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शरीर की स्थिति के अनुसार करें योगासन

शरीर की स्थिति के अनुसार करें योगासन
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) पर खास

बी. कृष्णा

नयी दिल्ली। प्रत्येक व्यक्ति जब एक समान आसन करते हुए दिखाई देते हैं, तो यह जानना अत्यंत आवश्यक हो जाता है कि क्या वास्तव में सभी व्यक्ति एक जैसे आसन कर सकते हैं? शरीर की बनावट, आयु, रोग की स्थिति, लचीलापन तथा मानसिक अवस्था–ये सभी कारक यह निर्धारित करते हैं कि किसी व्यक्ति के लिए कौन सा आसन उपयुक्त है और कौन सा नहीं।
इस लेख में हम न केवल कुछ रोगों से ग्रसित व्यक्तियों के लिए उपयुक्त योगासनों की जानकारी प्राप्त करेंगे, बल्कि यह भी जानेंगे कि ब्लड प्रेशर और मधुमेह जैसे सामान्य किन्तु गंभीर रोगों से पीड़ित व्यक्तियों को कौन-कौन से आसन करने से बचना चाहिए। वर्तमान समय में ये दोनों रोग लगभग हर घर में किसी न किसी रूप में उपस्थित हैं, अतः योगाभ्यास करते समय सावधानी बरतना आवश्यक हो जाता है।
हर व्यक्ति एक जैसे आसन (योग मुद्राएं) कर सकता है या नहीं, यह कई कारकों पर निर्भर करता है:
1. शारीरिक क्षमता और लचीलापन
• कुछ लोगों का शरीर स्वाभाविक रूप से अधिक लचीला होता है, जबकि अन्य को अभ्यास करना पड़ता है।
• यदि किसी व्यक्ति के जोड़ों या मांसपेशियों में अकड़न है, तो कुछ आसनों को करना कठिन हो सकता है।
2. स्वास्थ्य की स्थिति
• पीठ दर्द, हर्निया, ब्लड प्रेशर, आर्थराइटिस या अन्य बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति को कुछ आसनों से बचना चाहिए।
• उदाहरण: उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति को शीर्षासन या सर्वांगासन नहीं करना चाहिए।
3. आयु
• उम्र के साथ शरीर में बदलाव आते हैं, जिससे कुछ कठिन आसनों को करना मुश्किल हो सकता है।
• बुजुर्गों के लिए सौम्य और सहायक आसनों (जैसे ताड़ासन, शवासन) की सिफारिश की जाती है।
4. अनुभव स्तर
• शुरुआती लोग कठिन योग आसनों को तुरंत नहीं कर सकते। उन्हें धीरे-धीरे अभ्यास से आगे बढ़ना चाहिए।
5. गर्भावस्था या विशेष परिस्थितियाँ
• गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष प्रेनेटल योग होता है, जिसमें कुछ आसनों से परहेज करना होता है।
1. पीठ दर्द
समस्या योग आसन लाभ
कमर या पीठ में दर्द भुजंगासन (Cobra Pose): रीढ़ की लचीलता बढ़ाता है, दर्द कम करता है।
मर्कटासन (Spinal Twist): रीढ़ को स्ट्रेच करता है।
बालासन (Child’s Pose): विश्राम और रीढ़ को आराम।

2. तनाव और चिंता
समस्या योग आसन लाभ
शवासन (Corpse Pose): मानसिक तनाव दूर करे। गहरी शांति और विश्राम।
प्राणायाम (अनुलोम विलोम): मन को शांत करता है।
सुखासन + ध्यान: ध्यान के साथ तनाव कम।

3. हाई ब्लड प्रेशर
समस्या योग आसन लाभ
वज्रासन (Thunderbolt Pose): पाचन और BP संतुलन में सहायक।
शवासन: तनाव कम करता है।
भ्रामरी प्राणायाम: मस्तिष्क को शांति प्रदान करता है।
टेढ़े-मेढ़े, उल्टे आसनों जैसे शीर्षासन से बचें।

4. घुटनों में दर्द
समस्या योग आसन लाभ
गठिया या घुटनों में कमजोरी—ताड़ासन (Palm Tree Pose): संतुलन सुधारता है, तनावमुक्त।
सुप्त बद्धकोणासन (Reclining Bound Angle Pose): घुटनों पर हल्का प्रभाव।
अर्ध तितली (Half Butterfly): मृदु खिंचाव और रक्तसंचार में सुधार।

5. पाचन की समस्या
समस्या योग आसन लाभ
अपच, कब्ज—पवनमुक्तासन (Wind-Relieving Pose): गैस और पाचन में सहायक।
वज्रासन—भोजन के बाद लाभकारी।
अर्ध मत्स्येन्द्रासन—पाचन अंगों की मालिश करता है।

