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टाइफाइड की भारतीय वैक्सीन लंबे समय के लिए प्रभावी

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। बायोटेक की बनी टाइफाइड टॉक्सोइड वैक्सीन टाइपबार कम से कम चार साल प्रभावी बनी रहती है। अफ्रीका में नौ महीने से 12 साल की उम्र के बच्चों पर तीसरे चरण के परीक्षण से इसका पता चला है। स्टडी में सभी आयु वर्ग के बच्चों में टीके की प्रभावकारिता देखी गई। वहां फरवरी से सितंबर 2018 के दौरान बच्चों को वैक्सीन की एक खुराक दी गई थी। मालूम हो कि 2019 में दुनिया भर में लगभग 92.4 लाख टाइफाइड के मामले सामने आए और एक लाख से अधिक मौतें हुई। 2019 में टाइफाइड के अधिकांश मामले और मौतें दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका में हुई।

ऐसे की गई स्टडी

रिपोर्ट के अनुसार नौ महीने से 12 वर्ष की आयु के स्वस्थ बच्चों को रैंडम टाइफाइड वैक्सीन या मेनिंगोकोकल ए संयुग्म (मेनए) वैक्सीन बनाने का काम सौंपा गया था। परीक्षण में शामिल शोधकर्ताओं और परीक्षण प्रतिभागियों दोनों को यह नहीं पता था कि किसे टाइफाइड का टीका मिला है और किसे मेनए मेनिंगोकोकल टीका मिला है। स्टडी के मुताबिक 28,130 बच्चों को परीक्षण के लिए भर्ती किया गया था और 14,069 बच्चों को टाइफाइड का टीका दिया गया था, जबकि शेष 14,061 बच्चों को नियंत्रित टीका (मेनए) दिया गया था। परीक्षण के परिणाम हाल ही में द लांसेट पत्रिका में प्रकाशित किए गए हैं।

कई Age group के बच्चों को दी गई खुराक

स्टडी में कहा गया है कि औसतन 4.3 वर्षों के अंत में टीके की प्रभावकारिता नौ महीने से दो वर्ष की आयु के बच्चों में 70.6 फीसद थी। लेकिन दो से चार वर्ष की आयु के बच्चों में प्रभावकारिता 79.6 फीसद से अधिक रही जबकि पांच से 12 वर्ष की आयु के बच्चों में प्रभावकारिता 79.3 फीसद थी। फॉलोअप की अवधि के दौरान टाइफाइड का टीका लगाए गए 24 बच्चों में टाइफाइड बुखार था जबकि 110 बच्चों में टाइफाइड बुखार की जांच की गई।

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