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सिलेबस में आयुर्वेद को शामिल करने की तैयारी

सिलेबस में आयुर्वेद को शामिल करने की तैयारी

नयी दिल्ली (स्वस्थ भारत मीडिया)। केंद्र सरकार अब स्कूली और उच्च शिक्षा पाठ्यक्रम में आयुर्वेद को शामिल करने की तैयारी कर रही है। आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने हाल ही में कहा कि इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को समग्र स्वास्थ्य की भारतीय परंपरा से जोड़ना है। इसके लिए NCERT और UGC मिलकर कोर्स तैयार कर रहे हैं। मालूम हो कि गोवा, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश पहले ही भारतीय ज्ञान परंपरा को अपने शिक्षा ढांचे में शामिल कर चुके हैं।

आयुर्वेद को मिलेगी वैश्विक पहचान

मीडिया खबरों के मुताबिक आयुष मंत्री ने कहा कि सरकार आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने के लिए सबूत-आधारित रिसर्च पर जोर दे रही है। सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेदिक साइंसेज (CCRAS) और अन्य शोध संस्थानों की मदद से उच्चस्तरीय क्लिनिकल ट्रायल किए जा रहे हैं। वहीं, WHO के साथ साझेदारी में मानक तय किए जा रहे हैं ताकि आयुर्वेदिक उपचार की वैज्ञानिक विश्वसनीयता और बढ़े। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आयुर्वेद और एलोपैथी के बीच कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। नेशनल आयुष मिशन और आयुष ग्रिड के जरिए हम दोनों को मिलाकर एक एकीकृत स्वास्थ्य मॉडल बना रहे हैं।

आयुर्वेद: स्वास्थ्य ढांचे को मिलेगी मजबूती

सरकार की योजना के तहत नेशनल आयुष मिशन के जरिए देशभर में आयुष हेल्थ सेंटर और औषधीय उद्यान स्थापित किए जा रहे हैं। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में आयुष डॉक्टरों की तैनाती की जा रही है ताकि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं सब तक पहुंच सकें। आयुष मंत्रालय ने पिछले दशक में आयुर्वेद और योग को वैश्विक पहचान दिलाई है। इंटरनेशनल योगा डे, WHO Global Centre for Traditional Medicine और विभिन्न देशों के साथ हुए एमओयू (MOU) इसके बड़े उदाहरण हैं। मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता संतुलित विकास है। हर चिकित्सा पद्धति की विशिष्टता को बनाए रखते हुए आधुनिक शोध, मानकीकरण और शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है।

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