6. अनिद्रा (Insomnia):
समस्या योग आसन लाभ
नींद न आना—शवासन: गहरी विश्रांति।
भ्रामरी प्राणायाम: मन को शांत करता है।
विपरीतकरणी मुद्रा (Legs-Up-the-Wall Pose): शांति और नींद के लिए अत्युत्तम।
7. थकान और ऊर्जा की कमी (Fatigue/Low Energy)
योग आसन लाभ
सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar): पूरे शरीर को सक्रिय करता है।
ताड़ासन + हस्त उत्तानासन: शरीर को स्ट्रेच करता है।
वृक्षासन (Tree Pose): संतुलन व एकाग्रता।

महत्वपूर्ण सुझाव:
• कोई भी आसन ज़ोर जबरदस्ती से न करें।
• शरीर की सीमाओं को पहचानें और धीरे-धीरे सुधार करें।
• चिकित्सक या योग गुरु से परामर्श लेना अच्छा रहेगा यदि कोई पुरानी बीमारी हो।

उच्च रक्तचाप और मधुमेह के रोगियों को नहीं करने योग्य आसन
1. उल्टे आसन (Inverted Poses)
ये आसन रक्त का प्रवाह सिर की ओर बढ़ाते हैं जिससे BP अचानक बढ़ सकता है।
योग आसन क्यों नहीं करें?
शीर्षासन (Headstand): रक्तचाप को अचानक बढ़ा सकता है।
सर्वांगासन (Shoulder Stand): हार्ट और ब्रेन पर दबाव बढ़ाता है।
हलासन (Plow Pose): गर्दन और सिर पर दबाव, BP असंतुलन।

2. बहुत तेज गति या जोर वाले आसन
योग आसन / अभ्यास क्यों नहीं करें?
तेज कपालभाति प्राणायाम—तेज श्वास से BP और हृदय गति बढ़ सकती है।
बहुत तेज सूर्य नमस्कार—हृदय पर ज़्यादा दबाव डालता है।
बस्त्रिका प्राणायाम (अगर तेज़ करें)—तेज़ गति हृदय व BP के लिए हानिकारक हो सकती है।

3. पेट पर अत्यधिक दबाव डालने वाले आसन
योग आसन क्यों नहीं करें?
धनुरासन (Bow Pose): पेट और अग्न्याशय पर अधिक दबाव।
मयूरासन (Peacock Pose): पाचन अंगों और BP पर असर डालता है।
नौकासन (Boat Pose): मधुमेह में सीमित या चिकित्सकीय सलाह से करें।

4. लंबे समय तक सांस रोकना (Breath Retention)
अभ्यास क्यों नहीं करें?
कुंभक प्राणायाम (Retention with breath)—रक्तचाप अस्थिर कर सकता है।
अनुलोम-विलोम में लंबी रुकावट—मधुमेह और BP दोनों में जोखिम।

सामान्य सुझाव:
• योग हमेशा धीरे, शांति और सजगता के साथ करें।
• भोजन के तुरंत बाद योग न करें (कम से कम 1.5–2 घंटे का अंतर रखें)।
• अधिक थकान या चक्कर आने पर तुरंत शवासन करें और योग रोक दें।
• अपनी दवा चालू रखें — योग के साथ डॉक्टर की सलाह भी जरूरी है।
सुरक्षित विकल्प:
• वज्रासन, भुजंगासन, बालासन, ताड़ासन, सेतुबंधासन, अर्ध मत्स्येन्द्रासन
• अनुलोम-विलोम (धीरे), भ्रामरी प्राणायाम, शवासन
• विपरीतकरणी मुद्रा (दीवार के सहारे, डॉक्टर से पूछ कर)

कुछ योग आसन ऐसे होते हैं जिन्हें मधुमेह के रोगियों को सावधानी से करना चाहिए या बिल्कुल नहीं करना चाहिए, विशेषकर यदि उन्हें कोई और सह-रोग (जैसे हाई BP, हृदय रोग, रेटिनोपैथी आदि) हो।

सावधानी के साथ कौन से आसन करें?
इन आसनों को योग प्रशिक्षक की निगरानी में या चिकित्सकीय सलाह के साथ ही करना चाहिए:
• उष्ट्रासन (Camel Pose) – यदि BP कंट्रोल में हो।
• त्रिकोणासन – धीरे और नियंत्रित गति से।
• अर्धमत्स्येन्द्रासन – हल्के रूप में।
• कपालभाति – बहुत धीरे, 1–2 मिनट से अधिक नहीं।

सुरक्षित और फायदेमंद विकल्प:
आसन / अभ्यास लाभ
वज्रासन—भोजन के बाद पाचन सुधारता है।
भुजंगासन—अग्न्याशय और रीढ़ के लिए लाभकारी।
बालासन—विश्रांति और मानसिक शांति।
शवासन—तनाव घटाता है।
अनुलोम-विलोम (धीरे)—हार्मोन संतुलन।
भ्रामरी प्राणायाम—मानसिक तनाव में राहत।

