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सरकार का लक्ष्य चिकित्सा शिक्षा को सस्ता और सुलभ बनाना

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य चिकित्सा शिक्षा को सस्ता और सुलभ बनाना है ताकि किसी भी पात्र व्यक्ति को उसकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति के कारण किसी हानि का सामना न करना पड़े।

चिकित्सा शिक्षा सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता

वे चेन्नई के स्टेनली मेडिकल कॉलेज में मुख्य अतिथि के रूप में एक अकादमिक बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा इस सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में से एक रही है, जिसका अनुमान आंकड़ों से लगाया जा सकता है। मात्र 145 सरकारी मेडिकल कॉलेजों से यह संख्या बढ़कर 260 हो गई है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय क्षेत्र की योजना के अंतर्गत 22 AIIMS को स्वीकृति दी गई है, जबकि 19 AIIMS में स्नातक पाठ्यक्रम शुरू हो गए हैं।

MBBS सीटों की संख्या बढ़ी

मंत्री ने कहा कि MBBS (यूजी) सीटों की संख्या 2014 में 51,348 से बढ़कर अब 91,927 सीटें हो गई है जो 79 प्रतिशत की वृद्धि है। पीजी सीटों की संख्या 2014 की 31,185 सीटों से 93 प्रतिशत बढ़कर अब 60,202 सीटें हो गई है। डॉ. सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और प्रवासी भारतीय कोटा के अंतर्गत पिछले दरवाजे से प्रवेश को रोकने के उद्देश्य से NEET यूजी के लिए मानदंड को संशोधित करने की मांग की है।

मातृभाषा में होगी तकनीकी पढ़ाई

उन्होंने स्मरण कराया कि प्रधानमन्त्री ने हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयालम, गुजराती और बंगाली जैसी क्षेत्रीय भारतीय भाषाओं में मेडिकल और इंजीनियरिंग शिक्षा प्रदान करने का आह्वान किया है। मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में शुरू हो गई है और शीघ्र ही इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी हिंदी में शुरू होगी और इंजीनियरिंग की पुस्तकों का देश भर में आठ भाषाओं में अनुवाद भी शुरू हो गया है। आने वाले समय में देश भर के छात्र अपनी मातृभाषा में तकनीकी और मेडिकल शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे।

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