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भारत की पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच प्रकृति से जुड़ाव और एक स्थायी भविष्य की दिशा

भारत की पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच प्रकृति से जुड़ाव और एक स्थायी भविष्य की दिशा

विश्व पर्यावरण दिवस 2025 (5 जून) पर खास

धीप्रज्ञ द्विवेदी

नयी दिल्ली। हर साल 5 जून को दुनिया भर में विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day-WED) मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा पर्यावरणीय जागरूकता और कार्रवाई को प्रोत्साहित करने के लिए नामित यह दिन, केवल एक कैलेंडर तिथि भर नहीं है। यह मानव जाति को पृथ्वी के साथ अपने संबंधों पर चिंतन करने, पर्यावरणीय गिरावट के कारणों को समझने और उसे उलटने के लिए सक्रिय कदम उठाने हेतु एक महत्वपूर्ण अनुस्मारक के रूप में कार्य करता है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए, जहाँ तीव्र आर्थिक विकास और बढ़ती जनसंख्या पर्यावरणीय दबावों को बढ़ा रही है, यह दिन विशेष महत्व रखता है। 2025 में, जैसा कि हम इस महत्वपूर्ण अवसर को मनाने की तैयारी कर रहे हैं, हमें इसके समृद्ध इतिहास, इसके गहरे महत्व और इस बार के प्रस्तावित विषय पर ध्यान देना चाहिए जो हमें एक अधिक टिकाऊ भविष्य की ओर मार्गदर्शन करेगा। इसके साथ ही, हमें पिछले वर्ष के थीम और संयुक्त राष्ट्र तथा भारत सरकार द्वारा इन थीमों के माध्यम से किए गए सतत प्रयासों को भी समझना होगा।

विश्व पर्यावरण दिवस का इतिहास

विश्व पर्यावरण दिवस की जड़ें 1972 में स्टॉकहोम में आयोजित मानव पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (United Nations Conference on the Human Environment) में निहित हैं। यह ऐतिहासिक सम्मेलन, जिसमें 113 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे, पर्यावरण को एक वैश्विक मुद्दे के रूप में मान्यता देने वाला पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय जमावड़ा था, जिस पर देशों के बीच सहयोग की आवश्यकता थी। इस सम्मेलन के दौरान ही 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में नामित करने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इस दिन को चुनने का कारण यह था कि 5 जून को ही सम्मेलन शुरू हुआ था।
पहला विश्व पर्यावरण दिवस 1974 में “केवल एक पृथ्वी” (Only One Earth) के नारे के साथ मनाया गया था, जो इस बात पर जोर देता था कि हमारे पास रहने के लिए केवल एक ही ग्रह है और इसकी देखभाल करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। तब से, यह दिन हर साल एक नए विषय और मेजबान देश के साथ मनाया जाता रहा है, जो दुनिया के विभिन्न हिस्सों में विशिष्ट पर्यावरणीय चुनौतियों पर प्रकाश डालता है और समाधानों को बढ़ावा देता है। पिछले कुछ वर्षों में, विश्व पर्यावरण दिवस ने ओजोन परत के क्षरण, जैव विविधता के नुकसान, जलवायु परिवर्तन, प्लास्टिक प्रदूषण और सतत उपभोग जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण पर्यावरणीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया है। यह दुनिया भर की सरकारों, गैर-सरकारी संगठनों, व्यवसायों और व्यक्तियों को पर्यावरण संरक्षण के लिए एक साथ आने हेतु एक मंच प्रदान करता है।

