नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। WHO की नई रिपोर्ट कहती है कि अगर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो 2050 तक कैंसर (Cancer) के मामले दोगुने हो जाएंगे और हर साल कैंसर के नए मामलों की संख्या लगभग 3.5 करोड़ तक पहुंच सकती है। हर दिन 26 हजार से अधिक लोगों की मौत कैंसर के कारण हो रही है तो हर साल लगभग 2.06 करोड़ नए कैंसर के मामले सामने भी आते हैं और करीब एक करोड़ लोगों की इस बीमारी से जान चली जाती है। मालूम हो कि कैंसर आज दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक बन गया है। हृदय रोगों के बाद कैंसर दुनिया में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण है।
इलाज में भी बड़ा अंतर
रिपोर्ट बताती है कि कैंसर के इलाज और जांच की सुविधाओं में देशों के बीच बड़ी असमानता है। उच्च आय वाले देशों में स्तन कैंसर से पीड़ित 87 प्रतिशत महिलाएं बीमारी का पता चलने के पांच साल बाद तक जीवित रहती हैं। वहीं कम आय वाले देशों में यह आंकड़ा केवल 42 प्रतिशत है। कई गरीब देशों में लोगों को समय पर जांच, इलाज और जरूरी दवाएं नहीं मिल पाती हैं। यही कारण है कि वहां कैंसर से होने वाली मौतों की संख्या अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के एक-तिहाई से भी कम देशों ने कैंसर के इलाज को अपनी सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा योजना में शामिल किया है। रिपोर्ट के अनुसार साल 2024 में एशिया में दुनिया के सबसे अधिक कैंसर के मामले और मौतें दर्ज की गईं। इसका मुख्य कारण यहां की बड़ी आबादी है। यूरोप की आबादी दुनिया की कुल आबादी का केवल लगभग नौ प्रतिशत है, लेकिन वहां कैंसर के मामलों और मौतों का हिस्सा काफी अधिक है। वहीं अफ्रीका और एशिया के कई कम आय वाले देशों में कैंसर के मामले अपेक्षाकृत कम हैं, लेकिन इलाज की कमी के कारण मृत्यु दर ज्यादा है।
किन कारणों से बढ़ रहा है कैंसर
रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में लगभग 40 प्रतिशत कैंसर ऐसे कारणों से जुड़े हैं जिन्हें रोका जा सकता है। तंबाकू और शराब का सेवन, मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी, असंतुलित खानपान और वायु प्रदूषण इसके प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा एचपीवी, हेपेटाइटिस बी और सी तथा हेलिकोबैक्टर पाइलोरी जैसे संक्रमण भी कई प्रकार के कैंसर का कारण बनते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर और समय पर टीकाकरण करवाकर कैंसर के कई मामलों को रोका जा सकता है। डब्ल्यूएचओ ने सभी 194 सदस्य देशों के लिए स्तन कैंसर से पांच साल तक जीवित रहने के अनुमान जारी किए हैं। ये आंकड़े उन महिलाओं पर आधारित हैं जिनमें वर्ष 2017 से 2021 के बीच स्तन कैंसर का पता चला था। यह अध्ययन प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका नेचर मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है। इन आंकड़ों से यह समझने में मदद मिलेगी कि अलग-अलग देशों में स्तन कैंसर की पहचान, इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति कैसी है।
जीवित रहने की दर 77.8%
इस रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाओं की पांच वर्ष तक जीवित रहने की औसत दर 77.8 प्रतिशत रही। हालांकि विभिन्न क्षेत्रों और देशों के बीच इसमें बड़ा अंतर देखा गया। अमेरिका क्षेत्र में यह दर सबसे अधिक 88.5 प्रतिशत रही, जबकि यूरोप क्षेत्र में यह 84 प्रतिशत। अफ्रीकी क्षेत्र में यह दर केवल 39.1 प्रतिशत रही। इससे साफ है कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं वाले देशों में मरीजों के बचने की संभावना अधिक है।