यहाँ मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित रोगियों के लिए एक “क्या करें और क्या न करें (Do’s & Don’ts)” की स्पष्ट और उपयोगी तालिका दी जा रही है। इसे आप अपनी दैनिक दिनचर्या में मार्गदर्शक के रूप में उपयोग कर सकते हैं।
क्या करें (DO’s)
क्र. कार्य कारण / लाभ
1️⃣ प्रातः नियमित योग अभ्यास करें (30-45 मिनट): ब्लड शुगर नियंत्रण और BP स्थिर रखने में मदद।
2️⃣ वज्रासन में भोजन के बाद 5–10 मिनट बैठें। पाचन तंत्र को सुधारता है, शुगर नियंत्रण में सहायक।
3️⃣ शवासन, बालासन, भुजंगासन, सेतुबंधासन करें। तनाव कम करते हैं, रक्तचाप और ब्लड शुगर को संतुलित रखते हैं।
4️⃣ अनुलोम-विलोम व भ्रामरी प्राणायाम (धीरे-धीरे) तंत्रिका तंत्र को शांत करते हैं, मानसिक स्वास्थ्य में सहायक।
5️⃣ योग के साथ नियमित दवा और डॉक्टर की सलाह बनाए रखें। योग सहायक है, विकल्प नहीं
6️⃣ हाइड्रेटेड रहें (पर्याप्त पानी पिएं)। शुगर लेवल को संतुलित बनाए रखने में मदद।
7️⃣ ध्यान (Meditation) का अभ्यास करें। मानसिक शांति, Cortisol (तनाव हार्मोन) कम करता है।

क्या न करें (DON’Ts)
क्र. कार्य क्यों न करें?
1️⃣ शीर्षासन, सर्वांगासन, हलासन जैसे उल्टे आसन रक्तचाप अस्थिर कर सकते हैं, आंखों की नसों पर दबाव।
2️⃣ मयूरासन, नौकासन, धनुरासन (तेज या लंबे समय तक) अग्न्याशय पर दबाव, थकावट या शुगर ड्रॉप।
3️⃣ तेज गति से कपालभाति या बस्त्रिका प्राणायाम हृदय व BP पर दुष्प्रभाव डाल सकते हैं।
4️⃣ प्राणायाम में सांस रोकना (कुंभक) उच्च BP व तनाव में जोखिमपूर्ण।
5️⃣ भोजन के तुरंत बाद आसन करना (वज्रासन छोड़कर) अपच और थकान।
6️⃣ थकान, चक्कर या कमजोरी में योग करना हाइपोग्लाइसीमिया (Low Sugar) की संभावना।
7️⃣ बिना चिकित्सकीय परामर्श के कठिन आसन या योग प्रोग्राम शुरू करना स्वास्थ्य को नुकसान हो सकता है।

ब्लड प्रेशर (उच्च व निम्न) और मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों के लिए करने योग्य तथा वर्जित योगासनों की सूची :
1. उच्च रक्तचाप के लिए करने योग्य आसन:
• वज्रासन
• शवासन
• ताड़ासन
• भ्रामरी प्राणायाम
• अनुलोम-विलोम (धीमी गति से)
• शीतली और शीतकारी प्राणायाम
वर्जित आसन
• शीर्षासन (Headstand)
• सर्वांगासन
• कपालभाति (तेज़ गति से)
• अधिक देर तक सूर्य नमस्कार
• बहुत अधिक झुकने वाले या उल्टे आसन
2. निम्न रक्तचाप के लिए करने योग्य आसन:
• ताड़ासन
• भुजंगासन
• पश्चिमोत्तानासन
• अनुलोम-विलोम
• मकरासन
• सूर्य नमस्कार (धीमी गति से)
वर्जित आसन:
• शीतली/शीतकारी प्राणायाम
• अत्यधिक विश्रामकारी आसन (जैसे शवासन अगर बहुत देर तक करें तो)
• बहुत देर तक खड़े रहने वाले आसन
3. मधुमेह के लिए  करने योग्य आसन:
• अर्धमत्स्येन्द्रासन
• मयूरासन (यदि संभव हो)
• पवनमुक्तासन
• भुजंगासन
• धनुरासन
• कपालभाति (सामान्य गति से)
• अनुलोम-विलोम
• मंडूकासन
• सूर्य नमस्कार
वर्जित आसन:
• अत्यधिक बल लगाने वाले आसन यदि शरीर कमजोर हो
• ज़्यादा देर तक प्राणायाम बिना मार्गदर्शन के
• उच्च रक्तचाप के साथ हो तो कपालभाति और मयूरासन से परहेज़ करे

सुझाव:
• योग धीरे-धीरे शुरू करें और अपने शरीर के संकेतों को समझें।
• किसी भी आसन में दर्द या असहजता लगे तो उसे तुरंत रोक दें।
• भोजन और योग अभ्यास के बीच कम से कम 1.5–2 घंटे का अंतर रखें।

(लेखिका ज्योतिषी, योग और आध्यात्मिक चिंतक हैं।)

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