नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज (LHMC) और इससे संबद्ध अस्पतालों—श्रीमती सुचेता कृपलानी अस्पताल (SSKH) तथा कलावती सरन चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल (KSCH) की प्रगति की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे, विशेषीकृत नैदानिक सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और मरीजों की देखभाल को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया। बैठक के दौरान मंत्री को कलावती सरन चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के चल रहे विस्तार कार्य से अवगत कराया गया। इस परियोजना के तहत अस्पताल की कुल बिस्तर क्षमता 394 से बढ़ाकर 894 करने, आईसीयू की क्षमता 40 से बढ़ाकर 200 बिस्तर करने तथा ऑपरेशन थिएटरों की संख्या 4 से बढ़ाकर 12 करने की योजना है। केएससीएच परिसर में निर्माण कार्य जारी है।
पेशेवरों की भर्ती हो
बैठक को संबोधित करते हुए श्री नड्डा ने जोर दिया कि एलएचएमसी और इससे संबद्ध अस्पतालों में चल रही तथा आगामी परियोजनाओं की योजना मरीज-केन्द्रित और भविष्य उन्मुख दृष्टिकोण के साथ बनाई जानी चाहिए, जिसमें बदलती चिकित्सा आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि योजना और डिजाइन तैयार करते समय संबंधित क्षेत्रों के अग्रणी संस्थानों की विशेषज्ञता और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का लाभ उठाया जाना चाहिए। साथ ही, निर्माण की उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने और परियोजनाओं की समय सीमा की कड़ाई से निगरानी करने पर भी जोर दिया। उन्होंने मंजूरी और स्वीकृति से संबंधित ऐसे मुद्दों, जिनमें मंत्रालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता हो, को समय पर मंत्रालय के समक्ष उठाने का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ-साथ नर्सों, डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों की भर्ती भी समानांतर रूप से आगे बढ़नी चाहिए।
मास्टर प्लान बनाया जाए
भविष्य की दिशा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने दीर्घकालिक संस्थागत दृष्टिकोण के साथ एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार करने का आह्वान किया। इसमें तत्काल प्राथमिकताओं को चरणबद्ध विकास और आने वाले दशकों के लिए दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ समाहित किया जाना चाहिए। उन्होंने बड़े पैमाने की परियोजनाओं की योजना बनाने और उन्हें लागू करने में, जहां उपयुक्त हो, निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और साझेदारियों की संभावनाओं का पता लगाने के लिए भी प्रोत्साहित किया। साथ ही, उन्होंने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि ऐसी सभी पहलों में गुणवत्ता, दक्षता और मरीजों की देखभाल को केन्द्र में रखा जाए। स्वास्थ्य मंत्री ने लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में अत्याधुनिक स्किल लैब का दौरा किया। यह एक व्यापक बहु-विषयक सिमुलेशन-आधारित प्रशिक्षण सुविधा है, जो सुरक्षित और नियंत्रित वातावरण में व्यावहारिक एवं दक्षता-आधारित प्रशिक्षण प्रदान करती है। इस सुविधा में आईसीयू, सर्जिकल कौशल, सिमुलेटेड ओटी, प्रसूति ओटी, एनआईसीयू, ट्रॉमा, ईएनटी और नेत्र विज्ञान के लिए समर्पित सिमुलेशन क्षेत्र हैं।
KSCH का भ्रमण भी
मंत्री ने कलावती सरन चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में हाल ही में कार्यशील हुए ऑगमेंटेड लेवल III-बी नवजात देखभाल केन्द्र का भी दौरा किया और नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए उपलब्ध उन्नत सुविधाओं की समीक्षा की। नियोनेटोलॉजी विभाग में 80 गहन चिकित्सा बिस्तर हैं और यहां प्रतिवर्ष 10,000 से अधिक प्रसव तथा 2,500 NICU में भर्ती होने वाले नवजात शिशुओं की देखभाल की जाती है। यहां समग्र जीवित रहने की दर 93 प्रतिशत से अधिक है। नवजात देखभाल सुविधा में हाई-फ्रीक्वेंसी ऑसिलेटरी वेंटिलेशन (HFOV), इनहेल्ड नाइट्रिक ऑक्साइड थेरेपी, चिकित्सीय हाइपोथर्मिया, उन्नत निगरानी तथा व्यापक श्वसन सहायता सहित उन्नत सेवाएं उपलब्ध हैं। हाल ही चालू हुए NICU-B में 7 एनआईसीयू बिस्तर, 8 एचडीयू बिस्तर, 15 कंगारू मदर केयर (KMC) शय्याएं तथा माताओं के लिए 12 कॉट हैं। यहां परिवार-एकीकृत देखभाल, कंगारू मदर केयर और स्तनपान सहायता पर विशेष जोर दिया जाता है।