पर्यावरण दिवस का महत्व और आवश्यकता

विश्व पर्यावरण दिवस का आयोजन केवल एक रस्म नहीं, अपितु एक अनिवार्य आवश्यकता है। इसके कई महत्वपूर्ण कारण हैं:
* जागरूकता बढ़ाना: यह दिन पर्यावरणीय मुद्दों के बारे में सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत में, जहाँ वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, भूमि क्षरण और जैव विविधता का नुकसान गंभीर चुनौतियाँ हैं, यह दिवस इन समस्याओं को सुर्खियों में लाता है और लोगों को उनके दैनिक जीवन पर उनके प्रभावों के बारे में शिक्षित करता है।
* कार्रवाई को प्रेरित करना: केवल जागरूकता ही पर्याप्त नहीं है; सार्थक कार्रवाई आवश्यक है। विश्व पर्यावरण दिवस व्यक्तियों, समुदायों, सरकारों और व्यवसायों को सकारात्मक पर्यावरणीय परिवर्तन के लिए कदम उठाने हेतु प्रेरित करता है। भारत में, यह वृक्षारोपण अभियान, नदी सफाई अभियान, प्लास्टिक मुक्त पहल और टिकाऊ नीतियों को अपनाने को बढ़ावा देता है।
* सामूहिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देना: पर्यावरणीय समस्याएँ सीमाओं को नहीं पहचानती हैं। विश्व पर्यावरण दिवस इस बात पर जोर देता है कि पृथ्वी की सुरक्षा हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। यह भारत को वैश्विक पर्यावरणीय प्रयासों में अपनी भूमिका निभाने और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करता है।
* सकारात्मक बदलाव का जश्न मनाना: यह दिन न केवल चुनौतियों पर प्रकाश डालता है, बल्कि उन सफलताओं का भी जश्न मनाता है जो पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों से हासिल हुई हैं। भारत में, यह स्वच्छ भारत अभियान, नमामि गंगे और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में हुई प्रगति को उजागर करने का अवसर प्रदान करता है।
* नीति निर्माण को प्रभावित करना: विश्व पर्यावरण दिवस के माध्यम से होने वाली वैश्विक चर्चाएँ और अभियान अक्सर सरकारों पर दबाव डालते हैं कि वे अधिक मजबूत पर्यावरणीय नीतियां और कानून बनाएँ और लागू करें। भारत में, यह पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, वन संरक्षण अधिनियम और वायु व जल प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम जैसे कानूनों को मजबूत करने में मदद करता है।

भारत की समस्याएँ और समाधान में इसकी भूमिका

भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, परंतु इस विकास की अपनी पर्यावरणीय लागत भी है। भारत कई गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं से जूझ रहा है:
* वायु प्रदूषण: दिल्ली और अन्य बड़े शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर अक्सर खतरनाक स्तर तक पहुँच जाता है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गंभीर परिणाम होते हैं। वाहनों के उत्सर्जन, औद्योगिक प्रदूषण और पराली जलाना इसके प्रमुख कारण हैं।
* जल प्रदूषण और जल संकट: नदियाँ और जल स्रोत औद्योगिक कचरे, सीवेज और कृषि अपवाह से प्रदूषित हैं। इसके साथ ही, भूजल स्तर में गिरावट और बढ़ती जनसंख्या के कारण पीने के पानी की कमी एक विकराल समस्या बनती जा रही है।
* भूमि क्षरण और वनों की कटाई: कृषि के विस्तार, शहरीकरण और बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के कारण बड़े पैमाने पर वनों की कटाई हो रही है, जिससे मिट्टी का क्षरण और जैव विविधता का नुकसान हो रहा है।
* प्लास्टिक प्रदूषण: एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक का व्यापक उपयोग भारत में एक बड़ी समस्या है, जो जलमार्गों, भूमि और समुद्री जीवन को प्रदूषित कर रहा है।
* जैव विविधता का नुकसान: बढ़ते मानव अतिक्रमण और प्रदूषण के कारण कई स्थानिक प्रजातियाँ खतरे में हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस इन समस्याओं को उजागर करने और उनके समाधान के लिए राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर कार्रवाई को प्रेरित करने का एक शक्तिशाली मंच है। यह लोगों को अपने व्यवहार में बदलाव लाने, सरकारों पर अधिक प्रभावी नीतियों को लागू करने के लिए दबाव डालने और हरित प्रौद्योगिकियों व स्थायी प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है।

