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समुद्री लहरों से बिजली पैदा करने की नई तकनीक

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। दुनियाभर में ऊर्जा संकट से निबटने के लिए वैज्ञानिक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से बिजली उत्पादन के तरीके खोजने का प्रयास कर रहे हैं। इसी दिशा में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जिससे समुद्री तरंगों से बिजली उत्पन्न हो सकती है। यह पहल भारत को नवीकरणीय ऊर्जा के माध्यम से वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट बिजली पैदा करने के अपने जलवायु परिवर्तन संबंधी लक्ष्यों को पूरा करने में मददगार हो सकती है।

उपकरण का हुआ परीक्षण

समुद्री तरंगों से बिजली उत्पादन की यह तकनीक आईआईटी मद्रास द्वारा विकसित ‘ओशन वेव एनर्जी कन्वर्टर’ नामक उपकरण के कारण संभव हो सका है। इस उपकरण का परीक्षण पिछले महीने सफलतापूर्वक किया गया है। इस उपकरण को तमिलनाडु के तूतीकोरिन तट से लगभग छह किलोमीटर दूर 20 मीटर गहरे स्थान पर तैनात किया गया है। इससे अगले तीन वर्षों में समुद्र की लहरों से एक मेगावाट बिजली पैदा करने का लक्ष्य है।

प्रोजेक्ट सिंधुजा-1

‘सिंधुजा-1’ नामक इस परियोजना के तहत स्थापित उपकरण में फ्लोटिंग घटक, लंबी छड़ (स्पार) और इलेक्ट्रिकल मॉड्यूल शामिल हैं। समुद्री लहर ऊपर और नीचे होती है, तो गुब्बारे के समान फ्लोटिंग घटक भी ऊपर और नीचे होता है। उपकरण का डिजाइन कुछ इस तरह है कि गुब्बारे जैसी इस प्रणाली में एक केंद्रीय छिद्र होता है, जिससे होकर एक लंबी छड़, जिसे स्पार कहा जाता है, गुजरती है।

कई संस्थाओं का मिला सहयोग

IIT मद्रास ने ‘ओशन वेव एनर्जी कन्वर्टर’ का परीक्षण विरया परमिता एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड और मोतीलाल नेहरु राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, प्रयागराज के सहयोग से किया है। जबकि विद्युत भंडारण सिस्टम जीकेसी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग ऐंड टेक्नोलॉजी और एमसीकेवी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग, पश्चिम बंगाल द्वारा डिजाइन किया गया है। समुद्र में इस उपकरण को स्थापित करने में वाटरफ्रंट इंजीनिरिंग और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड की भूमिका रही है।

7500 किलोमीटर लंबी तटरेखा भारत में

महासागर इंजीनियरिंग विभाग, आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर अब्दुस समद बताते हैं-भारत के पास 7,500 किलोमीटर लंबी तटरेखा है, जो 54 गीगावॉट बिजली उत्पादन में सक्षम है। समुद्री जल में ज्वार और महासागरीय तापीय ऊर्जा का भंडार संचित है। भारत में समुद्री लहरों से 40 गीगावाटऊर्जा का दोहन संभव है।

इंडिया साइंस वायर से साभार

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