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कैंसर पीड़ितों के लिए CAR T Cell थेरेपी से नयी उम्मीद

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। हर उपाय के बाद भी राहत न पाने वाले कैंसर पीड़ितों के लिए  CAR T CELL थेरेपी एक उम्मीद बनकर सामने आयी है। भारत निर्मित इस थेरेपी से बी सेल लिंफोमस (B-cell Lymphomas) और बी.एक्यूट लिंफोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (B-acute Lymphoblastic Leukaemia) का इलाज संभव है।

दिल्ली के अस्पताल में थेरेपी उपलब्ध

रिपोर्ट के मुताबिक ये थेरेपी दिल्ली के अस्पताल में उपलब्ध है। नवंबर 2022 से दिसंबर 2023 तक अपोलो हॉस्पिटल्स ने 6 मरीजों को ये थेरेपी दी जो कामयाब रही। इसमें 5 वयस्क और एक बच्चा शामिल था। इन मरीजों में से चार को क्लिनिकल ट्रायल के तहत यह थेरेपी दी गई जिनमें से दो ने कमर्शियली इंटरनेशनल सीएआर.टी सेल थेरेपी हासिल की। अपोलो में ऑन्कोलॉजी एंड इंटरनेशनल के ग्रुप प्रेसिडेंट डाॅ. दिनेश माधवन ने बताया कि तीन कैंसर मरीजों ने CAR T CELL थेरेपी दिए जाने के बाद एक साल पूरा कर लिया है और अभी सेहतमंद हैं। इसके अलावा कम से कम दस और रोगी को ये थेरेपी दी जा रही है।

इलाज में लगता है मोटा खर्च

उन्होंने कहा कि इस उपचार का खर्च 75 लाख से 90 लाख तक आएगा। इस थेरेपी की मंजूरी मिल चुकी है जिसके तहत बी सेल लिंफओमस और बी.एक्यूट लिंफोब्लास्टिक ल्यूकेमिया के 15 साल से ऊपर के मरीज का इलाज किया जा सकेगा। CAR T CELL थेरेपी को अक्सर लिविंग ड्रग्स कहा जाता है जिसमें कैंसर के मरीजों का टी सेल निकालते हैं। ये एक तरह का व्हाइट ब्लड सेल्स है जिसका काम कैंसर सेल से मुकाबला करना है। इसको कंट्रोल्ड लैब में जेनेटिकली मोडिफाई किया जाता है।

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