स्वस्थ भारत मीडिया
समाचार / News

अश्वगंधा के भविष्य की रूपरेखा तैयार की विशेषज्ञों ने

अश्वगंधा के भविष्य की रूपरेखा तैयार की विशेषज्ञों ने

दिल्ली में विश्व स्वास्थ्य संगठन वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन शुरू

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। आयुर्वेद की सबसे महत्वपूर्ण रसायन जड़ी बूटियों में से एक अश्वगंधा (Withania somnifera) ने दूसरे विश्व स्वास्थ्य संगठन वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन में आयोजित एक उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में मुख्य आकर्षण का केंद्र बना, जिसने साक्ष्य-आधारित वैश्विक संवाद के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा को आगे बढ़ाने में भारत के नेतृत्व की पुष्टि की। आयुष मंत्रालय के सहयोग से दिल्ली में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र (WHO-GTMC) द्वारा “अश्वगंधा: पारंपरिक ज्ञान से वैश्विक प्रभाव तक – अग्रणी वैश्विक विशेषज्ञों का दृष्टिकोण” शीर्षक से एक सत्र का आयोजन किया गया। सम्मेलन में स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और आयुष मंत्री प्रताप राव जाधव भी मौजूद रहे।

अश्वगंधा: गुणों पर हुई लंबी चर्चा

अश्वगंधा अपनी अनुकूलनीय, स्नायु सुरक्षा एवं प्रतिरक्षा गुणों के कारण अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निरंतर मान्यता प्राप्त कर रहा है। इस पर हुई चर्चा ने पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों एवं समकालीन वैज्ञानिक सत्यापन के बीच के पुल को मजबूती प्रदान की। विशेषज्ञों ने इसके समर्थन के लिए कठोर पूर्व-नैदानिक ​​एवं नैदानिक ​​अनुसंधान, सुरक्षा मूल्यांकन, औषधि सतर्कता एवं मानकीकरण के महत्व पर बल दिया। इस सत्र का संचालन विश्व अश्वगंधा परिषद के सचिव डॉ. जे.बी. गुप्ता ने किया जिसमें अग्रणी अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने मुख्य प्रस्तुतियां दी। अमेरिकन हर्बल फार्माकोपिया के डॉ. रॉय अप्टन ने पहचान, गुणवत्ता परीक्षण एवं चिकित्सीय अनुप्रयोगों के लिए वैश्विक मानकों पर प्रकाश डाला। सुश्री मारी ल्यरा, खाद्य एवं पशु आहार विभाग की प्रमुख, मेडफाइल्स लिमिटेड, फिनलैंड ने यूरोप के नियामक परिवेश और अश्वगंधा की बढ़ती स्वीकार्यता पर अपने विचारों को साझा किया। डॉ. इखलास खान, निदेशक, राष्ट्रीय प्राकृतिक उत्पाद अनुसंधान केंद्र, मिसिसिपी विश्वविद्यालय ने नियामक निर्णय लेने हेतु कार्यप्रणाली की सटीकता एवं ठोस साक्ष्यों की आवश्यकता पर बल दिया। WHO-GTMC की डॉ. गीता कृष्णन ने अश्वगंधा को वैश्विक स्तर पर अपनाने में वादे एवं सतर्कता के बीच संतुलन पर प्रकाश डाला।

अश्वगंधा: अनुसंधान पर विमर्श

एक पैनल चर्चा में विशेषज्ञों के बीच मानकों में सामंजस्य स्थापित करने, प्रभावकारिता की पुनरावृत्ति सुनिश्चित करने एवं साक्ष्य-आधारित अश्वगंधा सूत्रीकरण को आगे बढ़ाने के लिए सहयोगात्मक अनुसंधान को बढ़ावा देने पर खुलकर विचार-विमर्श हुआ। सत्र का समापन पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करते हुए अश्वगंधा को पारंपरिक स्वास्थ्य देखभाल संरचना में स्थापित करने के लिए निरंतर अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर आम सहमति के साथ हुआ। विचार-विमर्श में विश्व स्वास्थ्य संगठन वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन के व्यापक उद्देश्यों के अनुरूप, सुरक्षित, वैज्ञानिक एवं चिरस्थायी उपायों से पारंपरिक चिकित्सा को समकालीन स्वास्थ्य प्रणालियों में एकीकृत करने की बढ़ती वैश्विक प्रतिबद्धता परिलक्षित हुई।

Related posts

अफ्रीका में हुई बड़े आकार वाली मकड़ियों की उत्पत्ति

admin

स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज पर एक दिवसीय सेमिनार 21 जून को

आयेगी ऐसी वैक्सीन जो कोरोना के हर वेरिएंट को देगी मात

admin

Leave a Comment