भारत के सबसे तेजी से बढ़ते सेवा क्षेत्रों में से एक के रूप में उभरा: RIS
नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। विकासशील देशों की अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली (RIS) के एक नए अध्ययन के अनुसार आयुष सेवा क्षेत्र भारत के सबसे तेजी से बढ़ते सेवा क्षेत्रों में से एक बनकर उभरा है और इसका 2024-25 में अनुमानित आर्थिक योगदान 36.92 अरब अमेरिकी डॉलर है। 2022-23 से 16.91 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज करते हुए यह क्षेत्र स्वास्थ्य सेवा, कल्याण, रोजगार सृजन और चिकित्सा मूल्य यात्रा के माध्यम से भारत की आर्थिक वृद्धि में निरंतर योगदान दे रहा है। इस अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि आयुष सेवा अर्थव्यवस्था 2047 तक 216-318 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकती है। इस रिपोर्ट को 23 सितंबर को नागपुर में आयोजित 11वें आयुर्वेद दिवस समारोह के दौरान औपचारिक रूप से जारी किया गया।
महत्वपूर्ण उपलब्धि: जाधव
आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा था कि ये निष्कर्ष आयुष क्षेत्र की आर्थिक क्षमता को पहचानने में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस ऐतिहासिक अध्ययन के निष्कर्ष इस बात की पुष्टि करते हैं कि आयुष केवल एक सांस्कृतिक विरासत नहीं है, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था का एक गतिशील और उच्च विकास का इंजन है। आयुष क्षेत्र स्वास्थ्य सेवा, कल्याण, रोजगार और वैश्विक आर्थिक जुड़ाव में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है, साथ ही स्वस्थ और आत्मनिर्भर भारत के हमारे दृष्टिकोण में योगदान दे रहा है। आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर किए गए एक सर्वेक्षण के माध्यम से आयुष सेवा क्षेत्र के आर्थिक योगदान का आकलन किया गया है जिसमें सभी प्रमुख आयुष प्रणालियों को शामिल किया गया है। यह रिपोर्ट भविष्य की निवेश, नीति नियोजन और सुधारों के मार्गदर्शन के लिए एक मजबूत साक्ष्य आधार प्रदान करती है।
17 लाख लोगों की आजीविका भी
RIS के महानिदेशक प्रोफेसर सचिन कुमार शर्मा ने कहा कि यह अध्ययन भारत की आयुष सेवा अर्थव्यवस्था की साक्ष्य-आधारित समझ विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। सभी छह आयुष प्रणालियों के अंतर्गत 15,914 संस्थानों के राष्ट्रीय स्तर पर किए गए सर्वेक्षण के आधार पर यह निष्कर्ष दर्शाता है कि 36.92 अरब अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था लगभग 17 प्रतिशत वार्षिक दर से बढ़ रही है और 17 लाख लोगों की आजीविका का समर्थन करती है। यह अब एक गौण क्षेत्र नहीं बल्कि एक गतिशील, ज्ञान-आधारित सेवा अर्थव्यवस्था है। अध्ययन के अनुसार 2025 में आयुष सेवा अर्थव्यवस्था का अनुमानित मूल्य 36.92 अरब अमेरिकी डॉलर था, जिसने 2023 से 16.91 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) दर्ज की। ये निष्कर्ष भारत की आयुष सेवाओं के उद्भव को रेखांकित करते हैं, जिसमें गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे और वैश्विक पहुंच के माध्यम से भविष्य में विस्तार की अपार संभावनाएं हैं।
योग केंंद्रों का राजस्व भी बढ़ा
अध्ययन से पता चलता है कि क्लीनिक और डे-केयर सेंटर आयुष सेवाओं की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार हैं, जो मिलकर कुल क्षेत्रीय राजस्व का 71 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बनाते हैं। सिर्फ क्लीनिकों ने ही अनुमानित 16.21 बिलियन अमेरिकी डॉलर का राजस्व अर्जित किया, जबकि डे-केयर सेंटरों का योगदान 10.13 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। आयुर्वेद सबसे बड़ी व्यक्तिगत प्रणाली बनी रही, जिसका हिस्सा 17.73 बिलियन अमेरिकी डॉलर या क्षेत्रीय राजस्व का लगभग 48 प्रतिशत है। रिपोर्ट में आयुष आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के बढ़ते आर्थिक महत्व पर भी प्रकाश डाला गया है, जिसमें योग केंद्र, स्पा और आयुष आधारित सेवाएं प्रदान करने वाले रिसॉर्ट शामिल हैं। इस क्षेत्र में 21.29 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) दर्ज की गई है, जिसमें योग केंद्रों के राजस्व में दो वर्षों में लगभग 75 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो निवारक स्वास्थ्य, कल्याण और समग्र देखभाल सेवाओं की बढ़ती मांग को दर्शाती है।
रोजगार का भी प्रमुख स्रोत
अध्ययन से पता चलता है कि आयुष सेवा क्षेत्र रोजगार का एक महत्वपूर्ण स्रोत बनकर उभरा है। यह क्षेत्र प्रत्यक्ष रूप से 17 लाख लोगों की आजीविका का समर्थन करता है, जिनमें से दस लाख से अधिक नौकरियां स्थानीय और स्वतंत्र क्लीनिकों में केंद्रित हैं। आयुष सेवा क्षेत्र में कार्यरत कुल कर्मचारियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत है और कई संगठित क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी 50 प्रतिशत से अधिक है। आयुष आधारित सेवाएं प्रदान करने वाले स्वास्थ्य केंद्रों (स्पा और रिसॉर्ट) में 60 प्रतिशत से अधिक महिलाएं कार्यरत हैं, शैक्षणिक संस्थानों में 58 प्रतिशत, डे केयर सेंटरों में 57 प्रतिशत और अस्पतालों में 53 प्रतिशत महिलाएं कार्यरत हैं।
