नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पोषण संस्थान (ICMR-NIN) के नेतृत्व वाले ‘लेट्स फिक्स आवर फूड’ (LFOF) समूह ने भारत में बच्चों और किशोरों के लिए स्वस्थ आहार, पोषण (Nutrition) और खाद्य वातावरण को बढ़ावा देने के लिए प्राथमिकता वाले नीतिगत कदम शीर्षक से एक नीतिगत दस्तावेज जारी किया। यह दस्तावेज देशभर में बच्चों और किशोरों के बीच बेहतर खाद्य वातावरण बनाने तथा उनके खान-पान की आदतों में सुधार के लिए साक्ष्य-आधारित सिफारिशों को रेखांकित करता है। इसे एलएफओएफ प्रसार एवं परामर्श कार्यशाला के दौरान नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. एम. श्रीनिवास ने जारी किया।
रोग से बचाव भी होगा
यह समूह आईसीएमआर-एनआईएन के नेतृत्व में एक बहु-संस्थानीय राष्ट्रीय मंच है जिसमें ‘रिज़ॉल्व टू सेव लाइव्स’ इंडिया, यूनिसेफ इंडिया, ग्लोबल हेल्थ एडवोकेसी इनक्यूबेटर (GHAI), PFHI, WHO, FSSAI, IEG, WFI, लेडी इरविन कॉलेज, IFPRI, डीकिन यूनिवर्सिटी और अन्य राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय भागीदार शामिल हैं। अनुसंधान, नीति विश्लेषण, समर्थन और हितधारकों की भागीदारी के माध्यम से, यह समूह खाद्य वातावरण में बदलाव लाकर, विशेष रूप से बच्चों और किशोरों के लिए खान-पान से जुड़ी गैर-संचारी बीमारियों को रोकने के भारत के प्रयासों में सहायता प्रदान करता है। यह प्रकाशन लगभग तीन वर्षों के बहुविषयक अनुसंधान, हितधारकों के परामर्श और नीतिगत चर्चाओं को एक साथ लाता है। यह प्रमुख क्षेत्रों में नीतिगत सिफारिशें प्रस्तुत करता है, जिनमें स्कूलों में स्वस्थ खाद्य वातावरण, पोषण साक्षरता, पैकेट के आगे पोषण संबंधी लेबलिंग, बच्चों को अस्वास्थ्यकर भोजन के विपणन का नियमन, वसा, नमक और चीनी (एचएफएसएस) की उच्च मात्रा वाले खाद्य पदार्थों पर टैक्स, स्वस्थ आहार संबंधी वसा, नमक कम करना, कम सोडियम वाले नमक के विकल्प, सामाजिक और व्यवहार में बदलाव के लिए बातचीत, युवाओं की भागीदारी और स्वस्थ खान-पान को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक उपाय शामिल हैं। इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. एम. श्रीनिवास ने कहा कि बच्चों और किशोरों के लिए स्वस्थ खाद्य वातावरण बनाने के लिए साक्ष्य-आधारित और कई क्षेत्रों को शामिल करने वाली नीतिगत कार्रवाई आवश्यक है। ‘लेट्स फिक्स आवर फूड’ समूह जैसी सहयोगात्मक पहल भारत में बढ़ते वजन, मोटापे और खान-पान से जुड़ी गैर-संचारी बीमारियों के बढ़ते बोझ से निपटने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
भावी पीढ़ी के लिए जरूरी सलाह
इस अवसर पर आईसीएमआर-एनआईएन की निदेशक डॉ. भारती कुलकर्णी ने कहा कि आईसीएमआर-एनआईएन उच्च गुणवत्ता वाले साक्ष्य उत्पन्न करने और ऐसी साझेदारियों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है जो अनुसंधान को जन स्वास्थ्य संबंधी कार्यों में बदल सकें। ये नीतिगत सिफारिशें भारत की भावी पीढ़ियों के लिए बेहतर खान-पान का माहौल बनाने की दिशा में काम कर रहे शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं, विकास भागीदारों और युवाओं के सामूहिक प्रयासों को दर्शाती हैं। पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पीएचएफआई) के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) के.श्रीनाथ रेड्डी ने हानिकारक आहार के व्यावसायिक, सामाजिक और पर्यावरणीय कारकों से निपटने के लिए व्यापक नीतिगत हस्तक्षेपों की आवश्यकता पर बल दिया तथा बच्चों और किशोरों को मोटापा बढ़ाने वाले खाद्य वातावरण से बचाने के लिए निरंतर प्रयासों का आह्वान किया।
बच्चों में मोटापा चुनौती
कार्यशाला के दौरान कंसोर्टियम के तहत विकसित कई अन्य ज्ञान-संबंधी उत्पादों का भी विमोचन किया गया, जिनमें एलएफओएफ वेबसाइट, स्कूलों के लिए पोषण वातावरण आकलन टूलकिट (एनइएटी-एस) और उसकी रिपोर्ट, फूड लेबल को समझने के लिए एक ई-लर्निंग मॉड्यूल, और बच्चों व किशोरों के बीच पोषण साक्षरता को मजबूत करने के लिए वसा, चीनी और नमक पर आईसीएमआर-एनआईएन के शैक्षणिक संसाधनों का एक संग्रह शामिल है। यूनिसेफ इंडिया की पोषण प्रमुख मैरी-क्लाउड डेसिलेट्स ने कहा कि कुपोषण का मतलब अब सिर्फ़ पोषण की कमी नहीं है। अस्वास्थ्यकर आहार के कारण बढ़ रहा मोटापा बच्चों और किशोरों के स्वस्थ विकास के लिए चुनौती बना हुआ है। इन नीतिगत संक्षेप और स्कूलों के लिए पोषण वातावरण आकलन टूलकिट (एनइएटी-एस) का विमोचन स्कूलों में अधिक स्वस्थ खाद्य वातावरण बनाने की नीतियां तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हर बच्चे का यह अधिकार है कि उसे ऐसा खान-पान का माहौल मिले जो उसे फलने-फूलने, सीखने और अपनी पूर्ण क्षमता हासिल करने में मदद करे।
