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जहरीला पेयजल लोगों को दे रहा जानलेवा रोग

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। 200 से अधिक जिलों का पानी जहरीला है और लोग उसे पीकर बीमारियों को न्योता दे रहे है। ऐसा जलशक्ति मंत्रालय के दस्तावेज में कहा गया है। यह हाल ही संसद में बताया गया था। उसके मुताबिक ज्यादातर जिलों में भूजल में जहरीली धातुएं ज्यादा मात्रा में पाई गई हैं।

क्वालिटी की बानगी

सरकार के मुताबिक 25 राज्यों के 209 जिलों के कुछ हिस्सों में भूजल में आर्सेनिक की मात्रा 0.01 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक, 29 राज्यों के 491 जिलों के कुछ हिस्सों में भूजल में आयरन की मात्रा 1 मिलीग्राम प्रति लीटर, 11 राज्यों के 29 जिलों के कुछ हिस्सों में भूजल में कैडमियम की मात्रा 0.003 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक, 16 राज्यों के 62 जिलों के कुछ हिस्सों में भूजल में क्रोमियम की मात्रा 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक और 18 राज्यों में 152 जिलों में भूजल में 0.03 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक यूरेनियम है।

हर जगह जहर

दस्तावेज के मुताबिक देश की 80 फीसद से ज्यादा आबादी को जमीन से पानी मिलता है। अगर भूजल में खतरनाक धातुओं की मात्रा निर्धारित मानक से अधिक हो जाती है तो इसका अर्थ है कि पानी जहरीला हो रहा है। राज्यसभा में सरकार ने रिहायशी इलाकों की संख्या भी बताई है जहां पीने के पानी के स्रोत प्रदूषित हो गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक 671 इलाके फ्लोराइड से, 814 इलाके आर्सेनिक से, 14,079 इलाके लोहे से, 9,930 इलाके लवणता से, 517 इलाके नाइट्रेट से और 111 इलाकों का पानी भारी धातुओं से प्रभावित हैं।

गांवों में समस्या गंभीर

शहरों की तुलना में गांवों में यह समस्या अधिक गंभीर है क्योंकि आधी से अधिक आबादी गांवों में रहती है। वहां पेयजल के मुख्य स्रोत हैंडपंप, कुएं, नदियां या तालाब हैं जहां पानी सीधे जमीन से आता है। गांवों में इस पानी को साफ करने का कोई तरीका भी नहीं है।

किससे कौन बीमारी

पानी में आर्सेनिक, लोहा, सीसा, कैडमियम, क्रोमियम और यूरेनियम की मात्रा निर्धारित मानक से अधिक होने का सीधा असर स्वास्थ्य पर पड़ता हैं। अधिक आर्सेनिक से त्वचा रोगों और कैंसर, आयरन से नर्वस सिस्टम से संबंधित बीमारियां जैसे अल्जाइमर और पार्किंसन,ं लेड नर्वस सिस्टम, कैडमियम किडनी, क्रोमियम से छोटी आंत में डिफ्यूज हाइपरप्लासिया यानी ट्यूमर, यूरेनियम से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

सरकार ने राज्य पर छोड़ा

सरकार ने बताया कि लोगों को साफ पीने का पानी उपलब्ध कराना राज्यों की जिम्मेदारी है। वैसे साफ पेयजल के लिए जल जीवन मिशन के तहत 19.15 करोड़ ग्रामीण घरों में से 9.81 करोड़ घरों में नल के पानी की आपूर्ति की जा रही है। केंद्र की ‘अमृत 2.0’ योजना भी है जिसके तहत 2026 तक सभी शहरों में नल के पानी की आपूर्ति करने का लक्ष्य रखा गया हैं।

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