स्वस्थ भारत मीडिया
नीचे की कहानी / BOTTOM STORY

Aiims पटना-सांस के रोगी को सर्दी में खतरा:  डॉ. दीपेंद्र

पटना (स्वस्थ भारत मीडिया)। सर्दियों में बढ़ने वाली सांस की बीमारी काफी परेशान करती है। किसी को अगर पहले से ही इसकी शिकायत रहती है तो इस मौसम में उनकी दिक्कतें और बढ़ जाती है। ऐसे में Aiims, पटना के प्रो. दीपेंद्र राय की सलाह मामना फायदेमंद है। इस मौसम में होने वाली बीमारियों के बारे में एम्स लगातार जागरूकता संदेश जारी कर रहा है। प्रो. राय लंग्स विभाग के अध्यक्ष हैं।

Aiims: इम्युनिटी में कमी

डा. दीपेंद्र राय

उन्होंने कहा है कि सर्दी के मौसम में खांसी और सांस की बीमारियाँ काफी बढ़ जाती हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि ठंडे मौसम में श्वसन वायरस की उम्र बढ़ जाती है और वातावरण में उनका बोलबाला हो जाता है जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है। दूसरा कारण यह है कि सर्दियों में हमारी इम्युनिटी कम हो जाती है। धूप की कमी और कोहरे के कारण शरीर में विटामिन D का स्तर गिर जाता है जो इम्युनिटी बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण कारक है। प्रदूषण का स्तर बढ़ने से कोहरा और धुंआ मिलकर स्मॉग बनाते हैं। यह दमा, COPD, किडनी संबंधी बीमारी, ह्रदय रोग या मधुमेह के मरीजों के लिए अत्यंत घातक है।

 

AIIMS: सावधानियां और बचाव

डॉ. राय का सुझाव है कि सुबह के समय जब स्मॉगg का स्तर अधिक हो तो बाहर निकलने से बिल्कुल बचें। व्यायाम घर के अंदर ही करें और धूप निकलने पर ही बाहर जाएं। पीने और नहाने के लिए हमेशा गुनगुने पानी का प्रयोग करें। घर के अंदर लकड़ी, कोयला या अगरबत्ती जलाना बंद करें क्योंकि इसका धुआं फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है। डाइट में गर्म सूप, हल्दी दूध, अदरक, सेब और पपीता शामिल करें, लेकिन इन्हें फ्रिज से निकालकर तुरंत न खाएं। यदि सर्दी-खांसी 5-6 दिनों में ठीक न हो या आपको सांस फूलना, सुस्ती, चक्कर आना या कफ में खून आने जैसे लक्षण दिखें तो यह निमोनिया हो सकता है। ऐसे में बिना देरी किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। 50 साल से अधिक उम्र के व्यक्तियों और मधुमेह या Heart Problems वाले मरीजों को सुरक्षा के लिए फ्लू का टीका जरूर लगवाना चाहिए।

मालूम हो कि डॉ. दीपेंद्र कुमार राय के पास एमबीबीएस, एमडी और डीएनबी की डिग्रियां हैं और उन्होंने इंडियन चेस्ट सोसाइटी, नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजिशियंस, एपीएसआर, आईएमएसए और आईसीएएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से उन्नत प्रशिक्षण और फेलोशिप प्राप्त की हैं, साथ ही वे यूरोपियन रेस्पिरेटरी सोसाइटी से भी जुड़े हुए हैं। उन्हें एनआईटीआरडी दिल्ली और वीसीएसजीएमएस एंड आरआई, गढ़वाल जैसे संस्थानों से नैदानिक ​​अनुभव प्राप्त है और उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्रों में इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (आईएलडी), टीबी के बाद फेफड़ों की समस्याएं और सीओपीडी शामिल हैं। उन्होंने कोविड-19 से संबंधित फेफड़ों की जटिलताओं पर महत्वपूर्ण शोध अध्ययनों का नेतृत्व भी किया है।

Related posts

पत्रकारों की होगी कोविड-19 की जांच, डीजेए ने किया स्वागत

Ashutosh Kumar Singh

विश्वास कीजिए! इसी इंटरनेशनल घर में रखी जाती है जनऔषधि

Ashutosh Kumar Singh

कोरोना से भयभीत न हों भयावहता को समझें

Ashutosh Kumar Singh

Leave a Comment