नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। दिल्ली राज्य सरकार ने वायु प्रदूषण से निपटने में ऐसी लापरवाही की है कि फंड होते हुए भी खर्च नहीं किया। खर्च हुआ भी तो मात्र एक तिहाई से भी कम। जबकि देश और दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक दिल्ली भी है। इसे गैस चैंबर तक माना जाता है।
वायु प्रदूषण : मंत्रालय की रिपोर्ट से खुलासा
एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक 18 जून को प्रकाशित रिपोर्ट में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के पास मौजूद सरकारी रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा गया है कि दिल्ली ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत प्राप्त धनराशि का एक तिहाई से भी कम खर्च किया है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने जनवरी 2019 में एनसीएपी को लॉन्च किया था और इसका उद्देश्य 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 131 उच्च प्रदूषित और दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों/शहरी समूहों में वायु गुणवत्ता में सुधार करना है। एनसीएपी का लक्ष्य वर्ष 2017-18 की तुलना में 2024-25 तक हवा में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम10) को 20 से 30 फीसद की कमी लाना है।
वायु प्रदूषण : दिल्ली में 32.65 फीसद खर्च
रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने 2025-26 तक पीएम10 के स्तर में 40 फीसद तक की कमी लाने या राष्ट्रीय मानकों को पूरा करने के लक्ष्य को संशोधित किया है। NCAP के अंतर्गत शहर वायु गुणवत्ता के ऐसे बेहतर स्तर को सुनिश्चित करने के लिए धनराशि के लिए पात्र हैं। पर्यावरण मंत्रालय के आंकड़ों से पता चला है कि दिल्ली ने 13.94 करोड़ रुपये खर्च किए जो एनसीएपी के तहत उसे जारी 42.69 करोड़ रुपये का सिर्फ 32.65 फीसद है। कई अन्य शहरों ने भी कम खर्च किया गया है। कम धनराशि का उपयोग करने वाले अन्य शहरों में पठानकोट (37.1 प्रतिशत), उज्जैन (37.7 प्रतिशत), कर्नाटक का दावणगेरे (43.6 प्रतिशत), असम का नगांव (48.5 प्रतिशत), विजयवाड़ा (41.09 प्रतिशत), जमशेदपुर (44.24 प्रतिशत) और वाराणसी (48.85 प्रतिशत) शामिल है।
वायु प्रदूषण : अन्य शहरों में भी कम खर्च
रिपोर्ट के अनुसार 14 शहरों और शहरी समूहों ने इस कार्यक्रम के तहत पर्यावरण मंत्रालय से या 15वें वित्त आयोग के माध्यम से सीधे प्राप्त धनराशि का 50 फीसद से भी कम खर्च किया है। एनसीएपी की शुरुआत के बाद से इसके तहत 130 शहरों को आवंटित कुल 12,636 करोड़ रुपये में से 27 मई तक केवल 8,981 करोड़ रुपये–जो लगभग 71 फीसद है, खर्च किए गए हैं।
वायु प्रदूषण : गुरुग्राम की स्थिति खराब
इस बीच केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPBC) द्वारा 19 जून को जारी आंकड़ों से पता चलता है कि प्रदूषण मामले में गुरुग्राम की स्थिति सबसे खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़कर 333 पर पहुंच गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा तय मानकों के लिहाज से देखें तो गुरुग्राम में प्रदूषण 455 फीसद अधिक है। इसके बाद राजस्थान का बूंदी दूसरे स्थान पर एक्यूआई 280 है। इसके अलावा देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में टोंक (170) चौथे जबकि बद्दी (141) पांचवें स्थान पर है। 137 अंकों के साथ विशाखापत्तनम छठे स्थान पर है। बाड़मेर 135 अंकों के साथ सातवां सबसे प्रदूषित शहर है। इसमें मंडी गोबिंदगढ़ (126), करौली (122) और श्रीगंगानगर (118) भी शामिल है।
