नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। भारत के प्रमुख सार्वजनिक चिकित्सा संस्थान अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान (AIIMS) दिल्ली में फैकल्टी की भारी कमी हैं यहां फैकल्टी के लिए 1,306 स्वीकृत पदों में से 446 यानी 34 फीसद से अधिक पद वर्तमान में खाली हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक संसद के मौजूदा बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों से यह भी पता चला है कि देश का प्रमुख चिकित्सा संस्थान फैकल्टी के साथ-साथ गैर-फैकल्टी श्रेणी, जिसमें नर्सिंग अधिकारी, तकनीकी कर्मचारी और प्रशासनिक कर्मी शामिल हैं, में भी स्टाफ की कमी से जूझ रहा है।
एम्स: संसद में उठा सवाल
सरकारी डेटा के अनुसार एम्स दिल्ली में गैर-फैकल्टी श्रेणी के स्वीकृत 13,911 पद हैं, जिनमें से मौजूदा समय में 2,542 पद खाली हैं यानी रिक्तियों की दर 18 फीसद है। ये आंकड़े स्वास्थ्य मंत्रालय ने वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के सांसद गोल्ला बाबूराव द्वारा पूछे गए प्रश्नों के लिखित जवाब में बताए। ये आंकड़े देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थान में कर्मचारियों की कमी को उजागर करते हैं, जबकि यह देश के सबसे अधिक रोगियों को संभालता है। आंकड़ों से विभिन्न राज्यों में कई नए एम्स प्रतिष्ठानों में शिक्षकों की गंभीर कमी का भी पता चला है। बताया गया है कि एम्स मंगलगिरी में लगभग 52 फीसद शिक्षक पद रिक्त हैं। इसके बाद एम्स देवघर में लगभग 50 फीसद, एम्स राजकोट में लगभग 48 फीसद और एम्स बिबीनगर में लगभग 45 फीसद पद रिक्त हैं।
एम्स: संकट है पुराना
इससे पहले बीते साल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री प्रतापराव जाधव द्वारा सांसद जावेद अली खान को दिए गए लिखित जवाब में सामने आए आंकड़ों ने राष्ट्रीय महत्व के इन संस्थानों में मानव संसाधन संकट पर गंभीर सवाल उठाए थे। पिछले साल सरकार में संसद में जानकारी दी थी कि 2025-26 तक 21 एम्स में स्वीकृत शिक्षकों के 40 प्रतिशत से ज़्यादा पद रिक्त रहेंगे, जो पिछले चार वर्षों में सबसे ज़्यादा है। सरकारी आंकड़ों से यह भी पता चलता था कि 10 एम्स परिसरों: दिल्ली, भुवनेश्वर, जोधपुर, ऋषिकेश, मंगलागिरी, नागपुर, कल्याणी, गोरखपुर, बिलासपुर और देवघर में 2022-23 और 2025-26 के बीच फैकल्टी रिक्तियों में वृद्धि हुई है। एम्स भोपाल, रायपुर, मदुरै, पटना, बठिंडा, गुवाहाटी, बीबीनगर, रायबरेली, राजकोट और जम्मू में सुधार देखा गया।