पर्यावरण संरक्षण के लिए उठाए गए प्रमुख कदम

भारत सरकार ने पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करने के लिए विभिन्न दूरगामी और महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
* स्वच्छ भारत मिशन (शहरी और ग्रामीण): स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन पर केंद्रित यह मिशन, विशेष रूप से प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने और जल स्रोतों को स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
* नमामि गंगे कार्यक्रम: गंगा नदी को साफ और पुनर्जीवित करने के लिए एक व्यापक कार्यक्रम, जिसमें सीवेज उपचार, औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण और जैव विविधता संरक्षण शामिल है।
* राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP): 2019 में शुरू किया गया, इसका लक्ष्य वायु प्रदूषण को कम करने के लिए शहर-विशिष्ट कार्य योजनाएँ विकसित करना और लागू करना है।
* हरित भारत मिशन (Green India Mission): जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) के तहत, यह वनावरण बढ़ाने और वन पारिस्थितिकी प्रणालियों में सुधार पर केंद्रित है।
* उजाला योजना और सौर ऊर्जा को बढ़ावा: ऊर्जा दक्षता और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर एलईडी बल्बों का वितरण और सौर ऊर्जा परियोजनाओं में भारी निवेश किया गया है, जिससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम हुई है।
* ई-वाहनों को बढ़ावा: इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन और अपनाने को प्रोत्साहन दिया जा रहा है ताकि वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सके।
* एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक पर प्रतिबंध: चरणबद्ध तरीके से एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है, जिससे प्लास्टिक कचरे को कम करने में मदद मिल रही है।
* मिशन LiFE (Lifestyle for Environment): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया यह वैश्विक आंदोलन, पर्यावरण के प्रति जागरूक जीवन शैली अपनाने पर केंद्रित है, जिससे व्यक्तियों को “प्रो-प्लैनेट पीपल” बनने के लिए प्रेरित किया जा सके।
* मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना: किसानों को अपनी मिट्टी के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी प्रदान करती है, जिससे रासायनिक उर्वरकों के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा मिलता है और मिट्टी का क्षरण कम होता है।
* जैव विविधता संरक्षण प्रयास: राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव अभयारण्यों और बायोस्फीयर रिजर्व का विस्तार, साथ ही बाघ संरक्षण और अन्य वन्यजीव संरक्षण परियोजनाएं।
इन सरकारी पहलों को विश्व पर्यावरण दिवस जैसे वैश्विक मंचों से और अधिक बल मिलता है, जो जनभागीदारी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देते हैं।

विश्व पर्यावरण दिवस 2024: भूमि बहाली पर केंद्रित

पिछले वर्ष, यानी 2024 में, विश्व पर्यावरण दिवस का थीम “भूमि बहाली, मरुस्थलीकरण और सूखे के प्रति लचीलापन” (Land Restoration, Desertification and Drought Resilience) था, जिसका नारा था “हमारी भूमि। हमारा भविष्य। हम हैं #GenerationRestoration”। इस विषय का उद्देश्य भूमि क्षरण को रोकना, स्वस्थ पारिस्थितिकी प्रणालियों को बहाल करना और सूखे के प्रभावों को कम करने के लिए तत्काल कार्रवाई को बढ़ावा देना था। 2024 के वैश्विक समारोहों की मेजबानी सऊदी अरब साम्राज्य ने की थी।
यह विषय संयुक्त राष्ट्र दशक पारिस्थितिकी तंत्र बहाली (2021-2030) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था, जिसका लक्ष्य दुनिया भर के पारिस्थितिकी तंत्रों की सुरक्षा और पुनरुत्थान के लिए एक वैश्विक आंदोलन को बढ़ावा देना है। भारत के लिए यह थीम विशेष रूप से महत्वपूर्ण थी, क्योंकि देश के बड़े हिस्से मरुस्थलीकरण और सूखे की चपेट में हैं। भारत सरकार ने भी विभिन्न योजनाओं जैसे कि मनरेगा के तहत जल संचयन संरचनाओं का निर्माण और ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ जैसी पहलों के माध्यम से भूमि बहाली के प्रयासों को गति दी है।

संयुक्त राष्ट्र ने थीमों पर अब तक क्या-क्या किया है?

