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डॉक्टरों को दवाइयों के जेनरिक नाम ही लिखने का निर्देश

प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य ने चिकित्सालयों में बेहतर व्यवस्था के लिए जारी किए निर्देश
10 दिन के अंदर बिन्दुवार अनुपालन रिपोर्ट उपलब्ध कराएं : पार्थ सारथी सेन शर्मा

लखनऊ (स्वस्थ भारत मीडिया)। स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने राजकीय चिकित्सालयों में बेहतर व्यवस्था के लिए निर्देश जारी किये है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक अधिकारी हर माह न केवल अस्पताल के क्रिटिकल परफॉर्मेंस के पैरामीटर (जो कि HMIS पोर्टल में हैं यथा ओपीडी, आईपीडी, संस्थागत प्रसव, मेजर ऑपरेशन एवं लैब टेस्ट इत्यादि) का विश्लेषण करें बल्कि चिकित्सकवार भी इसका विश्लेषण करें कि प्रत्येक ऐसे चिकित्सक, जिनके द्वारा ओपीडी/सर्जरी की जा रही हैं, उनके द्वारा कितने मरीज देखे जा रहे हैं।

एक्टिव उपकरणों का डाटा उपलब्ध हो

श्री शर्मा ने निर्देश दिए कि ‘केयर ऐप’ में नियमित रूप से प्रत्येक सोमवार को उपकरणों की क्रियाशीलता का डाटा उपलब्ध कराया जाये। इसके बाद जहां कहीं भी कोई उपकरण लंबे समय तक क्रियाशील नहीं रहता है तो सीधे अपर निदेशक विद्युत से संपर्क किया जाये। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही 108 अस्पतालों का अनुश्रवण एकीकृत कोविड कमाण्ड सेन्टर (ICCC) के माध्यम से किया जायेगा। इन अस्पतालों में महत्वपूर्ण जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लग चुके हैं और प्रत्येक कैमरे से क्या देखा जाना है, उसकी SOP का निर्धारण भी हो चुका है। उन्होंने निर्देश दिए कि समस्त प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक/अधीक्षक न केवल यह सुनिश्चित करेंगे कि वे सीसीटीवी हर समय क्रियाशील रहें बल्कि अपने स्तर पर भी यह सुनिश्चित करेंगे कि बिन्दुवार एसओपी का अनुपालन हो। प्रमुख सचिव ने निर्देश दिए कि मानक के अनुसार जो दवाइयां ड्रग वेयर हाउस में उपलब्ध हैं, उनको हासिल कर मरीजों को उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाये। उन्होंने निर्देश दिए कि दवाइयों की उपलब्धता एक साइन बोर्ड के माध्यम से दवाइयों के काउंटर के पास ऐसे प्रदर्शित की जाए कि आम जनता उसको आसानी से देख सके। साइन बोर्ड को नियमित रूप से अपडेट रखा जाये। सभी चिकित्सकों को निर्देशित किया जाये और अनुपालन सुनिश्चित किया जाये कि वे दवाइयों को जेनेरिक नाम से ही अपने प्रिस्क्रिप्शन में लिखें। अस्पतालों में साफ-सफाई को सुनिश्चित किया जाये और उसका नियमित रूप से पर्यवेक्षण किया जाए।

पैरामेडिकल स्टाफ की पर्याप्त ड्यूटी लगे

श्री शर्मा ने निर्देश दिए कि आपातकालीन क्षेत्र में चिकित्सक एवं पैरामेडिकल स्टाफ की पर्याप्त ड्यूटी लगायी जाये और वहां मरीजों के लिए एंबुलेंस, व्हीलचेयर, स्ट्रेचर और आवश्यक दवाइयों/उपकरणों इत्यादि की व्यवस्था सुनिश्चित की जाये। आईपीडी वार्ड में जो भोजन उपलब्ध कराया जाता है, उसकी गुणवत्ता की जांच नियमित रूप से की जाये और मरीजों एवं उनके तीमारदारों से टेस्टीमोनियल रिकॉर्ड किया जाये और संबंधित लोगों से भी साझा किया जाये। उन्होंने निर्देश दिये कि रोगी कल्याण समिति में जो भी धनराशि उपलब्ध है उसका मरीजों की भलाई के लिए उपयोग किया जाये और उससे मरीजों के हित में अस्पताल की छोटी-मोटी कमियों को दूर कराया जाए। रोगी कल्याण समिति में CSR अथवा स्थानीय संपन्न व्यक्तियों से डोनेशन के माध्यम से सहायता प्राप्त करने का प्रयास किया जाये। प्रमुख सचिव ने सभी अधिकारियों को कहा है कि निर्देशों का अनुपालन कर 10 दिन के अन्दर बिन्दुवार अनुपालन रिपोर्ट महानिदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाएं को उपलब्ध करायी जाए।

डॉक्टरों की श्रेणीवार सूची तैयार रहे

प्रमुख सचिव ने निर्देश दिए कि किसी भी बैठक में या चिकित्सकों के संबंध में जब भी सूचना उपलब्ध करायी जाये तो उपलब्ध चिकित्सकों में नियमित चिकित्सक, संविदा पर तैनात चिकित्सक और पुनर्नियुक्ति पर तैनात चिकित्सकों को जोड़कर दिखाया जाये और पदों के विवरण इस तरह दिये जायें कि जहां चिकित्सकों की कमी है, तो वहाँ किस विशेषज्ञ चिकित्सक की आवश्यकता है एवं जहाँ आवश्यकता से अधिक चिकित्सक तैनात हैं तो वहाँ तैनात अतिरिक्त चिकित्सक की संख्या एवं विशेषज्ञता क्या है, तत्काल अपडेट सूचना उपलब्ध करायी जाये ताकि उन्हें जनहित में अन्यत्र तैनात किया जाये। अस्पताल में रख-रखाव की छोटी-मोटी मरम्मत, रंगाई-पुताई को प्राथमिकता से कराया जाये और इस हेतु आवश्यकतानुसार मुख्य चिकित्सा अधिकारी के अधीन अवर अभियंता से संपर्क किया जाये। सभी चिकित्सकों को ई-संजीवनी 2.0 के हब के रूप में पंजीकृत किया जाए।

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