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बिहार में फ्री होगी पेरिटोनियल डायलिसिस

बिहार में फ्री होगी पेरिटोनियल डायलिसिस

नयी दिल्ली स्वस्थ भारत मीडिया। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि 1 जनवरी, 2027 से पटना के IGIMS में किडनी फेल मरीजों को सरकारी खर्च पर पेरिटोनियल डायलिसिस की सुविधा मिलेगी। इस इलाज को आयुष्मान भारत कार्ड योजना से भी जोड़ा जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा मरीज इसका लाभ उठा सकें। वे यहां पेरिटोनियल डायलिसिस सोसाइटी ऑफ इंडिया के दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन कर रहे थे। उन्होंने इस दौरान कहा कि मरीजों को अनावश्यक रूप से रेफर करने की व्यवस्था खत्म होनी चाहिए। विशेषज्ञ की जरूरत होने पर ही मरीज को रेफर किया जाए। मुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार के 17 मेडिकल कॉलेजों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार काम कर रही है। पेरिटोनियल डायलिसिस रक्त को साफ करने की ऐसी प्रक्रिया है जिसमें मशीन के बजाए पेट की भीतरी परत का उपयोग फिल्टर की तरह किया जाता है।

कैसे काम करती है यह प्रक्रिया

• कैथेटर डालना: इलाज शुरू होने से पहले पेट में एक छोटी और पतली नली (कैथेटर) का ऑपरेशन करके डाली जाती है जो हमेशा वहीं रहती है।
• फ्लूइड भरना: इस नली के ज़रिए पेट के अंदर एक विशेष सफाई द्रव (डायलिसिस घोल) डाला जाता है।
• सफाई की प्रक्रिया: पेट की परत (पेरिटोनियम) में मौजूद छोटी-छोटी रक्त नलिकाओं से गंदगी और अतिरिक्त तरल पदार्थ छनकर इस द्रव में आ जाते हैं।
• बदलाव (एक्सचेंज): कुछ घंटों बाद इस गंदे पानी को बाहर निकाल दिया जाता है और नया द्रव भर दिया जाता है।
पेरिटोनियल डायलिसिस के प्रकार
• निरंतर एम्बुलेटरी पेरिटोनियल डायलिसिस (CAPD): इसमें दिन में 3 से 4 बार द्रव को बदला जाता है, जिसे मरीज खुद घर पर कर सकता है और अपना सामान्य काम जारी रख सकता है।
• ऑटोमैटिक पेरिटोनियल डायलिसिस (APD): इसमें सोने के समय एक मशीन (साइक्लर) स्वतः ही रात भर में द्रव को अंदर डालने और निकालने का काम करती है।
यह कैसे काम करता है?
• कैथेटर डालना: इलाज शुरू होने से पहले पेट में एक छोटी और पतली नली (कैथेटर) का ऑपरेशन करके डाली जाती है जो हमेशा वहीं रहती है।
• फ्लूइड भरना: इस नली के ज़रिए पेट के अंदर एक विशेष सफाई द्रव (डायलिसिस घोल) डाला जाता है।
• सफाई की प्रक्रिया: पेट की परत (पेरिटोनियम) में मौजूद छोटी-छोटी रक्त नलिकाओं से गंदगी और अतिरिक्त तरल पदार्थ छनकर इस द्रव में आ जाते हैं।
• बदलाव (एक्सचेंज): कुछ घंटों बाद इस गंदे पानी को बाहर निकाल दिया जाता है और नया द्रव भर दिया जाता है।
पेरिटोनियल डायलिसिस के प्रकार
• निरंतर एम्बुलेटरी पेरिटोनियल डायलिसिस (CAPD): इसमें दिन में 3 से 4 बार द्रव को बदला जाता है, जिसे मरीज खुद घर पर कर सकता है और अपना सामान्य काम जारी रख सकता है।
• ऑटोमैटिक पेरिटोनियल डायलिसिस (APD): इसमें सोने के समय एक मशीन (साइक्लर) स्वतः ही रात भर में द्रव को अंदर डालने और निकालने का काम करती है।
मुख्य लाभ
• इसे मरीज अपने घर पर आसानी से कर सकता है जिससे बार-बार अस्पताल जाने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
• इसमें शरीर से खून बाहर नहीं निकाला जाता, जिससे दिल के मरीजों और बुजुर्गों के लिए यह अधिक सुरक्षित माना जाता है।

18 से 40 हजार तक खर्च

भारत में पेरिटोनियल डायलिसिस (पेरिटोनियल डायलिसिस या CAPD) का खर्च औसतन 18 हजार से 40 हजार प्रति माह आता है। स्वचालित पेरिटोनियल डायलिसिस (APD) मशीन आधारित प्रक्रिया में खर्च बढ़कर 30 हजार से 60 हजार प्रति माह तक हो सकता है। पेट में कैथेटर स्थापित करने की सर्जिकल प्रक्रिया का एक बार का खर्च अस्पताल के अनुसार अलग हो सकता है।

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