संयुक्त राष्ट्र, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के नेतृत्व में, विश्व पर्यावरण दिवस की थीमों के माध्यम से पर्यावरणीय कार्रवाई को प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रत्येक वर्ष की थीम केवल एक नारा नहीं होती, बल्कि यह वैश्विक अभियानों, जागरूकता पहलों और नीतिगत वार्ताओं के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करती है:
* वैश्विक जागरूकता अभियान: यूएनईपी हर थीम के लिए व्यापक वैश्विक संचार अभियान चलाता है, जिसमें सोशल मीडिया, मीडिया आउटलेट और शैक्षिक सामग्री का उपयोग किया जाता है ताकि दुनिया भर के लाखों लोगों तक संदेश पहुंचाया जा सके। इन अभियानों से लोगों को पर्यावरणीय मुद्दों की गंभीरता के बारे में जागरूक किया जाता है।
* नीतिगत संवादों को बढ़ावा: प्रत्येक थीम संबंधित पर्यावरणीय चुनौती पर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय नीति निर्माताओं के बीच संवाद को बढ़ावा देती है। उदाहरण के लिए, “प्लास्टिक प्रदूषण को हराएं” (2018 और 2023) जैसी थीमों ने प्लास्टिक प्रदूषण पर एक महत्वाकांबी वैश्विक संधि विकसित करने के लिए चल रही वार्ताओं को गति दी है।
* भागीदारी और कार्रवाई को बढ़ावा: यूएनईपी सरकारों, निजी क्षेत्र, नागरिक समाज संगठनों और व्यक्तियों को थीम से संबंधित गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करता है, जैसे वृक्षारोपण अभियान, सफाई अभियान, टिकाऊ व्यवसायों का समर्थन करना और पर्यावरण के अनुकूल प्रथाओं को अपनाना।
* साक्ष्य-आधारित जानकारी प्रदान करना: यूएनईपी संबंधित थीम पर नवीनतम वैज्ञानिक अनुसंधान और डेटा प्रदान करता है, जिससे नीति निर्माताओं और जनता को समस्याओं की गहराई को समझने और प्रभावी समाधान विकसित करने में मदद मिलती है।
* अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों और वार्ताओं को प्रभावित करना: विश्व पर्यावरण दिवस की थीम अक्सर आगामी महत्वपूर्ण संयुक्त राष्ट्र सम्मेलनों और समझौतों के एजेंडे को प्रभावित करती है। उदाहरण के लिए, 2024 की थीम “भूमि बहाली” ने मरुस्थलीकरण का मुकाबला करने के लिए संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (UNCCD) के COP16 जैसे सम्मेलनों से पहले जागरूकता बढ़ाई।
* स्थायी विकास लक्ष्यों (SDGs) के साथ तालमेल: विश्व पर्यावरण दिवस की प्रत्येक थीम संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों, विशेष रूप से SDG 15 (भूमि पर जीवन), SDG 13 (जलवायु कार्रवाई) और SDG 14 (पानी के नीचे जीवन) के साथ गहराई से जुड़ी होती है।
विश्व पर्यावरण दिवस 2025 का थीम ‘प्लास्टिक प्रदूषण का अंत’ (Ending Plastic Pollution) है।
यह थीम प्लास्टिक प्रदूषण के बढ़ते खतरे पर ध्यान केंद्रित करती है, जो पारिस्थितिक तंत्र, मानव स्वास्थ्य और जलवायु को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के अनुसार, यह थीम प्लास्टिक कचरे के विनाशकारी प्रभाव को उजागर करने और स्थायी समाधानों की दिशा में सामूहिक प्रयासों को एकजुट करने का लक्ष्य रखती है।

