारी के कई कारण होते हैं। डॉ. विकास कुमार का कहना है कि ऊचा आंख को मेडिकल अलर्ट के तौर पर लेने का समय आ गया है। मोटापा, उच्च रक्त वाहिकाओं, शारीरिक गतिविधि की कमी, असंतुलित खान-पान, धूम्रपान या धूम्रपान और कुछ मामलों में मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल और पारिवारिक कारण भी इस रोग के महत्वपूर्ण कारण हो सकते हैं। लेकिन हर युवा को सीने में दर्द होने का मतलब हार्ट अटैक नहीं होता है और हर हार्ट ब्लॉकेज का कारण सिर्फ लाइफस्टाइल नहीं होता है। कुछ जन्मजात हृदय रोग और अन्य चिकित्सीय उपकरण भी कम उम्र में हृदय की समस्या पैदा कर सकते हैं। इसलिए बच्चों और किशोरों में अगर बार-बार सीने में दर्द, सांस फूलना, बेहोशी, दृष्टि बहुत तेज़ या सामान्य होना, लक्ष्य करना समय असामान्य महसूस हो तो इसे अंतिम रूप नहीं देना चाहिए।
दैनिक जीवन सुधारें
हार्ट की बीमारी से बचाव की शुरुआत अस्पताल से नहीं, बल्कि हार्ट की बीमारी से होती है। बच्चों को नियमित खेल-कूद की आदत डालें, भारी जंक फूड और मीठे पेय से बचायें, वजन पर नजर रखें और सिगरेट से पूरी तरह दूर रखें। यदि अचानक तेज चुभन में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, ठंडक, बेचैनी या दर्द, हाथ/जकड़न तक महसूस हो, तो इसे मानें और तुरंत अस्पताल पहुंचें। दिल की बीमारी सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं है, लेकिन दिल की बीमारी की भी जरूरत नहीं है। सही जानकारी, समय पर जांच और स्वस्थ्यशास्त्र सबसे बड़ा बचाव है।
