नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। डायबिटीज के मरीजों के लिए राहत वाली खबर आई है। खानपान और रहन—सहन में असंतुलन के कारण यह रोग तेजी से फैल रहा है। 2023 में प्रकाशित भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद-भारत मधुमेह (ICMR INDIAB) के अध्ययन के अनुसार देश में मधुमेह रोगियों की संख्या 10.1 करोड़ है। मधुमेह की एक ब्रांडेड दवा के पेटेंट समाप्त हो जाने के कारण जेनरिक बाजार में इसके 147 ब्रांड आ चुके हैं। यही नहीं, कीमतों में भी कमी आयी है।
डायबिटीज : शरीर को कई नुकसान
मालूम हो कि यह एक पुरानी बीमारी है जो अपर्याप्त इंसुलिन उत्पादन या शरीर द्वारा इंसुलिन का प्रभावी ढंग से उपयोग करने में असमर्थता के कारण होती है। इंसुलिन रक्त में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक है और उचित इंसुलिन फ़ंक्शन के बिना रक्त शर्करा अनियंत्रित रूप से बढ़ सकता है जिसे हाइपरग्लाइसेमिया के रूप में जाना जाता है। अनियंत्रित मधुमेह विशेष रूप से समय के साथ, शरीर की विभिन्न प्रणालियों, विशेष रूप से नसों और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। रोगियों की संख्या भी निरंतर बढ़ रही है। रिपोर्ट बताती है कि हाल के महीनों में दवा मार्केट भारतीय ब्रांडेड जेनेरिक कंपनियों की दवाओं से पट गया है।
डायबिटीज : 37 कंपनियां मैदान में
उद्योग ट्रैकर और बाजार शोधकर्ता फार्माट्रैक के आंकड़ों के अनुसार अब बाजार में 37 भारतीय कंपनियों के लगभग 147 ब्रांड हैं। मार्च में 19 कंपनियां और सिर्फ 86 ब्रांड थे। एक्सपर्ट भी मधुमेह के मरीजों की संख्या बढ़ने के बीच एंटी-डायबिटिक दवाओं के पेटेंट समाप्त होने को रोगियों और चिकित्सकों के लिए अच्छा बता रहे हैं क्योंकि इससे भारत में मधुमेह की दवाएं अधिक किफायती हो गई हैं। कुछ वर्ष पहले एपाग्लिलोज़िन एक एसजीएलटी-2 अवरोधक दवा के पेटेंट समाप्त होने के बाद लगभग 200 जेनेरिक ब्रांड बाजार में आ गए थे। उद्योग ट्रैकर और बाजार शोधकर्ता फार्माट्रैक के आंकड़ों के अनुसार अब बाजार में 37 भारतीय कंपनियों के लगभग 147 ब्रांड हैं। मार्च में 19 कंपनियां और सिर्फ 86 ब्रांड थे। एक्सपर्ट भी मधुमेह के मरीजों की संख्या बढ़ने के बीच एंटी-डायबिटिक दवाओं के पेटेंट समाप्त होने को रोगियों और चिकित्सकों के लिए अच्छा बता रहे हैं क्योंकि इससे भारत में मधुमेह की दवाएं अधिक किफायती हो गई हैं। कुछ वर्ष पहले एपाग्लिलोज़िन एक एसजीएलटी-2 अवरोधक दवा के पेटेंट समाप्त होने के बाद लगभग 200 जेनेरिक ब्रांड बाजार में आ गए थे।
डायबिटीज : बिक्री में भी इजाफा
टाइप 2 मधुमेह वाले लोगों में ग्लूकोज नियंत्रण में सुधार के लिए उपयोग होने वाली जार्डिएंस ब्रांड नाम से बिकने वाली बोह्रिंजर इंगेलहेम की इनोवेटर दवा एपाग्लिलोजनि का पेटेंट मार्च के मध्य में समाप्त हो गया था। फार्माट्रैक के अनुसार लगभग 150 ब्रांड और 40 कंपनियों ने एपाग्लिलोज़िन पेटेंट के अवसर में छलांग लगाई है और पिछले दो महीनों में बिक्री में भारी वृद्धि हुई है। भारतीय दवा बाजार में हर दवा कंपनियां इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाने के लिए तत्पर हैं। पिछले डेढ़ महीने में बाजार में जेनेरिक दवाइयां और किफायती हुई हैं और इनकी उपलब्धता भी बढ़ गई है। इससे न केवल यह गरीबों के पहुंच के दायरे में आ गई हैं बल्कि सुगम चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दवा की सदैव उपलब्धता भी बहुत महत्त्वपूर्ण है।
