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पोषण के लिए मोटे अनाज को थाली का हिस्सा बनाने पर जोर

  • स्वस्थ भारत स्वास्थ्य अमृत मंथन शिविर-पार्ट-4
  • पोषित बच्चों और स्वस्थ माँ से ही स्वस्थ भारत का निर्माण: डॉ. अनन्या अवस्थी
  • स्वस्थ भारत (न्यास) के 7वें स्थापना दिवस पर स्वस्थ भारत के निर्माण में पोषण के महत्व पर परिसंवाद

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। ‘सरकार की ओर से माँ और बच्चों के पोषण पर कई योजनाएं लायी गयी है। मिड डे मील और सखी, आंगनवाडी सहित तमाम ऐसी व्यवस्थाएं की गई हैं जो गरीब और कुपोषित परिवार और बच्चों को पोषण व संतुलित आहार के बारे में पूरी जानकारी देने के लिए ही हैं। अमेरिका में हुए एक रिसर्च में यह पाया गया है कि रागी, ज्वार, बाजरा आदि मोटे अनाज में गेहूं से अधिक पोषण होता है। 1980 के दशक तक यह मोटा अनाज हमारे यहां गरीबों का भोजन होता था, फिर उन्होंने भी इसे खाना छोड़ दिया। आजकल इन्हीं मोटे अनाजों को अंग्रेजी में सुपर फूड कहा जा रहा है।’

आहार की सोच बदलनी होगी

उक्त बातें हावर्ड विश्वविद्यालय से पढ़ी पब्लिक हेल्थ एंड न्यूट्रिशन एक्सपर्ट डॉ. अनन्या अवस्थी ने स्वस्थ भारत (न्यास) द्वारा आयोजित स्वास्थ्य अमृत मंथन शिविर में स्वस्थ भारत के निर्माण में पोषण का महत्व विषय पर बोलते हुए कही। डॉ अवस्थी ने घर में काम करने वाली एक सहायिका का उदाहरण देते हुए कहा कि वो अपने बच्चे को चिप्स के पैकेट खिलाने को तैयार है लेकिन फल और पोषण वाला अनाज उसे महंगा लगता है। यह सच भी है आंकड़ों के नजरिए से लेकिन 5 रुपये के 4 पैक चिप्स और 20 रुपये के केले देने में क्या बेहतर है, यह उन्होंने उसे समझाया। पोषण पैकेट वाले फूड में नहीं है इसलिए सोशल मीडिया की यहां मदद काफी अहम है जिससे माँ और उनके बच्चों को पोषित भोजन और संतुलित थाली के बारे में समझाया जा सकता है। भारत में निचला तबका, जिसके पास भोजन के लिए पैसे कम है, उनकी सोच को भी बाजार के बड़े ब्रांड का प्रचार प्रभावित करता है। जबकि उनके लिए सरकार ने सखी और आंगनवाड़ी वाटिका का भी इंतजाम किया है, जहां से फल और सब्जी इनको और बच्चों को दिया जाए जिससे उनका शरीर का पोषण हो। बस ये वर्ग इन योजनाओं से परिचित नहीं है। भोजन की जरूरत घर से पूरी होती है। इसमें माँ के साथ पिता की जिम्मेदारी भी बनती है ताकि बच्चा कुपोषित न हो।

पोषित बच्चों, स्वस्थ मां से ही स्वस्थ भारत का निर्माण

उन्होंने आगे कहा कि भारत की युवा पीढ़ी अगर भोजन के कारण बीमार होगी तो स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण अधूरा रहेगा। सखी और आँगनबाड़ी केंद्रों में गरीब परिवार की माँ और बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य के लिए बहुत सी योजना इंतजार कर रही है। यहां बच्चों का अन्नप्राषन संस्कार भी कराया जाता है। 2 से 6 साल तक के बच्चों को उचित पोषण मिलना आवश्यक है। इसपर सरकार बहुत काम कर रही है। स्वस्थ भारत का निर्माण पोषित बच्चों और स्वस्थ माँ से ही होगा।

पोषण नही तो कई बीमारियां

अपने अध्यक्षीय संबोधन में मेवाड़ इंस्टीट्यूट की निदेशक डॉ. अल्का अग्रवाल ने डॉ. अनन्या अवस्थी के बताए सुझाओं को अमल में लाने पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान समय में हम पोषणयुक्त भोजन पर कम ध्यान दे रहे हैं। यहीं कारण है कि तमाम तरह की बीमारियां बिन बुलाए मेहमान की तरह हमारे शरीर को जकड़ रही हैं। इस सत्र का संचालन वरिष्ठ पत्रकार महिमा सिंह ने किया।

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