नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। 8 फरवरी 2026 तक U-WIN पोर्टल पर 11.12 करोड़ बच्चे और 3.78 करोड़ गर्भवती महिलाएं पंजीकृत हैं। यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में लिखित जवाब में यह बात कही। उन्होंने कहा कि प्रत्येक टीकाकरण कार्यक्रम के बाद लाभार्थी यू-विन पोर्टल से क्यूआर कोड आधारित टीकाकरण प्रमाणपत्र डाउनलोड कर सकते हैं। 2025 में 8.01 करोड़ लाभार्थियों का यू-विन में पंजीकरण हुआ और उन्हें डिजिटल क्यूआर कोड आधारित प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए गए। इसके अलावा 2025 के दौरान यू-विन पोर्टल के माध्यम से रिमाइंडर एसएमएस सहित कुल 29.42 करोड़ एसएमएस भेजे गए। स्वास्थ्य सेवा वितरण में सुधार लाने के लिए यू-विन को वर्तमान में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM), पोषण ट्रैकर और सेफवैक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ दिया गया है।
लोकसभा: MBBS सीटें बढ़ीं
एक अन्य प्रश्न पर श्रीमती पटेल बताया कि 2025-26 से 2028-29 तक केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत 10,023 चिकित्सा सीटें बढाने की मंजूरी दी है। शैक्षणिक वर्ष 2020-21 से 2025-26 तक देश में एमबीबीएस की 48,563 सीटें और स्नातकोत्तर की 29,080 सीटें बढ़ाई गई हैं। इसके अतिरिक्त, सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2028-29 तक सरकारी कॉलेजों में केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत 10,023 मेडिकल सीटों को जोड़ने की मंजूरी दी है। चिकित्सा सीटों के विस्तार से स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कर्मचारियों की कमी दूर होगी, विशेष रूप से कम सुविधा वाले क्षेत्रों में और इसका राज्यों में डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। चिकित्सा सीटों की बढ़ती संख्या, बुनियादी ढांचे और शिक्षकों में सुधार के साथ भारतीय छात्रों के लिए घरेलू संस्थानों तक पहुंच आसान हो गई है।
लोकसभा: 35.69 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी
अप्रैल 2020 से जनवरी 2026 तक आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के तहत लगभग 35.69 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए गए हैं। 31.जनवरी 2026 तक इस योजना के तहत निजी अस्पतालों के लिए 1.15 लाख करोड़ रुपये की राशि के 5.77 करोड़ अस्पताल भर्तियों को अधिकृत किया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
लोकसभा: खाद्य पदार्थों की पौष्टिकता पर नजर
FSSAI को खाद्य पदार्थों के लिए विज्ञान आधारित मानक निर्धारित करने और मानव उपभोग के लिए सुरक्षित और पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य पदार्थ तैयार करने, भंडारण, वितरण, बिक्री और आयात को विनियमित करने का दायित्व सौंपा गया है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 का कार्यान्वयन और प्रवर्तन केंद्र और राज्य सरकारों की साझा जिम्मेदारी है। एफएसएसएआई विज्ञान-आधारित मानक निर्धारित करने और समग्र समन्वय सुनिश्चित करने के लिए और राज्य खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण मुख्य रूप से जमीनी स्तर पर प्रवर्तन के लिए जिम्मेदार हैं। यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।
लोकसभा: नियमित निगरानी भी
एक अन्य और सवाल पर श्री जाधव ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम और उसके अंतर्गत बनाए गए विनियमों के तहत निर्धारित मानकों, सीमाओं और अन्य वैधानिक आवश्यकताओं का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एफएसएसएआई अपने चार क्षेत्रीय कार्यालयों और राज्यों के खाद्य सुरक्षा प्राधिकरणों के माध्यम से पूरे वर्ष दूध और दूध उत्पादों सहित विभिन्न खाद्य उत्पादों के लिए नियमित रूप से निगरानी अभियान, निरीक्षण और नमूनाकरण गतिविधियां संचालित करता है। मानकों से कोई विचलन या खाद्य सुरक्षा एवं मानक विनियम का उल्लंघन के दोषी खाद्य व्यवसायियों पर दंडात्मक उपायों सहित नियामक कार्रवाई की जाती है। उन्होंने कहा कि एफएसएसएआई ने वसा, नमक और चीनी की अधिक मात्रा वाले खाद्य पदार्थों के सेवन के हानिकारक प्रभावों को दूर करने के लिए ‘आज से थोड़ा कम’ नाम से जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य उपभोक्ताओं को आहार में बदलाव के माध्यम से धीरे-धीरे वसा, नमक और चीनी का सेवन कम करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
