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Loksabha: PMBJP योजना में 5 आयुर्वेदिक दवाएं

Loksabha: PMBJP योजना में 5 आयुर्वेदिक दवाएं

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) योजना में 5 आयुर्वेदिक उत्पादों को जोड़ा गया है, जिन्हें चयनित जन औषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती दरों पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इन उत्पादों में च्यवनप्राश स्पेशल 500 ग्राम, च्यवनप्राश स्पेशल 1000 ग्राम, त्रिफला, शिलाजीत और अश्वगंधा शामिल हैं। रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा (Loksabha) में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि जन औषधि केंद्रों में उपलब्ध आयुर्वेदिक उत्पादों सहित दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निरंतर निरीक्षण, परीक्षण और मानकीकरण सुनिश्चित करने के लिए ठोस व्यवस्था स्थापित की गई है, जिनमें केवल WHO द्वारा प्रमाणित गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) संयंत्रों से ही आपूर्ति, सभी दवा बैचों के 100 प्रतिशत पूर्व-परीक्षण के बाद ही वितरण और केवल गुड लेबोरेटरी प्रैक्टिसेज (GLP) के अनुरूप प्रयोगशालाओं में परीक्षण शामिल है।

लोकसभा: दवा कंपनियों पर अंकुश के उपाय

एक अन्य प्रश्न पर श्रीमती पटेल ने जानकारी दी कि 2024 में सरकार ने यूनिफॉर्म कोड फॉर फार्मास्युटिकल्स मार्केटिंग प्रैक्टिसेज (UCPMP) अधिसूचित की है। यह दवा कंपनियों द्वारा अनैतिक विपणन प्रथाओं को रोकने के लिए दिशानिर्देश हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि औषधि उत्पादों का प्रचार जिम्मेदारी से किया जाए। यह संहिता स्वास्थ्य पेशेवरों के समक्ष दवाओं के प्रचार के तरीके को निर्धारित करती है। यह संहिता दवा कंपनियों द्वारा स्वास्थ्य पेशेवरों या उनके परिवार के सदस्यों को उपहार, आर्थिक लाभ और आतिथ्य प्रदान करने पर रोक लगाती है। इसमें एक परिचालन ढांचा भी शामिल है, जिसमें शिकायतों को दर्ज करने, उनकी जांच करने और उनका निपटान करने की प्रक्रियाएं और उल्लंघन के मामलों में दंड के प्रावधान शामिल हैं। इसके अलावा भारतीय चिकित्सा परिषद (पेशेवर आचरण, शिष्टाचार और नैतिकता) विनियम, 2002 दवा और संबद्ध स्वास्थ्य क्षेत्र उद्योग के साथ अपने संबंधों में डॉक्टरों के लिए आचार संहिता निर्धारित करता है।

लोकसभा: दवाओं की उपलब्धता

श्रीमती पटेल ने एक अन्य प्रश्न पर जानकारी दी कि सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में आने वाले मरीजों के लिए आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा उनके जेब से होने वाले खर्च (OOPI) को कम करने के उद्देश्य से, सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत नि:शुल्क औषधि सेवा पहल (FDSI) शुरू की है। इसके अंतर्गत राज्यों को उनके कार्यक्रम कार्यान्वयन योजनाओं (पीआईपी) में दर्शाई गई आवश्यकताओं के आधार पर उनकी समग्र संसाधन सीमा के भीतर सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक दवाओं को नि:शुल्क उपलब्ध कराने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। मंत्रालय ने यह भी सिफारिश की है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में सुविधा-वार आवश्यक दवाओं की सूची, जिसमें कैंसर उपचार की दवाएं भी शामिल हैं, उपलब्ध कराई जाए। इसके मुताबिक उप-स्वास्थ्य केन्‍द्र स्वास्थ्य एवं कल्याण केन्‍द्र (SHC-HWC) 106, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्‍द्र स्वास्थ्य एवं कल्याण केन्‍द्र (PHC-HWC) 172, सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र (CHC) 300, उप-जिला अस्‍पताल 318 और जिला अस्‍पताल 381 दवाएं वितरित करते हैं।

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