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थैलेसीमिया से निपटने के लिए जागरूकता अभियान की जरूरत

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। विश्व थैलेसीमिया दिवस के अवसर पर, केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने थैलेसीमिया की चुनौतिया पर आयोजित वेबिनार को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने इस रोग के प्रति समाज में जागरुकता फैलाने पर बल दिया।

आत्मनिर्भर भारत के लिए संकल्प लें

यह वेबिनार विभिन्न मंत्रालयों और थैलेसीमिया संघ के साथ जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। सम्मेलन में भारत और दुनिया के विभिन्न हिस्सों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। केंद्रीय मंत्री हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं तो यह प्रधानमंत्री की परिकल्पना है कि हम नए संकल्प करें जो आत्मनिर्भर भारत की ओर प्रेरित करेगा। इस दिशा में हमें थैलेसीमिया की समस्या से निपटने के लिए भी नए संकल्प लेने चाहिए। श्री मुंडा ने कहा कि एक राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है, जो थैलेसीमिया की समस्या को समाप्त करने के लिए आवश्यक है।

रोग पर सरल भाषा में साहित्य हो

केंद्रीय मंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि स्थानीय स्तर के कार्यकर्ताओं का इस रोग के बारे में मार्गदर्शन करने और जागरूकता पैदा करने में उनकी मदद करने के लिए सरल और स्थानीय भाषा में सामान्य साहित्य होना चाहिए। मंत्री ने आग्रह किया कि जागरूकता और परामर्श के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ती दवाओं की उपलब्धता और सामुदायिक रक्तदान के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। जनजातीय कार्य मंत्रालय के सचिव अनिल कुमार झा ने कहा कि जागरूकता, प्रभावी भागीदारी और पूरे सरकारी दृष्टिकोण के माध्यम से भारत इस बीमारी पर नियंत्रण कर सकता है।

भारत में लाखों थैलसीमिया रोगी

इस कार्यक्रम ने थैलेसीमिया को समझने के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। इसके बाद इसके बारे में शिक्षा और जागरूकता प्रदान की गई जिसमें प्रमुख अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और थैलेसीमिया इंडिया और थैलेसीमिया तथा स्किल सेल सोसायटी (TSCS) जैसे अन्य भागीदारों द्वारा मुंबई हेमेटोलॉजी ग्रुप के सहयोग से स्क्रीनिंग और प्रबंधन भी शामिल है। भारत में थैलेसीमिया और सिकल सेल रक्तअल्पता एक बहुत बड़ा बोझ है, जिसमें β थैलेसीमिया सिंड्रोम वाले अनुमानित 100,000 रोगी और सिकल सेल रोग, लक्षण वाले लगभग 150,0000 रोगी हैं लेकिन उनमें से कुछ को ही बेहतर ढंग से प्रबंधित किया जाता है और एलोजेनिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट (BMT) का बोझ अधिकांश परिवारों के लिए वहन करने योग्य नहीं है।

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