भारत में विश्व पर्यावरण दिवस 2025 का उत्सव

भारत में विश्व पर्यावरण दिवस 2025 को ‘प्लास्टिक प्रदूषण का अंत’ थीम के साथ व्यापक रूप से मनाया जाएगा। पूरे देश में, समुदाय, स्थानीय निकाय, गैर-सरकारी संगठन (NGO) और नागरिक पर्यावरण संरक्षण के लिए एक साथ आएंगे। कुछ प्रमुख आयोजनों में शामिल हो सकते हैं:
* जन जागरूकता अभियान: प्लास्टिक प्रदूषण के खतरों और इसके समाधानों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए रैलियां, कार्यशालाएं और सेमिनार आयोजित किए जाएंगे।
* वृक्षारोपण अभियान: अधिक से अधिक पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जो पर्यावरण को हरा-भरा बनाने और वायु प्रदूषण को कम करने में मदद करेगा।
* सफाई अभियान: नदियों, समुद्र तटों, झीलों और सार्वजनिक पार्कों में सफाई अभियान चलाए जाएंगे।
* पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग को बढ़ावा: लोगों को कचरे को रीसाइकिल करने और प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
* पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों का उपयोग: एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक (जैसे कैरी बैग, स्ट्रॉ, चम्मच और कप) के बजाय पर्यावरण-अनुकूल और पुन: प्रयोज्य सामग्री के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
* शैक्षिक कार्यक्रम: स्कूलों और कॉलेजों में पोस्टर-मेकिंग, निबंध लेखन और वाद-विवाद प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, ताकि छात्रों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूक किया जा सके।
* रेलवे की पहल: भारतीय रेलवे जैसे संगठन पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभाएंगे। उदाहरण के लिए, आगरा मंडल में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
कुल मिलाकर, भारत में विश्व पर्यावरण दिवस 2025 का उद्देश्य प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने और एक स्वस्थ, स्वच्छ और हरी-भरी पृथ्वी को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक कार्रवाई को प्रेरित करना है।
भारत के संदर्भ में, यह थीम अत्यधिक महत्वपूर्ण है। यह हमें याद दिलाता है कि गंगा और यमुना जैसी नदियों का प्रदूषण, हिमालयी क्षेत्र में हो रहा पारिस्थितिकी असंतुलन, तटीय क्षेत्रों पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव, और शहरी क्षेत्रों में बढ़ती गर्मी की लहरें – ये सभी प्रकृति की ओर से चेतावनी हैं। इस थीम के तहत, 2025 का विश्व पर्यावरण दिवस हमें निम्नलिखित पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करेगा:
* पारिस्थितिकी तंत्र बहाली: भारत में क्षतिग्रस्त पारिस्थितिकी तंत्रों, जैसे वनों, आर्द्रभूमियों और तटीय क्षेत्रों की बहाली के प्रयासों को तेज करना।
* सतत जीवन शैली: भारतीयों को ‘मिशन लाइफ’ के तहत प्रकृति के अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना, जैसे ऊर्जा बचाना, अपशिष्ट कम करना और स्थानीय उत्पादों का उपयोग करना।
* जैव विविधता का संरक्षण: भारत की समृद्ध जैव विविधता, विशेष रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों और उनके आवासों की रक्षा के लिए प्रयास तेज करना।
* जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और शमन: नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाना, प्रदूषण कम करना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अधिक लचीलेपन का निर्माण करना।
* प्रकृति-आधारित समाधानों को अपनाना: शहरी बाढ़ को कम करने के लिए हरित बुनियादी ढाँचे का विकास करना या वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए शहरी वन विकसित करना जैसे प्रकृति-आधारित समाधानों को बढ़ावा देना।
विश्व पर्यावरण दिवस 2025 एक अवसर होगा जब हम एक बार फिर अपनी जिम्मेदारी की पुष्टि करेंगे कि हम इस ग्रह के संरक्षक हैं। प्रकृति के साथ सद्भाव में रहना ही एक समृद्ध और टिकाऊ भविष्य की एकमात्र कुंजी है। यह व्यक्तियों, समुदायों और राष्ट्रों के लिए एक साथ आने और एक ऐसी दुनिया बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को नवीनीकृत करने का आह्वान है जहां मनुष्य और प्रकृति एक साथ पनप सकें। हमें यह समझना होगा कि हमारी पृथ्वी का स्वास्थ्य ही हमारा स्वास्थ्य है, और इसका भविष्य वास्तव में हमारा भविष्य है।

(लेखक पर्यावरण में स्नातकोत्तर हैं, पर्यावरण विषयों के जानकार हैं और प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए पर्यावरण पढ़ाते हैं। साथ ही साथ पर्यावरण और स्वास्थ्य को लेकर कई सारे आलेख विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। स्वस्थ भारत न्यास के संस्थापक ट्रस्टी हैं। शोध पत्रिका सभ्यता संवाद के कार्यकारी संपादक हैं।)

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