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देसी नस्ल की गायों के ड्राफ्ट जीनोम का हुआ खुलासा

नयी दिल्ली। IISER, भोपाल के शोधकर्ताओं ने भारतीय गाय की चार देसी नस्लों – कासरगोड बौना, कासरगोड कपिला, वेचुर और ओंगोल के आनुवंशिक गठन का सफलतापूर्वक खुलासा किया है। इनका कहना है कि इस अध्ययन की सहायता से गायों के प्रजनन और प्रबंधन में सुधार के लिए जीनोम संरचना का उपयोग किया जा सकता है, जिससे भारतीय मवेशी उद्योग में उत्पादकता और स्थिरता में वृद्धि हो सकती है। इस अध्ययन की एक और उल्लेखनीय उपलब्धि दुनिया की सबसे छोटी गाय की नस्ल वेचूर का ड्राफ्ट जीनोम असेंबली है।

देसी नस्लों में अभूतपूर्व क्षमताएं

देसी भारतीय गायों में विशेष क्षमताएं होती हैं, जो उन्हें कठिन परिस्थितियों से अनुकूलन स्थापित करने में मदद करती हैं, इनमें खराब गुणवत्ता वाले भोजन को पचाने की क्षमता और बीमारियों के प्रति प्रतिरोधी गुण शामिल हैं। भारतीय गाय की देसी नस्लों के जीनोम को अनुक्रमित करने से उनके और अन्य नस्लों के बीच आनुवंशिक अंतर को समझने में मदद मिल सकती है, जो भविष्य के अध्ययनों और आनुवंशिक सुधार के लिए एक मूल्यवान संसाधन साबित हो सकता है।

चार नस्लों पर रहा फोकस

पिछले अध्ययनों ने भारतीय गायों के कई लक्षणों को रेखांकित किया है और पता लगाने का प्रयास किया है कि देसी गायें गर्म मौसम में अपने आकार और दूध की गुणवत्ता को कैसे बनाये रखती हैं। इस अध्ययन में शामिल भारतीय गाय की नस्लों का पूरा जीनोम पहले ज्ञात नहीं था, इसलिए यह समझना मुश्किल था कि उनमें कौन-सी आनुवंशिक विशिष्टताएं होती हैं। शोधकर्ताओं ने भारतीय देसी गाय नस्लों-कासरगोड बौना, कासरगोड कपिला, वेचुर और ओंगोल के जीनोम को पढ़ने और समझने के लिए उच्च-थ्रूपुट अनुक्रमण तकनीकों का उपयोग किया है। ऐसा करने का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि ये गायें भारतीय जलवायु परिस्थितियों के साथ कैसे अनुकूलन स्थापित करती हैं। इस अध्ययन के लिए नमूने कासरगोड ड्वार्फ कंजर्वेशन सोसाइटी की मदद से केरल स्थित कपिला गौशाला से संग्रह किये गए हैं।

शोधकर्ता ने क्या कहा

IISER, भोपाल के जैविक विज्ञान विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ विनीत के. शर्मा कहते हैं-हमने भारतीय गाय की देसी नस्लों में जीन के एक विशिष्ट सेट की पहचान की है, जिनमें पश्चिमी मवेशी प्रजातियों के जीन्स की तुलना में अनुक्रमिक और संरचनात्मक भिन्नता देखी गई है। यह जानकारी इस बात की बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकती है कि भारतीय नस्ल की गाय उष्णकटिबंधीय परिस्थितियों के साथ अनुकूलन कैसे स्थापित करती है। डॉ. विनीत शर्मा ने कहा है कि जीनोम अनुक्रमणय इन देसी नस्लों की आनुवंशिक विविधता को संरक्षित करने में मदद कर सकता है, जो गायों की स्वस्थ और लचीली आबादी को बनाये रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

इंडिया साइंस वायर से साभार

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