नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। स्वास्थ्य के क्षेत्र में बिहार सरकार को बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है जिसमें राजधानी के प्रतिष्ठित अस्पताल IGIMS में अब रॉबोटिक्स सर्जरी के जरिये मरीजों का उचित उपचार किया जायेगा। बिहार में पहली सफल रोबोटिक सर्जरी पिछले सप्ताह IGIMS के सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और लिवर ट्रांसप्लांट विभाग द्वारा पित्ताशय की पथरी के लिए की गई। मरीज शिवहर जिले की रहने वाली 26 वर्षीय एक युवती है। उसे कुछ महीनों से पेट में दर्द और उल्टी की शिकायत थी। सर्जरी के एक दिन पहले उसे अस्पताल में भर्ती किया गया था।
IGIMS: बेहतर प्रशिक्षण से संभव
विभाग के एचओडी डॉ मनीष मंडल के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने शिवहर की रहने वाली महिला मरीज की सर्जरी की। सर्जरी के तुरंत बाद मरीज काफी राहत महसूस कर रही है। डॉक्टरों की मानें तो पहली सर्जरी थी तो चुनौतियां काफी ज्यादा थी लेकिन डॉक्टरों के बेहतर प्रशिक्षण से यह संभव हो पाया। अब ओटी में दूसरी सर्जरी की तैयारी भी रोबोटिक तरीके से शुरू हो गई है। आईजीआईएमएस में रोबोटिक सर्जरी की आगे की पढ़ाई और ट्रेनिंग पर भी जोर दिया जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार पहली बार रोबोटिक सर्जरी थी तो इसके लिए मरीज का चयन करते हुए उसकी उम्र का भी ध्यान रखा गया था। मतलब मरीज का युवा होना और उसके मेडिकली फिट होना। इस तरह के ऑपरेशन में मरीज का खून बहुत कम निकलता है।
IGIMS: लागत 50 हजार से 75 हजार तक
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि जनरल वार्ड के मरीजों के लिए रोबोटिक सर्जरी की लागत 50 हजार और प्राइवेट वार्ड या स्पेशल वार्ड के मरीजों के लिए 75 हजार रुपये होगी जो निजी क्षेत्र के अस्पतालों द्वारा ली जाने वाली लागत से आधे से भी कम है। IGIMS के निदेशक डॉ. बिंदे कुमार ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे और गैस्ट्रो सर्जरी की सर्जिकल टीम, एनेस्थेसिया टीम के साथ-साथ बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग और ओटी स्टाफ को धन्यवाद दिया जिन्होंने बिहार के स्वास्थ्य विभाग के जरिए सूबे में रोबोटिक सर्जरी का इतिहास बनाने में मदद की। इस आधुनिक तकनीक (Da Vinci system) से अब यूरोलॉजी, कैंसर और स्त्री रोग संबंधी ऑपरेशनों के लिए बाहर जाने की आवश्यकता कम होगी।
