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कोविड-19 की रोकथाम में होम्योपैथी की अनदेखी से होम्योपैथिक जगत में फैल रहा है रोष

होम्योपैथी चिकित्सकों ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर होम्योपैथी के प्रचार-प्रसार में आयुष मंत्रालय द्वारा किए जा रहे भेद-भाव पर अपना रोष प्रकट किया है। आशुतोष कुमार सिंह की रपट

 नई दिल्ली/एसबीएम   

होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया दिल्ली स्टेट ब्रांच के अध्यक्ष डॉक्टर ए.के.गुप्ता ने माननीय प्रधानमंत्री को सभी होम्योपैथिक डॉक्टरों की तरफ से आयुष मंत्रालय द्वारा होम्योपैथिक चिकित्सा प्रणाली की अनदेखी किए जाने के बावत पत्र लिखा है। एक समय था जब एलोपैथिक के मुकाबले आयुष पैथियों की अनदेखी की बात कही जाती थी। लेकिन इस बार आयुष पैथियों के बीच भेद-भाव का आरोप लगाया गया है। होम्योपैथिक चिकित्सा को वह स्थान नहीं दिया जा रहा है जो आयुर्वेद को मिला है। चिकित्सकों में इस बात को लेकर बहुत रोष है।

होम्योपैथिक चिकित्सकों की नाराजगी यह है मुख्य कारण                          

जिस समय कोविड-19 का मामला सामने आया था, उस समय सभी मंचों से होम्योपैथी की चर्चा हुई थी। उसकी इम्यून बुस्टर के रूप में होम्योपैथिक दवाइयों के बारे में सलाह जारी किया गया था। लेकिन बाद में होम्योपैथी को हाशिए पर धकेल दिया गया। यही कारण है कि होम्योपैथिक डॉक्टरों ने माननीय प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अपनी व्यथा सुनाई है।

आयुष मंत्रालय द्वारा जारी जानकारियों में होम्योपैथी की अनदेखी

होम्योपैथी संघ का यह कहना है कि आयुष मंत्रालय द्वारा जनहित में जो भी जानकारियां दी जा रही हैं, उसमें होम्योपैथी की उपेक्षा हो रही है। यहां तक कि आयुष मिनिस्ट्री ने प्रारंभ में जो एडवाइजरी जारी करी थी जिसमें होम्योपैथिक दवा आर्सेनिक एल्बम को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवा कहा था। लेकिन आज जब कभी भी सरकारी तौर पर आयुष में इम्यूनिटी बूस्ट की बात होती है तो होम्योपथिक का जिक्र तक नहीं होता। केवल आयुर्वेदिक के बारे में ही चर्चा की जाती है।

पीएम मोदी ने भी बातचीत नहीं की

होम्योपैथिक चिकित्सकों में इस बात का भी रोष है कि जब प्रधानमंत्री जी के साथ आयुष के घटकों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग मीटिंग हुई थी तब भी होम्योपैथिक    डॉक्टरों को अपनी बात रखने का मौका तक नहीं मिला।

ट्रायल की अनुमति मिलने के बाद भी आयुष मंत्रालय ने जानकारी साझा नहीं की

चिकित्सकों में इस बात का रोष है कि जब आईसीएमआर और सीएसआईआर के द्वारा क्लिनिकल रिसर्च की अनुमति मिली तब भी सरकार के किसी माध्यम से समाचार पत्र या टेलीविजन पर होम्योपैथी के बारे में नहीं बताया गया। इस कारण जिन होम्योपैथिक डॉक्टरों या अस्पतालों को इसकी परमिशन मिली उन्हें खुद ही अपने बारे में लोगों को बताना पड़ रहा है। सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी देना पड़ रहा है कि उनको परमिशन मिली है, क्लिनिकल ट्रायल करने के लिए। इस प्रक्रिया से लोगों के मन होम्योपैथिक चिकित्सकों को लेकर अविश्वास का भाव भी जागृत हुआ है।

