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कोरोना योद्धाः बिहार के इस एएसपी ने बदल दी जिले की तस्वीर

संवेदनशील प्रशासन से लोगों की पीड़ा तो कम होती ही है साथ में उनका संकल्प भी मजबूत होता है। इसी विषय पर लखिसराय के कोरोना योद्धा एएसपी अमृतेश कुमार की कहानी लेकर आए हैं
डॉ. विजय कुमार मिश्र

 

नई दिल्ली / एसबीएम

डॉ. विजय कुमार मिश्र
(सहायक प्रोफ़ेसर, हिंदी विभाग, हंसराज कॉलेज, दिल्ली)

विश्वव्यापी कोरोना संकट के दौर में भारत अपनी पूरी इच्छाशक्ति के साथ मजबूती से जंग लड़ रहा है। चीन के वुहान से शुरू हुए इस संक्रमण ने आज दुनिया की बड़ी-बड़ी ताकतों को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया है। संतोष की बात है कि दुनिया के अन्य बड़े देशों की तुलना में भारत में स्थिति कुछ कम भयावह है। विशेषज्ञों के मुताबिक़ ऐसा भारत सरकार द्वारा समय पर लागू किया गया देशव्यापी लॉक डाउन और सरकार और समाज के बेहतर समन्वय के कारण ही संभव हो पाया है। समाज, सरकार और प्रशासन की संवेदनशीलता की इसमें महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है।

लॉकडाउन के दौरान अनेक ऐसी घटनाओं की जानकारी आती रही है जिससे कोरोना से हमारी लड़ाई के दृढ़ संकल्प की पुष्टि होती रही। इसी तरह की प्रशासनिक संवेदनशीलता का उदाहरण बिहार के लखीसराय से सामने आया है। कोरोना संकट में लखीसराय का महत्व इस बात में है कि इसका सीमावर्ती जिला मुंगेर इस समय बिहार का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट है और जहाँ संक्रमित लोगों की संख्या सौ से भी अधिक है। ऐसे में प्रशासन की अतिरिक्त सतर्कता के कारण लखीसराय काफी हद तक संक्रमण पर काबू पाने में सफल है।

दिल्ली से भारती कश्यप नामक एक युवक ने जब लखीसराय स्थित अपने गांव पवैय में बीमार माँ के लिए दवा की सख्त आवश्यकता की गुहार सम्बन्धी ट्विट किया तो अपने साहस और संवेदनशीलता के लिए चर्चित लखीसराय के ए.एस.पी अभियान अमृतेश कुमार ने तत्काल सक्रिय होकर जिस तरह से स्वयं उन तक दवा पहुंचाने का काम किया उसकी सोशल मीडिया पर काफी तारीफ़ हुई। उनके इस कार्य के लिए केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान और गिरिराज सिंह आदि ने भी ट्विटर एवं फेसबुक पर प्रशंसा की। लखीसराय में पहाड़ियों से घिरे बरमसिया, बंकुरा, मनियारा, काशी टोला आदि कई ऐसे गाँव हैं जो नक्सल प्रभावित इलाका है और जहाँ प्रशासन भी जाने से परहेज बरतती है। किन्तु भूख से परेशान लोगों के बीच एएसपी अभियान अमृतेश कुमार के नेतृत्व में प्रशासन ने उन गाँवों में पहुँचकर ग्रामीणों के बीच सीआरपीएफ़ की ओर से 1200 घरों में न केवल 15 दिनों की राहत सामग्री पहुंचाई बल्कि उनके बीच सोशल डिस्टेंसिंग का महत्व भी समझाया।

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बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पाण्डेय ने भी इसके लिए उनकी फोन कर पीठ थपथपाई। इस समबन्ध में एएसपी लखीसराय अमृतेश कुमार ने संपर्क करने पर कहा कि, “यह असामान्य परिस्थिति है, लोगों की समस्याओं को समझना और समाधान का प्रयास करना बेहद जरुरी है। हमने जो कुछ भी किया वह एक प्रशासनिक अधिकारी होने के नाते ही नहीं बल्कि मनुष्य होने के नाते भी हमारा दायित्व था, हमारी लोगों से भी यही अपील है कि वे सजग रहते हुए, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए कोरोना पर विजय पाने की इस लड़ाई में अपना सक्रिय योगदान दें। हम उनकी समस्याओं के प्रति सचेत और संवेदनशील हैं और हमारी यह कोशिश है कि कोरोना को फ़ैलने से रोकने के साथ ही यह सुनिश्चित करें कि कोई भी व्यक्ति भूख से न मरे।”

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असल में ऐसी सजगता और प्रशासनिक संवेदनशीलता आज की जरुरत है। इनसे कोरोना से हमारी लड़ाई को मजबूती तो मिलती ही है इसके साथ ही हमारी सामाजिक व्यवस्था भी मजबूत होती है और अंततः एक देश के रूप में हमारा चरित्र भी उभरकर सामने आता है।

नोटः यह स्टोरी पांचजन्य से साभार ली गई है।

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