नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। देश में दवाओं और इलाज से जुड़ी गड़बड़ियों या साइड इफेक्ट की समय पर पहचान के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने भारत के बायोविजिलेंस प्रोग्राम को मंजूरी मिलने की जानकारी दी। इसके तहत अंग और ऊतक प्रत्यारोपण के दौरान इस्तेमाल होने वाली दवाओं और जैविक उत्पादों से होने वाले प्रतिकूल प्रभावों की निगरानी की जाएगी। इस कार्यक्रम की अगुवाई इंडियन फार्माकोपिया कमीशन (IPC) करेगा। इसमें अंगदान करने वाले व्यक्ति और अंग प्राप्त करने वाले मरीज, दोनों में इस्तेमाल होने वाले संबंधित उत्पादों से होने वाली समस्याओं की रिपोर्टिंग, जांच और निगरानी की जाएगी। उन्होंने भारत के रोगी सुरक्षा मानदंड के विस्तार के तहत, भारत के जैव न्यायाधीश कार्यक्रम को मंजूरी दिए जाने की भी घोषणा की।
प्रत्यारोपण पर भी नजर
इसके तहत आईपीसी अंग और ऊतक प्रत्यारोपण में इस्तेमाल होने वाली दवाओं और जैविक उत्पादों से जुड़े प्रतिकूल प्रभाव की सूचना, मूल्यांकन, निगरानी और रोकथाम मजबूत बनाने में अग्रणी भूमिका निभाएगा, जिसमें पोर और प्राप्त शिशुओं को दिए जाने वाले अंग और ऊतक भी शामिल हैं। फार्मा कोविजिलेंस, मैटेरियो विजिलेंस और बायो विजिलेंस संबंधी पहल मिलकर दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और प्रत्यारोपण उद्देश्यों में सुरक्षा निगरानी मजबूत बनाएगी। उन्होंने नेशनल फॉर्मुलरी ऑफ इंडिया के 7वें संस्करण को भी जारी किया। यह डॉक्टरों और दूसरे स्वास्थ्यकर्मियों के लिए दवाओं के सही और सुरक्षित इस्तेमाल की गाइड है। NFI 2026 में 653 दवाएं शामिल हैं। इनमें 42 फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन और 30 इम्यूनोलॉजिकल दवाएं हैं। दवाओं की जानकारी को जरूरी दवाओं की राष्ट्रीय सूची और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के मुताबिक अपडेट किया गया है। मंत्री ने बताया कि दवाओं की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी साझा करने में भारत की वैश्विक भागीदारी बढ़ी है। उनके मुताबिक, 2009-14 के दौरान भारत 123वें स्थान पर था, जो अब WHO के मरीजों की सुरक्षा से जुड़े डेटाबेस में योगदान के मामले में 8वें स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि देश भर में लगभग 1,150 औषधि प्रतिकूल प्रभाव निगरानी केंद्र संचालित हैं; इसका विस्तार प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा केन्द्र तक किया जाएगा। दवा सुरक्षा सबका दायित्व है और हर प्रतिकूल प्रभाव की सूचना एक जीवन बचा सकती है।
