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हेल्थ सेक्टर में AI अब देगा इलाज का सही सुझाव

हेल्थ सेक्टर में AI अब देगा इलाज का सही सुझाव

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। हेल्थ सेक्टर में AI की भूमिका रोज—रोज बढ़ती जा रही है। वैश्विक महामारियों और जलवायु परिवर्तन जनित स्वास्थ्य संकट ने इसे पनपने का भरपूर मौका दिया है। अब AI नवाचार में अग्रणी देशों की पंक्ति में खड़ा है। वह अपने स्वास्थ्य स्टार्टअप्स के ज़रिए न केवल घरेलू चुनौतियों का समाधान कर रहा है, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य तंत्र को भी मजबूत बनाने में योगदान दे रहा है। इस बीच टेक्नोलॉजी दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट ने AI के ऐसे सिस्टम का खुलासा किया है जो जटिल केसों में इंसानी डॉक्टरों से भी बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।

AI: सफलता दर 80 फीसद

इस कंपनी का दावा है कि यह नया सिस्टम चिकित्सा क्षेत्र में “मेडिकल सुपरइंटेलिजेंस” की दिशा में एक बड़ा कदम है। रिपोर्ट के मुताबिक इसे माइक्रोसॉफ्ट AI यूनिट ने तैयार किया है, जिसकी अगुवाई ब्रिटिश टेक विशेषज्ञ मुस्तफा सुलेमान कर रहे हैं। यह सिस्टम उन स्थितियों में काम करता है जहां रोग की पहचान करना बेहद कठिन होता है। यह सिस्टम एक अनुभवी डॉक्टरों की टीम की तरह काम करता है और केस-बाय-केस जांच करता है। कंपनी के अनुसार जब इस सिस्टम को OpenAI के एडवांस o3 मॉडल के साथ जोड़ा गया, तो इसने न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन की 80 फीसद से ज्यादा केस स्टडीज का सही निदान किया। वहीं दूसरी ओर जब यही केस प्रैक्टिसिंग डॉक्टरों को दिए गए, जो नवाचार से दूर थे तो उनका सफलता प्रतिशत महज 20 फीसद रहा।

AI: आसानी होगी डॉक्टरों को

कंपनी का दावा है कि यह AI सिस्टम इंसानी डॉक्टरों की तुलना में टेस्ट ऑर्डर करने में भी ज्यादा कुशल और किफायती है, जिससे इलाज की लागत घट सकती है। हालांकि, कंपनी ने यह साफ किया है कि यह तकनीक डॉक्टरों की जगह नहीं लेगी, बल्कि उनके काम को आसान बनाएगी। कंपनी ने कहा कि डॉक्टरों की भूमिका केवल निदान तक सीमित नहीं है। उन्हें मरीजों और उनके परिवारों के साथ विश्वास भी बनाना होता है, जो AI नहीं कर सकता। माइक्रोसॉफ्ट इस सिस्टम को डायग्नॉस्टिक ऑर्केस्ट्रेटर कहता है, जो एक एजेंट की तरह काम करता है और विभिन्न AI मॉडल्स के साथ मिलकर यह तय करता है कि कौन से टेस्ट करवाने हैं और क्या संभावित निदान हो सकता है। यह सिस्टम कई मेडिकल विशेषज्ञताओं को एक साथ कवर करता है, जो किसी एक इंसानी डॉक्टर के लिए संभव नहीं। एक्सपर्ट मुस्तफा सुलेमान का कहना है कि अगले 5 से 10 वर्षों में यह सिस्टम लगभग बिना गलती के काम करने लगेगा। उन्होंने कहा कि यह दुनिया भर के हेल्थकेयर सिस्टम पर से एक बड़ा बोझ कम कर सकता है। हालांकि, कंपनी ने यह भी माना कि यह तकनीक अभी सीधे मरीजों के इलाज में इस्तेमाल करने के लिए तैयार नहीं है। इसके ऑर्केस्ट्रेटर की अभी और टेस्टिंग की जाएगी, खासकर सामान्य लक्षणों की पहचान के लिए।

AI: भारतीय कंपनी भी अग्रणी

याद रहे कि हेल्थ सेक्टर में AI को लेकर भारतीय स्टार्टअप GeneAI डिजिटल हेल्थकेयर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड उभरा है। यह एक भारतीय स्वास्थ्य-तकनीक कंपनी है जो कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों की प्रारंभिक पहचान और विश्लेषण के लिए AI तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। आने वाले SPIEF-2025 में भारत की भागीदारी के दौरान यह स्टार्टअप वैश्विक मंच पर अपनी विशेषज्ञता साझा करने को तैयार है। GeneAI उन चुनिंदा भारतीय कंपनियों में शामिल है, जो मल्टीमॉडल मेडिकल इमेजिंग (जैसे MRI और CT स्कैन) के साथ AI का समन्वय कर रही है। इससे बीमारियों की पहले चरण में ही पहचान संभव हो पाती है। कंपनी का दावा है कि इसके द्वारा विकसित मॉडल पारंपरिक तरीकों की तुलना में तेज़, सटीक और अधिक सुलभ है।

देखें-https://www.swasthbharat.in/indian-startup-geneai-in-the-health-sector-is-now-on-the-global-stage/

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