यह भी पढ़ें कोविड-19 के खिलाफ महत्वपूर्ण हो सकती है आयुष से यह साझेदारी

चिकित्सकों का कहना है कि मंत्रालय को होम्योपैथी के क्षेत्र में हो रहे शोध के बारे में लोगों को बताना चाहिए था। जो नहीं हो पाया। उन्का मानना है कि अगर यही बात सरकार द्वारा या आयुष मिनिस्ट्री द्वारा मीडिया के माध्यम से बताई जाती तब होम्योपैथी को भी बढ़ावा मिलता और एवं जनता को भी होम्योपैथी में हो रहे काम के बारे में जानकारी प्राप्त होती। इससे कोविड-19 के साथ लड़ाई में काफी मदद मिलती।

संजीवनी एप में भी होम्योपैथी सलाह को नजरअंदाज किया गया है

यहां तक कि जो आयुष द्वारा संजीवनी मोबाइल एप बनी उसमें भी होम्योपैथिक एडवाइजरी को नजरअंदाज किया गया है।

होम्योपैथी कोविड-19 से बचाव में कारगर है

इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया दिल्ली स्टेट ब्रांच के अध्यक्ष डॉक्टर ए.के.गुप्ता ने माननीय प्रधानमंत्री को सभी होम्योपैथिक डॉक्टरों की तरफ से आयुष द्वारा होम्योपैथिक चिकित्सा प्रणाली की हो रही अनदेखी व उदासीन व्यवहार के बारे में लिखित जानकारी दिया है एवं होम्योपैथी के साथ हो रहे सौतेला व्यवहार पर संज्ञान लेने की मांग की है। ध्यान देने वाली बात यह है कि प्रधानमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री एवं आयुष मंत्री जी जब भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली एडवाइजरी की बात करते हैं तो उसमें भी केवल आयुर्वेदिक सलाह का ही जिक्र होता है। जबकि स्पेनिश फ्लू और इंसेफेलाइटिस जैसी वायरल बीमारियों के दौरान उसकी सफल रोकथाम में होम्योपैथी चिकित्सा पहले भी अपनी भूमिका सिद्ध कर चुकी है।

यह भी पढ़ेंः आयुष के लिए बड़ी खबर, कोविड-19 के खिलाफ शुरू हुआ आयुर्वेदिक दवाओं का परीक्षण

होम्योपैथिक चिकित्सा प्रणाली में वायरल रोगों को ठीक करने की भरपूर क्षमता है। बिना किसी दुष्प्रभाव के मरीजों को हर तरह से स्वास्थ्य लाभा दिया जा सकता है। होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति एक सरल सस्ती और बिना किसी साइड इफेक्ट के रोगों को ठीक करने में हमेशा से सक्षम रही है।

कोरोना अथवा कोविड-19 के इन्फेक्शन में होम्योपैथिक चिकित्सकों का मानना है कि यदि होम्योपथिक दवा एलोपैथी के इलाज के साथ भी कोरोना के मरीजों को दी जाए तो अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। रोगियों के हॉस्पिटल स्टे की दर कम हो सकती है। मृत्यु दर भी कम हो सकती है।

आयुष का उपयोग इससे बेहतर तरीके से किया जा सकता था

होम्योपैथी चिकित्सकों में इस बात को लेकर ज्यादा रोष है कि आयुष का उपयोग उस तरीके से नहीं हुआ जिस तरीके से किया जा सकता था। जबकि यही समय था आयुष पैथियों को और वैज्ञानिक तरीके से स्थापित करने का। साइंटिफिक तरीके से डाटा कलेक्ट किया जा सकता था। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। डॉ.ए.के. गुप्ता ने स्वस्थ भारत मीडिया को बताया कि इस वैश्विक महामारी से निपटने के लिए जो प्रयास सरकार कर रही है वो सराहनीय है फिर भी जनता को जागरूक रहते हुए सभी नियमों का पालन करना चाहिए। उन्होंने सुझाया कि होम्योपैथी जो कि दूसरी सबसे उपयोग की जाने वाली पैथी है को साथ लेकर रोगो का उपचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस कोरोना-काल में आयुष के प्रचार प्रसार में होम्योपैथी को नजंदाज करना या भेदभाव अवांछनीय है। इससे होम्योपैथी चिकित्सा से की गई उपलब्धियों को संदेह की दृष्टि से देखा जायगा।

होम्योपैथिक चिकित्सकों द्वारा पीएम को लिखा गया पत्र नीचे दिया जा रहा है। उसकी पीडीएफ फाइल आप डाउनलोड कर सकते हैं। 

Appeal to PM by Homeo Drs

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